03
Gemini_Generated_Image_yb399pyb399pyb39
WhatsApp Image 2026-08-14 at 9.45.28 AM
previous arrow
next arrow
Shadow

‘साहित्य सुरभि’ की 371वीं मासिक काव्य गोष्ठी में बही हास्य-व्यंग, भक्ति, ओज और राष्ट्रप्रेम की मंदाकिनी

Spread the love

एफएनएन ब्यूरो, बरेली। बरेली की प्राचीनतम साहित्यिक संस्थाओं में एक मई 1994 में स्थापित साहित्यिक संस्था ‘साहित्य सुरभि’ की 371वीं मासिक काव्य गोष्ठी रविवार को नैनीताल रोड स्थित कुंवर रनजीत सिंह इंटर कालेज में आयोजित की गई।

संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ‘ककरैली’ के संयोजकत्व में आयोजित इस गोष्ठी का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा मां वीणापाणि के चित्र पर धूप-दीप, माल्यार्पण और संस्थाध्यक्ष रामकुमार कोली की सरस वाणी वंदना से हुआ। मूर्धन्य साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ ने अध्यक्षीय काव्यपाठ में अपने इस उद्देश्यपूर्ण चेतना गीत से गोष्ठी को सर्वोच्च ऊंचाइयां बख्शीं-
चेतना के स्वर जो उभरे जड़ भी चेतन हो गए।
भाव जो मन में उठे सुरभित सुपावन हो गए।
देश की रक्षा के हित में गीत गायन जब हुआ,
गीत वो अपने वतन के नाम अर्पण हो गए।

वरिष्ठ साहित्यकार और गोष्ठी के मुख्य अतिथि हिमांशु श्रोत्रिय ‘निष्पक्ष’ की हास्य के रंग बिखेरती इस ग़ज़ल के हर शेअर पर भी खूब तालियां बजीं-
बताएं क्या तुम्हें क्या-क्या नज़ारे दिन में दीखेंगे,
मोहब्बत के तुम्हें असरात सारे दिन में दीखेंगे;
बने फिरते हो जिसकी याद में मजनूं अगर वो ही,
ग़ज़ाला बन गई बीवी तो तारे दिन में दीखेंगे।

बेहद ही खूबसूरत और सटीक काव्यमय संचालन कर रहे चर्चित ग़ज़लकार और कवि राज मिश्र ‘ग़ज़लराज’ की यह सम-सामयिक ग़ज़ल भी खूब सराही गई-
ज़िन्दगी में सिर्फ झंझावात हैं कुछ कीजिए,
हादसा दर हादसा हालात हैं कुछ कीजिए।
सत्यता पर छा रहीं फिर साजिशों की आंधियां,
ग़ुम रहे पीकर के विष सुकरात हैं कुछ कीजिए।

विशिष्ट अतिथि चर्चित हिंदी ग़ज़लकार रामकुमार भारद्वाज ‘अफरोज़’ ने यह ग़ज़ल सुनाई तो सब पूरे समय वाहवाह करते और तालियां ही बजाते रहे-
रंगरसियों को रिझाने की कला नृत्य का अभ्यास लेकर आ गई।
आम्रपाली के हृदय की वेदना बुद्ध से संन्यास लेकर आ गई।
आधुनिकता के बहाने मॉडलिंग सैक्सी विन्यास लेकर आ गई।
ध्यान में अफरोज़ मेरे ये ग़ज़ल चेतना बिंदास लेकर आ गई।

‘साहित्य सुरभि’ के अध्यक्ष वरिष्ठ कवि रामकुमार कोली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबूधावी में 700 करोड़ रुपये की लागत से बनवाए गए भव्य हिंदू मंदिर पर अपना चर्चित गीत प्रस्तुत कर वाहवाही और तालियां बटोरीं-
मुस्लिम देश ने बनाया परिवेश ऐसा,
पाक की नापाक नाक चाक करी यार है।
श्रेय तो देना ही होगा मोदी जी को बार-बार,
जुड़ेगा और भी तार बना जो बेतार है।

वरिष्ठ कवि-पत्रकार गणेश ‘पथिक’ ने यह ओजपूर्ण आह्वान गीत सुनाकर खूब तालियां और वाहवाही बटोरीं-

खून में जिसके रवानी है-                                                        नाम उसका ही जवानी है।                                                       हाथ में निज पूर्वजों की खड्ग लेकर-                                      गर्वीले निज विगत से प्रारब्ध लेकर।                                              ऐ ‘पथिक’ पाथेय संचित कर रही जो-                                     अनमिटी वो इक निशानी है।

गीतकार, हास्य-व्यंगकार प्रकाश निर्मल ने वेलेंटाइन डे पर हास्य कविता के साथ सुर-लय में यह गीत गाया तो पूरे समय वाहवाह और तालियां ही गूंजती रहीं-
टूटी नाव दूर है गांव जाना हमको पार
मांझी दे ना जाय हार,
रक्तरंजित घाव और कंटीले वन,
बीता जीवन काटते पर्वतों के तन,
पत्थरों से जूझते टूटी कुदाली धार,
मांझी दे ना जाय हार।

मुक्तक विधा के सिद्धहस्त कवि राम प्रकाश सिंह ‘ओज’ ने गांव-किसान की उपादेयता का भान इस मुक्तक से कराया-
गांव की खूबियां हम चार पंक्ति में कह नहीं सकते,
ग्रामवासियों की अवहेलना भी हम सह नहीं सकते,
कितने ही मॉडर्न क्यों न हो गए हों हम लेकिन,
बिना किसान की मेहनत के जिंदा रह नहीं सकते।

व्यंगकार दीपक मुखर्जी ‘दीप’ ने इन पंक्तियों से जोश भरा-
तुम ही अर्जुन हो बस, उसे जगाना होगा
स्वच्छंद चल रही धृतराष्ट्र की महासभा का अंत तुमको ही करना होगा।
राजकुमार अग्रवाल ‘राज़’ का यह गीत भी खूब प्रशंसित हुआ-
फिर आ गया बसंत सजन तुम घर कब आओगे?
महक रहा है चमन सजन तुम घर कब आओगे?

हास्य-व्यंग, भक्ति और अन्य विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर मनोज दीक्षित ‘टिंकू’ ने वर्तमान युग की बड़ी चिंताओं को स्वर देता यह समसामयिक गीत सुरीले सुर में सुनाया तो उन पर तालियों और वाहवाही की बौछार सी हो गई-
रावण राज छा गया जग में
राम राज पलायन
सुनो भई कलियुग की रामायण।                                             आज हर तरफ दगा-दगा है,                                                      हर एक छुरे में खून लगा है।                                                                 खाकी रंग भी नहीं सगा है,                                              खादी ने भी दई दगा है।                                                   इन दोनों ने मिलकर अपने काम बनायन।                             सुनो भई कलियुग की रामायण।

कवि-शिक्षक डॉ. धर्मराज यादव ने सम-सामयिक चिंताओं को उकेरती यह अतुकांत कविता सुनाकर सबका ध्यान आकर्षित किया और प्रशंसा भी प्राप्त की-
मन:स्थिति का ऐसा हो जाना-
एक सहज जीवन में इतनी वर्जनाएं–!
तो कैसे जीवन सहज रह जाएगा?
संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ‘ककरैली’ ने इस कविता से सबका ध्यान खींचा-
घपाघुप्प अंधकार,
झींगुरों का तालमय संगीत
विभिन्न नवशूलों से युक्त
जिंदा खून आंखों में छा गया है।

सरस-यादगार काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामशंकर शर्मा ‘प्रेमी’, हास्य-व्यंगकार पीके दीवाना, प्रताप मौर्य ‘मृदुल’,  उमेश त्रिगुणायत ‘अद्भुत’ ने भी अपनी उत्कृष्ट रचनाएं सुनाकर खूब तालियां और वाहवाही बटोरी।

Hot this week

Roorkee में चार बाइकों की भीषण भिड़ंत, तीन युवकों की मौत, छह घायल

एफएनएन, रुड़की : Roorkee में कलियर रोड पर शुक्रवार...

Rudrapur Kisan आंदोलन में हड़कंप, प्रदर्शनकारी युवक के पास मिली पंपिंग गन

एफएनएन, रुद्रपुर : उधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय...

Vande Mataram को लेकर कांग्रेस पर BJP का हमला, महेंद्र भट्ट ने लगाए गंभीर आरोप

एफएनएन, देहरादून : Vande Mataram राष्ट्रगीत वंदेमातरम के पूर्ण...

Topics

Roorkee में चार बाइकों की भीषण भिड़ंत, तीन युवकों की मौत, छह घायल

एफएनएन, रुड़की : Roorkee में कलियर रोड पर शुक्रवार...

Rudrapur Kisan आंदोलन में हड़कंप, प्रदर्शनकारी युवक के पास मिली पंपिंग गन

एफएनएन, रुद्रपुर : उधम सिंह नगर के जिला मुख्यालय...

Vande Mataram को लेकर कांग्रेस पर BJP का हमला, महेंद्र भट्ट ने लगाए गंभीर आरोप

एफएनएन, देहरादून : Vande Mataram राष्ट्रगीत वंदेमातरम के पूर्ण...

Nandanagar में दर्दनाक सड़क हादसा, गहरी खाई में गिरी कार ; सेना के जवान की मौत

एफएनएन, चमोली : Nandanagar चमोली जिले के विकासखंड नंदानगर...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img