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Kota Syndrome: सपने टूटने की हताशा कोटा में कोचिंग ले रहे युवाओं को बना रही मानसिक रोगी

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बीएचयू हास्पिटल के न्यूरोलॉजी विभाग में हर माह पहुंचते हैं औसतन 10 युवा

एफएनएन, वाराणसी। मेडिकल, इंजीनियरिंग में कॆरियर चमकाने का सपना पूरा करने के इरादे से राजस्थान के कोटा में कोचिंग लेने जा रहे बहुत से युवा सपना टूटने पर गंभीर मानसिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में हर महीने औसतन 10 से अधिक ऐसे नवयुवक पहुंच रहे हैं, जो धड़कनें बढ़ने, झुंझलाहट और ऐसी ही तमाम शारीरिक-मानसिक समस्याओं से घिरे हुए हैं। न्यूरोलॉजी विभाग के काबिल डॉक्टर इन नौजवानों की काउंसिलिंग के साथ ही इन्हें जरूरी दवाइयां भी दे रहे हैं।

मेडिकल, इंजीनियरिंग में दाखिले की तैयारी की होड़ में भारी-भरकम फीस चुकाने और अच्छी टेलेंट, भरपूर मेहनत के बाद भी अपेक्षित सफलता नहीं मिलने पर बहुत से छात्र-छात्राएं गए युवा बीच में ही कोचिंग छोड़कर कोटा से लौट रहे हैं। सेमेस्टर एक्जाम में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाने के अलावा युवाओं की मानसिक कमजोरी की वजहें कई और भी हैं। इनमें से ज्यादातर युवाओं की शिकायत है कि रात में कई-कई घंटे तक उन्हें नींद ही नहीं आती है। डिप्रेशन और झुंझलाहट की समस्या भी बहुत ज्यादा बढ़ रही है। उनके दिल की धड़कन heart beats भी सामान्य से काफी तेज गति से चलती हैं। बीएचयू अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में हर महीने 25 साल तक के 10 से अधिक युवा उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यही कोटा या कोटार्ड सिंड्रोम है। ऐसे में इन विद्यार्थियों के साथ ही इनके अभिभावकों की भी काउंसिलिंग करवाई जा रही है। प्रभावित युवाओं को कई तरह की जरूरी दवाइयां भी दी जा रही हैं।

पैरेट्स बच्चों पर अपनी इच्छाएं नहीं थोपें

राजस्थान में कोटा को कोचिंग का हब कहा जाता है। जो युवा वहां अपने मिशन में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, वह बीमारियों के मकड़ जाल में फंसते जा रहे हैं। बीएचयू हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी विभाग अध्यक्ष प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि ओपीडी में युवाओं से बातचीत पर पता चलता है कि कोई परीक्षा में फेल हो गया है तो कोई उम्मीद से काफी कम नंबर ही ला सका है। ऐसे युवाओं में झुंझलाहट, नींद नहीं आने, धड़कनें बढ़ने, घरेलू सामान को इधर- उधर फेंकने जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। यह भी साफ हुआ है कि बहुत से माता-पिता बच्चों की इच्छा के विपरीत उन पर दबाव देकर कोटा भेज देते हैं। अभिभावकों को अपनी इस मानसिकता को भी नियंत्रित करने की सख्त जरूरत है।

कई स्टूडेंट्स में मिर्गी के भी लक्षण

जाने-माने न्यूरो एक्सपर्ट प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि जो युवा कोटा सिंड्रोम की चपेट में आ रहे हैं, उनकी काउंसिलिंग के साथ ही नींद की दवा, धड़कन सामान्य रहने की दवा भी दी जा रही है। पिछले एक साल में 150 युवाओं को परिजन उपचार के लिए लेकर बीएचयू अस्पताल आ चुके हैं। 20 युवाओं में मिर्गी के लक्षण भी देखने को मिले हैं। बचाव के उपाय, दवा के साथ ही अभिभावकों से सेहत पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

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