एफएनएन, देहरादून : Vande Mataram राष्ट्रगीत वंदेमातरम के पूर्ण गायन को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे तुष्टिकरण की राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह फैसला राष्ट्रीय भावना और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
महेंद्र भट्ट ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय और गोवा में आयोजित कार्यक्रमों में वंदेमातरम का पूरा गायन नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से वंदेमातरम के केवल दो छंदों के गायन को पार्टी की आधिकारिक नीति बनाए जाने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह निर्णय राष्ट्रीय गीत और भारत माता के सम्मान से जुड़ी भावनाओं की अनदेखी करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारी कार्यक्रमों में वंदेमातरम के गायन को स्वीकार करती है, लेकिन अपने पार्टी कार्यालयों में इसके पूर्ण स्वरूप के गायन से पीछे हट रही है।
महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के 1937 के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय की तुष्टिकरण की राजनीति ने देश के विभाजन की परिस्थितियों को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक वोटों की राजनीति के चलते कांग्रेस ने वंदेमातरम के पूर्ण स्वरूप को लेकर समझौता किया था और आज भी उसी सोच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
भट्ट ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत के संपूर्ण गायन से बचना या उसमें बाधा डालना कानून के दायरे में आता है, लेकिन कांग्रेस इन सवालों को नजरअंदाज कर रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एक वर्ग विशेष के वोटों के लिए कांग्रेस देश के विभाजन तक की सोच को बढ़ावा देने के लिए तैयार दिखाई दे रही है। उन्होंने कांग्रेस के इस निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि भाजपा इसे जनसहयोग के माध्यम से सफल नहीं होने देगी।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस भले ही वंदेमातरम नहीं गाने के मुद्दे पर बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन देशवासी राष्ट्रहित और देश की एकता के लिए वंदेमातरम का उद्घोष करते आए हैं और आगे भी करते रहेंगे।
वंदेमातरम के पूर्ण गायन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच शुरू हुई यह राजनीतिक बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं। भाजपा जहां इसे राष्ट्रसम्मान और राष्ट्रीय भावना का मुद्दा बता रही है, वहीं कांग्रेस के फैसले को लेकर सियासी बहस लगातार बढ़ती जा रही है।







