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रुद्रपुर में ओमैक्स के 5.78 करोड़ रुपये पर कुंडली मारे बैठे हैं कालातीत ओरवा अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष

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  • ओरवा की नई कमेटी के अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष ने पुरानी कालातीत कार्यकारिणी के निवर्तमान ओहदेदारों पर लगाए गंभीर इल्जाम 
  • डीएम को ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित कराने पर दिया जोर

 

एफएनएन, रुद्रपुरः  कालातीत हो चुकी पुरानी ओमेक्स रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (ओरवा) कमेटी के निवर्तमान अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष ओमेक्स के 5.78 करोड़ रुपये के आईएफएमएस फंड पर अवैधानिक ढंग से कुंडली मारे बैठे हैं। बार-बार लिखित-मौखिक आग्रह करने के बावजूद नियमानुसार गठित नई कमेटी के अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष को कार्यभार भी नहीं सौंप रहे हैं। ओरवा की नवीन कमेटी के अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष ने गुरुवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर पुरानी कमेटी के अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष पर ये गंभीर आरोप लगाए। साथ ही विधिवत् गठित नवीन कार्यकारिणी को कई माह बाद भी कार्यभार न सौंपे जाने और गंभीर वित्तीय अनियमितताएं बरतने के आरोप लगाते हुए एसडीएम या तहसीलदार से निष्पक्ष जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित  कराने की मांग जोरशोर से उठाई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि ओरवा की पुरानी कमेटी का कार्यकाल जनवरी 2020 में ही खत्म हो चुका था। 26 जनवरी को एजीएम बुलाई गई जिसमें चुनाव समिति गठित कर 25 मार्च को चुनाव करवाने की घोषणा हुई थी। लेकिन कोरोना के चलते लाकडाउन लगने की वजह से उक्त चुनाव 28 जून को संपन्न हो पाए। उस दौरान बाकी कमेटी तो गठित हो गई थी लेकिन अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष पद रिक्त रह गए थे। लिहाजा इन दोनों रिक्त पदों पर 20 सितंबर को चुनाव कराए गए। चुनाव में विजय भूषण गर्ग अध्यक्ष और जतिन छाबड़ा कोषाध्यक्ष निर्वाचित हुए।

ज्ञापन में आरोप है कि ओरवा की पूरी नवीन कार्यकारिणी का नियमानुसार गठन हो चुकने के बाद भी पुरानी कालातीत कार्यकारिणी के अध्यक्ष लेखराज जेटली और कोषाध्यक्ष गौतम कथूरिया निहित स्वार्थों के चलते नई कमेटी को  कार्यभार ग्रहण नहीं करवा रहे हैं।  सोसाइटी का मेंटेनेंस देखने वाली संस्था सानवी इस्टेट मैनेजमेंट एजेंसी को बिना रेजिडेंट को बताए हटा दिया और खुद आफिस में बैठकर मनमर्जी से काम निपटाने लगे हैं जिससे कालोनी के बाशिंदों में आक्रोश है |
ओमेक्स से मिलने वाले 5 करोड़ 78 लाख रुपये आईएफएमएस फंड का भी कोई पता नहीं है। नए निर्माण कार्य बिना रेजिडेंट की सहमति के, बगैर एजीएम बुलाए कराए जा रहे हैं। ज्ञापन में डीएम से  पुरानी कालातीत कमेटी को निष्प्रभावी घोषित कर नियमानुसार गठित नवीन कार्यकारिणी को तत्काल कार्यभार दिलवाने का आग्रह किया गया है। इस पूरे प्रकरण की एसडीएम या तहसीलदार से जांच कराकर न्यायोचित कार्यवाही सुनिश्चित कराने पर भी जोर दिया गया है।

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