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‘साहित्य सुरभि’ की नियमित मासिक काव्य गोष्ठी में बिखरे कविताई के चटख रंग, खूब बजीं तालियां

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फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। स्मृति शेष साहित्यकार राममूर्ति गौतम गगन द्वारा स्थापित साहित्यिक संस्था “साहित्य सुरभि” की 384वीं नियमित मासिक काव्य गोष्ठी प्रतिष्ठित के.डी.ई.एम. इंटर कॉलेज कोहाड़ापीर नैनीताल रोड पर रेलवे के राजपत्रित अधिकारी (से.नि.)/हास्य कवि पी.के .दीवाना के संयोजन में आयोजित की गई।

अध्यक्षता रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ ने की। मुख्य अतिथि विनय सागर जायसवाल, विशिष्ट अतिथि कवि-पत्रकार गणेश ‘पथिक’ और एस.के.कपूर ‘श्री हंस’ रहे। राज शुक्ल” ग़ज़लराज” ने अपनी सटीक-असरदार आशु कविताओं से गोष्ठी का बेहद ही सफल-रुचिकर और काव्यमय संचालन किया।

काव्य गोष्ठी का प्रारंभ मनोज टिंकू दीक्षित की सरस्वती वंदना से हुआ। गोष्ठी में शहर के प्रतिष्ठित 25 कवियों ने अपनी सहभागिता प्रदान कर अपनी रचनाओं द्वारा सतरंगी छटा बिखेरी। श्रोताओं ने सभी कविताओं का भरपूर आनंद लिया।

डॉ. बी. एन. शास्त्री ने बरेली कमिश्नरी स्थित वटवृक्ष और उस पर फांसी पर लटकाए गए अनाम शहीदों को याद कर स्वतंत्रता संग्राम का हृदयस्पर्शी-मार्मिक- जीवंत बिम्ब प्रस्तुत किया।

कवि-पत्रकार और गोष्ठी के विशिष्ट अतिथि गणेश ‘पथिक’ का यह संदेशप्रद गीत भी खूब पसंद किया गया-आंसू पीकर खुशियां बांटें, घृणा-द्वेष दफनाएं हम, ज्योति दीप धर हृदय देहरी जग ज्योतित कर जाएं हम।’ विशिष्ट अतिथि एसके कपूर ‘श्री हंस’ ने हास्य कविता प्रस्तुत की-‘जो मकान को घर बना दे वह पत्नी होती है’। अध्यक्ष रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ ने विश्व पर छाए युद्ध के विनाशकारी बादलों पर चिंता जताई-‘विश्व युद्ध के बादल अब आकाश पर छाए हैं, लगता है अपनी शक्ति के कारण ही बौराये हैं।’

कवयित्री नीतू गोयल ने सुरीला गीत सुनाया- ‘चिनार के पत्तों पर ख्वाब लिख दिए जाएं तो पूरे हो जाते हैं।’ रजत कुमार ने कहा-तुरंत जंग बंद करो सभी यह आवाज बुलंद करो। लक्षेश्वर ‘राजू’ गुनगुनाए-एक और भी जहां है सितारों के दरमियां। गीतकार कमलकांत श्रीवास्तव ने तरन्नुम में गाया- ‘बहुत हुआ दर्दे दिल अब बार-बार नहीं’।

व्यंगकार दीपक मुखर्जी ‘दीप’ ने इस कविता से गुदगुदाया- ‘नत्थूलाल तुम्हारे घर का फुंका कारतूस मौके पर बम बन गया, आठवां पास सरकारी नौकरी में लग गया।’ मुख्य अतिथि विनय सागर जायसवाल ने दिल की बातें कुछ इस तरह खूबसूरत ग़ज़ल में पिरोईं-‘दिल की चादर जरा बड़ी कर ली, घर की बगिया हरी भरी कर ली’।

इनके अतिरिक्त सरल कुमार सक्सेना, अमित मनोज, पीके दीवाना, किशन बेधड़क, बृजेंद्र तिवारी ‘अकिंचन’, राजकुमार अग्रवाल ‘राज’, मनोज दीक्षित ‘टिंकू’, राज शुक्ल ‘ग़ज़लराज’, रीतेश कुमार साहनी ,रामकुमार कोली, डीपी निराला, मनोज सक्सेना, रामकुमार भारद्वाज अफरोज, विवेक विद्रोही, डी.पी. निराला, रीतेश साहनी, रामकुमार कोली, डॉ राजेश शर्मा ‘ककरैली’ आदि की रचनाएं उत्कृष्ट एवं सराहनीय रही।

सभी कवियों को सम्मानित करते हुए कार्यक्रम संयोजक पीके दीवाना ने सबका धन्यवाद ज्ञापित किया।

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