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पाकिस्तान पर मेहरबान हुआ अमेरिका, राष्ट्रपति ट्रंप और पाक आर्मी चीफ मुनीर का सीक्रेट डील

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एफएनएन, वाशिंगटनः अमेरिका इन दिनों पाकिस्तान पर इतना मेहरबान क्यों है, यह सवाल न सिर्फ आपको बल्कि हर किसी को हैरान कर रहा है, लेकिन अब इस रहस्य से पर्दा उठ गया है। पाकिस्तान के प्रति अमेरिका की इतनी ज्यादा उदारता के पीछे पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई एक सीक्रेट डील है और अब सीक्रेट डील का खुलासा हो चुका है, और इसके बारे में जानकर आप भी चौंक जाएंगे। इस डील को समझने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि अमेरिका इस बार पाकिस्तान के प्रति इतना उदार क्यों हो रहा है। आइए, असीम मुनीर और डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी इस गुप्त डील का राज खोलते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की एक निजी क्रिप्टोकरेंसी कंपनी और पाकिस्तान में हाल ही में एक महीने पहले गठित क्रिप्टो काउंसिल के साथ एक बड़ा सौदा हुआ है। यह सौदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार और पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर से जुड़ा है और अब जांच के दायरे में आ गया है। इस सौदे में कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों की संलिप्तता सामने आई है। यह कंपनी “वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल” है, जो ट्रंप परिवार से संबंधित है।

क्या है कंपनी का ‘ट्रंप कनेक्शन’

यह फिनटेक कंपनी क्रिप्टोकरेंसी और ब्लॉकचेन निवेश से जुड़ी है, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप के बेटों एरिक और डोनाल्ड जूनियर तथा दामाद जैरेड कुश्नर की संयुक्त रूप से 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अप्रैल में इस कंपनी ने पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल के साथ एक इच्छा पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) पर हस्ताक्षर किए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल ने अपने गठन के कुछ ही दिनों बाद बिनांस के संस्थापक चांगपेंग झाओ को सलाहकार नियुक्त किया, ताकि इस नए संगठन को विश्वसनीयता मिले। बिनांस दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो एक्सचेंज है। लॉन्च के दौरान काउंसिल ने घोषणा की कि उसका लक्ष्य इस्लामाबाद को दक्षिण एशिया की “क्रिप्टो राजधानी” बनाना है।

‘असीम मुनीर ने कराई थी डील’

खबरों के मुताबिक, इस महत्वपूर्ण सौदे पर हस्ताक्षर करने के लिए अमेरिका से एक उच्च-स्तरीय टीम इस्लामाबाद पहुंची थी, जिसका नेतृत्व कंपनी के संस्थापक ज़ैकरी विटकॉफ ने किया। ज़ैकरी, डोनाल्ड ट्रंप के लंबे समय से कारोबारी साझेदार और वर्तमान में अमेरिका के मध्य पूर्व के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बेटे हैं। इस टीम का व्यक्तिगत रूप से स्वागत पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने किया। इसके बाद एक गोपनीय बैठक हुई, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और असीम मुनीर दोनों मौजूद थे। इस बैठक के बाद सौदा अंतिम रूप से तय हुआ।

‘पाक-अमेरिका की सौदे की शर्तें’

पाकिस्तान की क्रिप्टो काउंसिल और वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल की जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, इस समझौते के तहत वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल को पाकिस्तान के वित्तीय संस्थानों में ब्लॉकचेन तकनीक को एकीकृत करने की अनुमति दी गई है। इसमें संपत्तियों का टोकनाइजेशन, विभिन्न प्रकार की स्टेबलकॉइन का विकास और विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) परियोजनाओं के लिए रेगुलेटरी सैंडबॉक्स की सुविधा शामिल की गईं हैं। इस सौदे का उद्देश्य पाकिस्तान में “वित्तीय समावेशन और डिजिटल परिवर्तन” को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।

पहलगाम में आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस डील पर कड़ी नजर

पाहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और भारत की सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद इस सौदे पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा कि इस समझौते के पीछे “कोई राजनीतिक मंशा नहीं” है। हालांकि, ट्रंप परिवार और व्हाइट हाउस ने इस मुद्दे पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है। फिर भी, ट्रंप परिवार से जुड़ी इस कंपनी और पाकिस्तान सरकार के बीच सौदा कराने वाले असीम मुनीर के संबंध को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

पाकिस्तान के प्रति बदला अमेरिका का नजरिया

ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका की पाकिस्तान के प्रति मौजूदा उदारता का कारण यह सौदा हो सकता है। पहले ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। अमेरिका ने पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में डाल दिया था, जिससे आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लग गई। नतीजतन, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा गई और वह दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया। स्थिति इतनी खराब हो गई कि पाकिस्तान में लोगों को खाने-पीने की किल्लत होने लगी, और उसे कई देशों से मदद मांगनी पड़ी। वर्तमान में भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कमजोर बनी हुई है।

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