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कवियों ने शिवाजी पार्क जनकपुरी के गणपति उत्सव का किया बहिष्कार, लगाए मुर्दाबाद के नारे

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काव्यपाठ का मौका नहीं देने और बीच में ही डांस की रिकॉर्डिंग चला देने से बिगड़ी बात

मोमेंटो, अंगवस्त्र फेंककर मंच से उतर आए सारे कवि, ऑडियंस ने भी दिया भरपूर साथ

एफएनएन ब्यूरो,बरेली। जनकपुरी के शिवाजी पार्क में रविवार 15 सितंबर से आयोजित दो दिवसीय गणेशोत्सव के पहले दिन भारी अव्यवस्थाओं के चलते कवियों और ऑडियंस ने सामूहिक रूप से बहिष्कार कर दिया और आयोजकों की काफी मान-मनौव्वल के बावजूद सभी कार्यक्रम  मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चले गए।

दरअसल, डॉ. रजनीश सक्सेना के संयोजकत्व और उमेश त्रिगुणायत अद्भुत के संचालन में कार्यक्रम पहले तो लगभग दो घंटे विलम्ब से शुरू हुआ। कवियों को साढ़े सात बजे का समय दिया गया था मगर मंच पर अन्य कार्यक्रम होते रहे। रात दस बजे के लगभग कवियों को मंच पर बुलाया गया। साथ में यह भी कह दिया कि कवि सम्मेलन जल्दी समाप्त करना है। अभी बच्चों के औऱ कार्यक्रम बाकी हैं।

कवियों ने लगभग बीस मिनट का ही समय लिया औऱ अंत में बरेली के वरिष्ठ गीतकार कमल सक्सेना ने माइक संभाला। उन्होंने केवल दो मिनट ही पढ़ा होगा, तभी पीछे से कहा जाने लगा कि समाप्त करो। पांडल में आगे सोफों पर बैठे प्रबुद्ध श्रोता उनको औऱ सुनना चाह रहे थे मगर कमल सक्सेना ने कहा कि समय की कमी है। मैं केवल चार पंक्तियाँ पढ़कर अपनी बात समाप्त करता हूँ। तभी मंच पर पीछे से कमेटी के किसी व्यक्ति ने डांस का टेप चला दिया।‌

इस पर कमल सक्सेना और अन्य सभी कवि भड़क गए। गुस्से से कमल ने माइक पर ही आयोजकों को खूब-खरी खोटी सुनाई औऱ कहा कि आयेजन ऐसे ही करना हो तो आज के बाद हमें कभी मत बुलाना। सभी कवि सम्मान के अंग वस्त्र औऱ मोमेंटो मंच पर फेंककर नीचे आ गये।‌ सभी प्रबुद्ध श्रोता भी कवियों का समर्थन करते हुए अपनी-अपनी सीटों से उठकर कार्यक्रम का बहिष्कार करते हुए पंडाल से बाहर आ गये। आयेजन समिति के कुछ लोग बाद में क्षमा भी मांगते रहे लेकिन कवि औऱ सभी श्रोता कार्यक्रम का बहिष्कार करके अपने अपने घरों को चले गये।

कार्यक्रम समाप्त ही हो गया तो बहिष्कार कैसा?

कार्यक्रम के संचालक उमेश त्रिगुणायत अद्भुत’ ने बताया कि कार्यक्रम विलंब से शुरू हो पाया। स्कूली बच्चों के कार्यक्रमों की वजह से कवियों को बुलवाने में भी देरी हुई। कार्यक्रम समाप्त ही होने वाला था। कमल सक्सेना अंत में काव्यपाठ कर रहे थे, तभी किसी ने दूसरे माइक पर धन्यवाद कह दिया और किसी ने डांस का टेप भी चला दिया। इसी पर गुस्से में कमल सक्सेना मोमेंटो आदि छोड़कर चले गए थे। जब कार्यक्रम समाप्त ही हो चुका था तो फिर उसके बहिष्कार की  क्या तुक है? 

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