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ईरान का बड़ा साइबर/मिलिट्री वार? 6 देशों में अमेरिकी रडार सिस्टम ठप होने का दावा

एफएनएन, अमेरिका के बड़े अखबार वॉल स्‍ट्रीट जनरल की तरफ से किया गया है कि सऊदी अरब और यूएई सहित मिडिल ईस्‍ट के छह देशों में स्थित अमेरिका के सैन्‍स अड्डों के रडार सिस्‍टम को ईरान ने उड़ा दिया है. मध्य पूर्व में तनाव के बीच लगातार ईरान में जानमाल के भारी नुकसान की खबरें सामने आ रही थी. रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान ने सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य रडार प्रणालियों और मिसाइल डिटेक्शन केंद्रों पर हमला किया है. यह हमला न केवल खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा कवच में सेंध लगाता है बल्कि अमेरिका के उस दावे की भी पोल खोलता है जिसमें कहा गया कि ईरान पर वो बढ़त बनाए हुए है

अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने सऊदी अरब, कतर, यूएई, जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी रडार और मिसाइल डिटेक्शन सिस्टम पर हमला कर खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा कवच को भेद दिया है. इस सैन्य कार्रवाई के बीच ट्रंप की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ गया है. ईरानी सुरक्षा प्रमुख की धमकियों को ट्रंप ने खारिज करते हुए इसे एक पराजित मानसिकता का परिणाम बताया है.

अब ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले की स्थिति में उन्‍हें डिटेक्‍ट कर जवाबी हमला कर पाना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा. ईरान की इस कार्रवाई को अमेरिका और इजरायल के हालिया हमलों के जवाब में एक सोची-समझी सैन्य जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध की आग के मुहाने पर खड़ा कर दिया है.

इस सैन्य टकराव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं काफी बढ़ गई हैं. ईरानी सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने खुली चेतावनी देते हुए कहा था कि ट्रंप को अमेरिका-इजरायल हमलों की कीमत चुकानी होगी. इस बयान के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं.

रडार सिस्टम पर हमले का मतलब है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की आने वाली मिसाइलों या ड्रोनों को ट्रैक करने की क्षमता कम हो गई है. यह ईरान को भविष्य के हमलों के लिए एक ‘ब्लाइंड स्पॉट’ प्रदान करता है.

ईरान ने जॉर्डन से लेकर बहरीन तक हमला करके यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा. वह उन सभी देशों को लपेटे में ले सकता है जो अपनी जमीन पर अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को जगह देते हैं.

ट्रंप का मानना है कि लारीजानी ने मध्य पूर्व पर कब्जा करने की अपनी योजना को उनके दबाव के कारण छोड़ दिया है. ट्रंप इसे अपनी जीत बता रहे हैं, लेकिन रडार पर हमले यह संकेत देते हैं कि ईरान ‘बैकफुट’ पर होने के बजाय अपनी रणनीति बदल रहा है.

हालांकि ट्रंप ने इन धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए सीबीएस न्यूज से कहा कि उन्हें लारीजानी की बातों की कोई परवाह नहीं है और वे उन्हें एक पराजित व्यक्ति मानते हैं. इसके बावजूद ईरान द्वारा खाड़ी देशों में अमेरिकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि खतरा अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है बल्कि ट्रंप के अगले कार्यकाल के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बन चुका है.

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