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धर्म रक्षा हेतु जीवन की भी आहुति देनी पड़े तो संकोच मत करना

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खिरका जगतपुर में संगीतमय साप्ताहिक श्रीरामकथा के दूसरे दिन भी कथाव्यास आचार्य अवध किशोर शास्त्री ‘सरस’ ने की ज्ञान-भक्ति की सरस रसवर्षा, बड़ी संख्या में जुट रहे श्रद्धालु

फ्रंट न्यूज नेटवर्क, फतेहगंज पश्चिमी-बरेली। ग्राम खिरका जगतपुर में साप्ताहिक श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन आज सोमवार को मध्याह्न वेला में नैमिष धाम से आए कथाव्यास आचार्य अवध किशोर शास्त्री ‘सरस’ जी ने अपनी सरस वाणी से रामकथा के अनेक भक्तिभाव भरे प्रसंगों का संगीतमय गायन किया और बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालु महिला-पुरुषों का मन मोह लिया।

मटरूलाल लालीदेवी मेमोरियल ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी और समारोह के आयोजक सूबेदार मेजर वीरेंद्र पाल सिंह के संयोजकत्व में आयोजित साप्ताहिक रामकथा में कथाव्यास महाराज श्री ने दूसरे दिन की कथा में माता सती द्वारा श्रीराम के भगवान स्वरूप पर शंका करने और सीता रूप में उनकी परीक्षा लेने, भगवान शिव द्वारा पत्नी रूप में सती का त्याग करने और 87 हजार वर्षों की लंबी अखंड समाधि लगाने जैसे ज्ञान-भक्ति वर्धक प्रसंग सुनाए।

कथाव्यास ‘सरस’ जी महाराज ने समझाया कि माता-पिता, गुरु और संत की आज्ञा का बिना कुछ सोचे आंख मूंदकर तुरंत पालन करना चाहिए। सचेत किया कि गुरु के वचनों पर अविश्वास करने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रहता और सदैव दुखों के गहरे अंधकूप में ही डूबा रहता है।

कहा-भगवान से सच्ची प्रीत करने वाला जन्म-मृत्यु के अपार कष्ट सागर को भी पलक झपकते पार कर लेता है। दक्ष यज्ञ में भगवान शिव के अपमान से क्षुब्ध होकर माता सती द्वारा यज्ञ कुण्ड में कूदकर भस्म हो जाने का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि धर्म की रक्षा हेतु स्वयं के जीवन की आहुति देनी पड़े तो भी संकोच नहीं करना चाहिए।

उन्होंने वीरभद्र द्वारा दक्ष के यज्ञ विध्वंस और सती के हिमाचल-मैना के घर में पार्वती के रूप में पुनर्जन्म, पति रूप में शिव को प्राप्त करने के लिए हजारों वर्षों के कठोर तप, शिव-पार्वती विवाह और शिव पुत्र स्वामी कार्तिकेय द्वारा तारकासुर वध जैसे प्रसंग सुनाए और श्रद्धालुओं में भक्तिभाव जगाने की सार्थक कोशिश की।

अनुष्ठान में पूजन विधि का दायित्व आचार्य सतेंद्र दीक्षित कुशलतापूर्वक संभाल रहे हैं। ढोलक पर राहुल, आर्गन पर दिनेश और घड़े पर रामरतन संगत देकर संगीत की रसवर्षा करते हैं।

आज के अनुष्ठान में मुख्य यजमान नत्थूलाल गंगवार पुजेरी, पूर्व प्रधान कृष्णपाल गंगवार, कवि-पत्रकार गणेश ‘पथिक’, हरिशंकर, जानकी प्रसाद, भूपराम, पूर्व प्रधान हरीश गंगवार, किशोर गंगवार, हरदयाल गंगवार,आचार्य सुनील कुमार और बड़ी संख्या में मातृशक्ति और बच्चों की भी पूरे समय सक्रिय सहभागिता रही। कथासत्र को भगवान की आरती और प्रसाद वितरण के साथ भावपूर्ण विराम दिया गया।

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