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‘साहित्य सुरभि’ की 381वीं मासिक काव्य गोष्ठी में कवियों ने कभी हंसाया तो कभी भक्तिसागर में लगवाए गोते

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फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। स्मृति शेष वरिष्ठ साहित्यकार राममूर्ति गौतम ‘गगन’ द्वारा स्थापित साहित्यिक संस्था ‘साहित्य सुरभि’ की 381वीं मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन कवयित्री ज्ञान देवी वर्मा के पीलीभीत बाईपास, कुबेर होम्स कॉलोनी स्थित आवास में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ ने की और मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि का दायित्व क्रमश: हिमांशु श्रोत्रिय ‘निष्पक्ष’ तथा श्रीमती शिवरक्षा पांडेय ने संभाला।

मां वाणी के पूजन-अर्चन और मंच के सम्मान के उपरांत गोष्ठी का शुभारम्भ उमेश त्रिगुणायत ‘अद्भुत’ की सरस-प्रभावशाली सरस्वती वंदना से हुआ।

कवि गोष्ठी 2:00 बजे से शुरू होकर शाम 6:00 तक चली। इसमें 27 कवियों ने सहभागिता की और अपनी हास्य व्यंग, गंभीर चिंतन, श्रृंगार, राष्ट्रप्रेम, अध्यात्म, दर्शन और सम-सामायिक रचनाओं के माध्यम से सशक्त प्रस्तुतियां दीं।

राज शुक्ल ‘ग़ज़लराज’, रामकुमार भारद्वाज अफरोज़,  राजकुमार अग्रवाल ‘राज’, अमित ‘मनोज’ आदि ने गजल को नए अंदाज में कहकर वाहवाही और तालियां बटोरींं।

कवि-पत्रकार गणेश ‘पथिक’ ने ओज-राष्ट्रप्रेम से भरा यह गीत सुनाया तो सब वाहवाह करने लगे-

शक्ति की हुंकार ले असुरारि शर संधान कर लो।

फिर विजय के पर्व पर श्रीराम मां का ध्यान धर लो।

आज सोए हैं पवनसुत, भीम भी खोए कहीं हैं-

दें चुनौती कौरवों को बीज वो बोए नहीं हैं।

फिर उदधि के गर्भ से ज्वालाएं उमड़ीं हलाहल की-

सृष्टिरक्षा के लिए शंकर पुन: विषपान कर लो।

गोष्ठी में संस्था के अध्यक्ष सर्वश्री रामकुमार कोली, कार्यक्रम की संयोजिका श्रीमती ज्ञानदेवी वर्मा, सरल कुमार सक्सेना, गजेंद्र सिंह,मनोज सक्सेना, डॉ. रामशंकर शर्मा ‘प्रेमी’, डॉ.शिव शंकर यजुर्वेदी, प्रताप मौर्य मृदुल, उपमेंद्र सक्सेना, रीतेश साहनी रीते, रामधनी निर्मल, डी .पी. निराला, श्रीमती राज बाला धैर्य, श्रीमती सत्यवती सिंह सत्या, हास्य कवि पी. के. दीवाना आदि कवियों ने अपनी प्रतिभा का सफल प्रदर्शन कर मां सरस्वती के चरणों में अपने अनूठे काव्य प्रसून बिखरे।

संयोजिका श्रीमती ज्ञान देवी वर्मा और जिला विद्यालय निरीक्षक के पद से सेवानिवृत-पूर्व प्राचार्य सी. लाल ने सभी कवियों को धन्यवाद दिया।

अंत में संस्था के महासचिव डॉ. राजेश शर्मा ‘ककरेली’ ने कविता में नए प्रतिमान प्रस्तुत करने वाले एवं चर्चित गीतकार स्वर्गीय राम मूर्ति गौतम ‘गगन’ के महान व्यक्तित्व और उनके अद्भुत काव्य संसार का भावपूर्ण स्मरण और नमन करते हुए सभी अभ्यागत कवियों का आभार व्यक्त किया।

हास्य और अध्यात्म की फुलझड़ियां बिखेरते मनोज दीक्षित टिंकू के संचालन ने कवि गोष्ठी को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। स्वादिष्ट अल्पाहार से गोष्ठी का समापन हुआ।

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