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…तो 40 साल में यूपी के एडेड कॉलेजों में हो गईं 40 हजार से भी ज्यादा शिक्षकों-कर्मियों की अवैध भर्तियां, बैठी जांच

इन अवैध कार्मिकों के वेतन-भत्तों की मद में सरकारी खजाने को हर साल लग रही ₹2400 करोड़ की तगड़ी चोट

उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ की बैठक में शिक्षक नेता डाॅ. आरपी मिश्र ने जांच को बताया शिक्षकों के खिलाफ बड़ी साजिश, जांच नहीं रुकने पर 24 सितंबर से आंदोलन का दिया अल्टीमेटम

एफएनएन ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश के एडेड माध्यमिक विद्यालयों में चार दशक में शिक्षकों और चपरासियों की 40 हजार से भी अधिक  नियुक्तियां अवैध होने के संकेत मिल रहे हैं। इन फर्जी शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन आदि के मद मेम सरकारी खजाने पर सालाना 2400 करोड़ रुपये से भी अधिक के भुगतान की तगड़ी चोट झेलनी पड़ रही है।  वर्षों से चल रही इतनी बड़ी अनियमितता का खुलासा करने के मकसद से सतर्कता विभाग द्वारा सघन जांच भी शुरू कर दी गई है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के उप शिक्षा निदेशक चेतराम ने शीर्ष प्राथमिकता वाली इस जांच/सतर्कता अधिष्ठान का हवाला देते हुए प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को ईमेल भेजकर शिक्षकों-कर्मचारियों की मूल पत्रावली समेत अन्य जानकारियां तत्काल भेजने को कहा है।

सतर्कता अधिष्ठान की तरफ से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग में 10 जुलाई 1981 से वर्ष 2020 के बीच हुई 40 हजार से अधिक अध्यापकों/चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की भर्ती में की गई कथित अनियमितताओं के सापेक्ष सतर्कता अधिष्ठान, अयोध्या जांच कर रही है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी अभिलेखीय आख्या उपलब्ध न कराने पर दोबारा पुलिस अधीक्षक, उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान, लखनऊ सेक्टर, लखनऊ भी एक अगस्त 2024 को पुन: पत्र भेजकर द्वारा कई बिन्दुओं के सापेक्ष तत्काल अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दे चुके हैं।

उप शिक्षा निदेशक चेतराम ने पत्र में लिखा है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की नियुक्तियों के सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम-1982 की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने के साथ ही शासनादेश सं0-828/15-7-2003-2(10)-2003/शिक्षा अनुभाग-7 23 अगस्त 2003 माध्यमिक शिक्षा उत्तर प्रदेश शासन की सत्यापित प्रति भी दें।

मैनेजरों ने डीआईओएस से साठगांठ कर धड़ाधड़ कराईं अवैध भर्तियां

आशंका है कि वर्ष 1981 से 2020 के बीच पिछले 40 साल में माध्यमिक शिक्षा विभाग के एडेड विद्यालयों में खूब अराजकता फैलाई गई। नियुक्ति के नाम पर शिक्षकों-कर्मचारियों की मनमाने तरीके से भर्तियां की गईं। बहुत से एडेड कॉलेजों के मैनेजरों ने संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक से मिलकर न केवल अपने स्कूलों और संबंद्ध प्राइमरी सेक्शन में खूब फर्जी नियुक्तियां कर डालीं बल्कि चपरासियों की नियुक्ति में भी खूब अंधेरगर्दी की गई।

राजधानी लखनऊ में हो चुका है रिकॉर्ड फर्जी नियुक्तियों का भंडाफोड़

पिछले 20 साल की बात करें तो राजधानी लखनऊ में जिला विद्यालय निरीक्षक के पद पर चार बार तैनात रहे उमेश त्रिपाठी और डीएन सिंह ने ढाई सौ शिक्षकों और 200 के करीब चपरासियों की फर्जी नियुक्तियां करके एक रिकॉर्ड बनाया था। दिगंबर जैन, खुनखुन जी गर्ल्स इंटर कॉलेज, बाबा ठाकुरदास, चुटकी भंडार, इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज, डीएवी, कालीचरण, लालबाग गर्ल्स, सेंटीनियल, योगेश्वर, आर्यकन्या, रेलवे हायर सेकेंडरी समेत चार दर्जन स्कूलों में फर्जी नियुक्तियों की यह बड़ी अनियमितता प्रकाश में आई थी। एडेड स्कूलों में छात्रों के मुकाबले शिक्षकों की नियुक्ति ज्यादा है. जिनकी नियुक्ति है, उनमें से भी कई की डिग्रियां नियुक्ति से मेल नहीं खाती हैं। सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) के 1 अगस्त को जारी आदेश को देखते हुए महीने भर से ज्यादा अरसा गुजरने के बाद  माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा अब यह चिट्ठी जिलों को  आगे बढ़ाई है।

उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ की बैठक में जोर-शोर से उठा जांच का मुद्दा

शिक्षकों के विरुद्ध बड़ी साजिश है यह जांच: माशिसं 

इधर, उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के नेता डॉ. आरपी मिश्रा ने 1981 से 2020 के बीच नियुक्त 40 हजार शिक्षकों- कर्मचारियों की नियुक्तियों की जांच को शिक्षकों के विरुद्ध एक बड़ा षडयंत्र करार दिया है। संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों और सैकड़ों शिक्षक नेताओं की मीटिंग में उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्ष 2012 के बाद से प्रदेश में आयोग के माध्यम से कोई भर्ती नहीं हुई है। ऐसे में अगर यह जांच होती है तो शिक्षकों का केवल आर्थिक दोहन होगा। अगर शिक्षकों-कर्मचारियों के विरुद्ध यह जांच नहीं रुकती है तो संघ आगामी माध्यमिक शिक्षक संघ आगामी 24 सितंबर से आंदोलन की शुरुआत करेगा।

माध्यमिक शिक्षक संघ की बैठक में मौजूद शिक्षक नेता

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