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दो लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली पहली राष्ट्रपति बनी द्रौपदी मुर्मू

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एफएनएन, अंबाला: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार यानी 29 अक्टूबर 2025 की सुबह अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से राफेल में उड़ान भरी. फाइटर प्लेन ने सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर टेक ऑफ किया और 11 बजकर 40 मिनट पर लैंड किया. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल में करीब 30 मिनट का सफर किया. राष्ट्रपति सुबह 9.15 बजे स्पेशल विमान से अंबाला पहुंची थीं. यहां एयरफोर्स स्टेशन पर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने उनका स्वागत किया.

राष्ट्रपति ने भारतीय वायु सेना का धन्यवाद किया: उड़ान के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आगंतुक पुस्तिका में संक्षिप्त नोट लिखा और अपनी भावनाएं व्यक्त कीं. जिसमें उन्होंने लिखा “भारतीय वायु सेना के राफेल विमान पर अपनी पहली उड़ान के लिए अंबाला वायु सेना स्टेशन आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है. राफेल पर उड़ान मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है. शक्तिशाली राफेल विमान पर इस पहली उड़ान ने मुझमें राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं के प्रति एक नए गौरव का संचार किया है. मैं इस उड़ान के सफल आयोजन के लिए भारतीय वायु सेना और अंबाला वायु सेना स्टेशन की पूरी टीम को बधाई देती हूं”

दो लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली पहली राष्ट्रपति: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भारतीय वायुसेना के दो लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति हैं. इससे पहले उन्होंने 2023 में सुखोई 30 एमकेआई में उड़ान भरी थी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विमान के साथ भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी एक अन्य राफेल विमान से उड़ान भरी थी.

स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह के साथ फोटो: इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह के साथ फोटो भी खिंचवाई. बता दें कि शिवांगी राफेल को उड़ाने वाली एकमात्र महिला पायट हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शिवांगी ने अहम भूमिका निभाई थी.
कैप्टन अमित गेहानी राफेल के पायलट: कैप्टन अमित गेहानी राष्ट्रपति को ले जाने वाले विमान के पायलट रहे. वो भारतीय वायु सेना की नंबर 17 स्क्वाड्रन, “गोल्डन एरो” के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) भी हैं. वायुसेना स्टेशन लौटने से पहले लगभग 30 मिनट तक राफेल ने उड़ान भरी और लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तय की. विमान ने समुद्र तल से लगभग 15000 फीट की ऊंचाई पर, लगभग 700 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ान भरी.
राष्ट्रपति को दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर: इससे पहले अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर सबसे पहले राष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की और एयरफोर्स स्टेशन की विभिन्न यूनिट्स का निरीक्षण किया. इसके अलावा राष्ट्रपति अधिकारियों से राफेल विमान की तकनीक, परिचालन प्रणाली और सुरक्षा रणनीति से जुड़ी जानकारी ली.

अंबाला एयरपोर्ट स्टेशन के आसपास की सुरक्षा कड़ी: कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भारतीय वायुसेना के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करेंगी. राष्ट्रपति के कार्यक्रम को देखते हुए अंबाला प्रशासन और एयरफोर्स ने सुरक्षा कड़ी की है. वायुसेना और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. एयरफोर्स स्टेशन के आसपास के इलाके को नो ड्रोन जोन घोषित किया गया है.

नो ड्रोन जोन घोषित: अंबाला SP अजीत सिंह शेखावत ने बताया “सुरक्षा के लिए हर एरिया में पुलिस, एसपीजी और एयरफोर्स की टीमें तैनात की गई है. अंबाला एयरपोर्ट स्टेशन और आसपास के इलाकों को नो ड्रोन जोन घोषित कर दिया गया है.” बता दें कि राफेल लड़ाकू विमान भारत ने फ्रांस से खरीदे हैं. 5 राफेल की पहली खेप 27 जुलाई 2020 को मिली थी. ये विमान सबसे पहले अंबाला एयरबेस पहुंचे थे.

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