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“एक नया फिर नागयग्य जनमेजय! आओ रचाते हैं।”

‘शुभम’ की मासिक काव्य गोष्ठी में संस्थाध्यक्ष-कवयित्री सत्यवती ‘सत्या’ ने फिर कराया चार विभूतियों का अभिनन्दन

पिछले छह साल से नियमित करवा रहीं मासिक कवि गोष्ठियां, 100 से ज्यादा विभूतियों का अभिनन्दन भी करवा चुकी हैं

एफएनएन ब्यूरो, बरेली। बरेली की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था “शुभम मेमोरियल साहित्यिक-सामाजिक जनकल्याण समिति” के बैनर तले रविवार शाम नियमित मासिक कवि गोष्ठी और कवि-पत्रकार अभिनन्दन समारोह स्टेडियम रोड स्थित खुशहाली सभागार में आयोजित किया गया।

वरिष्ठ समाजसेवी एवं भाजपा नेता अनिल कुमार सक्सेना ने मुख्य अतिथि की हैसियत से वरिष्ठ पत्रकार-नेता डाॆ. पवन सक्सेना, वरिष्ठ गीतकार कमल सक्सेना और पंतनगर उत्तराखंड से आए केपी सिंह ‘विकल’ और ओमशंकर मिश्र समेत चार विभूतियों का फूलमालाएं पहनाकर, बैच लगाकर, अंगवस्त्र उढ़ाकर और लेमिनेटिड सम्मानपत्र प्रदान कर सारस्वत अभिनन्दन किया। साथ ही संस्था की वार्षिक पत्रिका ‘सत्यम्, शिवम्, सन्दरम्’ का अपने हाथों से विमोचन भी किया। पत्रिका में से चर्चित कवयित्री डाॆ. रेणु श्रीवास्तव, ग़ज़लराज और कई अन्य कवियों की भी कविताएं संकलित हैं।

मुख्य अतिथि श्री सक्सेना ने कविताओं के माध्यम से सरकार-समाज को लगातार चेताने और दिशाबोध कराने वाले सभी कवियों-शायरों और अपने युवा सुपुत्र शुभम की पुण्य स्मृति में पिछले वर्ष 2018 से लगातार मासिक कवि गोष्ठियां कराती आ रहीं और अपने मंच से 100 से भी ज्यादा साहित्यकारों का सम्मान करवा चुकीं संस्थाध्यक्ष-वरिष्ठ कवयित्री सत्यवती सिंह ‘सत्या’ का विशेष आभार जताया।
इससे पहले उस्ताद शाइर-ग़ज़ल-गीतकार विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता और वयोवृद्ध साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ के विशिष्ट आतिथ्य में मोहन चंद्र पांडेय की सस्वर सरस्वती वंदना और मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुई इस सरस काव्य गोष्ठी में पड़ोसी उत्तराखंड, बदायूं, मुरादाबाद और बरेली के 45 से अधिक चर्चित महिला-पुरुष, युवा कवियों-शाइरों ने अपनी सशक्त-यादगार रचनाओं के माध्यम से आतंकवाद, भ्रष्टाचार, राजनीति के लगातार गिरते स्तर और परिवार-समाज और देश-दुनिया में लगातार घटते प्रेम-विश्वास, सह अस्तित्व, विश्वबंधुत्व और तेजी से बढ़ते विस्तारवाद, बाजारवाद, युद्ध, हिंसा, असमानता आदि चिंताओं-विद्रूपताओं पर कस-कसकर प्रहार किए और खचाखच भरे सदन की खूब तालियां और वाहवाही बटोरी।

वरिष्ठ पत्रकार-कवि गणेश ‘पथिक’ ने अपनी इस ओजपूर्ण राष्ट्रीय कविता से मंच और सभी सुधी कवि श्रोताओं को नए जोश और ऊर्जा से भर दिया-
आतंकी नागों के फन पर कालियदह लिख आते हैं
आओ इस स्वातंत्र्य पर्व पर रावण दहन मनाते हैं।
भारत को अब भी माता का सम्मान नहीं दे पाए जो,
राष्ट्रगीत को सच्चे मन से मान नहीं दे पाए जो,
राजनीति की धृतराष्ट्री बंदूकों जैसे तने रहें जो,
चंद स्वार्थी हाथों की कठपुतली जैसे बने रहें जो,
घर-घर में कुंडली मार घुस बैठे जो आतंकी अजगर,
एक नया फिर नागयग्य जनमेजय! आओ रचाते हैं।
वरिष्ठ ग़ज़लकार-विशिष्ट अतिथि विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़ल पर भी खूब तालियां बजीं-
बड़े अजीब से मंज़र से सामना है मेरा
बग़ैर कश्ती समुंदर से सामना है मेरा
लुटा था जिसके इशारे पे मेरे दिल का जहां
उसी मिज़ाज के रहबर से सामना है मेरा।
वरिष्ठ ग़ज़ल-गीतकार राज शुक्ल ‘ग़ज़लराज’ की यह ग़ज़ल भी खूब सराही गई-
अंधी बहरीं आज सरकारें कहाँ से आ गईं-
जानलेवा हाय मीनारें कहाँ से आ गईं?
जिनके हाथों में कलम कापी थी होनी चाहिए-
पास उनके आज तलवारें कहाँ से आ गईं?
किच्छा उत्तराखंड से आए नबी अहमद मंसूरी ने सावन में शिव भक्ति पर आधारित अपने छंद और सामाजिक समरसता का शंखनाद करती इस रचना से सबको खूब आनंदित किया-
शंख बनकर मैं बजूं तुम अज़ान हो जाना,
रहल पर रखे हुए गीता-कुरान हो जाना।
जब बढ़ें प्रभु रामजी दशानन के वध के वास्ते,
तीर मैं बन जाऊंगा, तुम कमान हो जाना।
मंचासीन सभी वरिष्ठ कवियों के साथ ही सदन में विराजमान हिमांशु श्रोत्रिय ‘निष्पक्ष’, रामकुमार भारद्वाज ‘अफरोज़’, रामप्रकाश सिंह ‘ओज’, रामस्वरूप गंगवार, अमित मनोज, रीतेश साहनी, आभा सक्सेना, शायर मुरादाबादी, चंदन सिंह बोरा, सरफराज हुसैन ‘फराज़’, ब्रजेंद्र तिवारी ‘अकिंचन’, शैलेंद्र मिश्रा देव, अजीत अवि, राजकुमार अग्रवाल, प्रकाश निर्मल, दीपक मुखर्जी, उमेश त्रिगुणायत अद्भुत, डाॆ. रेणु श्रीवास्तव, पृथवीराज सिंह ‘आनंदित’आदि ने भी काव्यपाठ कर गोष्ठी को यादगार बनाने में सहयोग किया। मनोज दीक्षित टिंकू’ ने काव्यमय सफल संचालन किया। सुपुत्र स्वर्गीय शुभम की पावन जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में संस्थाध्यक्ष श्रीमती सत्या” ने अपने साहित्यिक गुरु ब्रजेंद्र तिवारी ‘अकिंचन’ को भी अंगवस्त्र उढ़ाकर सम्मानित भी किया।

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