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कर्मफलों से मुक्ति असंभव, इसलिए करते रहें सत्कर्म

खिरका जगतपुर में संगीतमय साप्ताहिक श्रीरामकथा के छठे दिन नैमिष धाम से आए कथाव्यास आचार्य अवध किशोर शास्त्री ‘सरस’ जी ने भारी तादाद में उमड़े श्रद्धालुओं को चेताया

फतेहगंज पश्चिमी-बरेली। “कर्मों से मुक्ति असंभव है। व्यक्ति को अपने द्वारा किए गए अच्छे-बुरे कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है। पुत्र विछोह में दशरथ का मरण भी उनके पूर्व कर्मों का ही फल था। इसलिए सद्गति चाहते हो तो सत्कर्म करते रहना चाहिए।”

पूर्वकाल में नरभक्षी शेर के धोखे में राजा दशरथ का शब्दबेधी बाण प्यासे माता-पिता के लिए सरयू नदी से जल भर रहे श्रवण कुमार को जा लगा और उनके प्राण पखेरू उड़़ गए। पुत्र वियोग में अंधे माता-पिता ने भी प्राण त्याग दिए। दोनों के शाप से दशरथ को भी वृद्धावस्था में पुत्र वियोग में प्राण त्यागने पड़े। शाप के कारण ही उनकी मृत्यु के समय एक भी पुत्र अयोध्या में नहीं था।”

नैमिष धाम के प्रसिद्ध कथाव्यास आचार्य अवध किशोर शास्त्री ‘सरस’ ने खिरका जगतपुर में चल रहे संगीतमय श्रीरामकथा ज्ञानयज्ञ के छठे दिन शुक्रवार को मध्याह्न और सायं सत्र में ज्ञान की ये बातें बताईं। उन्होंने बताया-“भाई राम-लक्ष्मण और भाभी सीता के वन गमन की बात कैकेयी के मुख से सुनते ही भरत पिता की मृत्यु के दारुण दुख को भी भूल गए।भरत माता कैकेयी से कहते हैं-“माता री तूने गजब क्या कीना?
राम से भ्राता को, जानकी माता को, भेज क्यों वन को दीना।”

भरत गुरु और माताओं के राज सिंहासन स्वीकार कर लेने के आग्रह को विनयपूर्वक ठुकरा देते हैं और स्पष्ट उद्घोषणा करते हैं-“मोहि राजु हठि देइहहु जबहीं।
रसा रसातल जाइहि तबहीं।”
भाई राम के प्रति अथाह प्रेम का बखान करते हुए कथाव्यास बताते हैं-“श्रंगवेरपुर तक भरत पैदल और आगे भूमि पर लेट-लेटकर चलते हैं।”

श्रीरामकथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन मटरूलाल लालीदेवी मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी सूबेदार मेजर वीरेंद्र पाल सिंह के संयोजकत्व, पूर्व प्रधान कृष्णपाल गंगवार, कोटेदार अरविन्द गंगवार, मुरारीलाल गंगवार और अन्य सभी ग्रामवासियों के सहयोग से नत्थूलाल गंगवार पुजेरी के मुख्य यजमानत्व में कराया जा रहा है।

कथाव्यास ‘सरस’ जी भारी तादाद में कथा पांडाल में उमड़े भक्तजनों को चेताते हैं-“जब देवराज इंद्र भरत-राम के मिलन में बाधा डालने का देवगुरु ब्रहस्पति से नया उपाय पूछते हैं तो देवगुरु चेतावनी देते हैं-“सुन सुरेस रघुनाथ सुभाऊ। निज अपराध रिसाहिं न काऊ।
जो अपराध भगत कर करई। राम रोष पावक सो जरई।”

लक्ष्मण की आशंका को सिरे से खारिज करते हुए श्रीराम घोषणा करते हैं-“भरतहिं होइ न राजमदु विधि हरि हर पद पाइ। कबहुं कि काँजी सीकरनि छीरसिंधु बिलगाइ।”

रविवार को हवन-पूजन और भंडारे के साथ इस साप्ताहिक अनुष्ठान का समापन होगा। दोनों कथासत्रों में अशोक रस्तोगी, ओमेंद्र पाल, बनवारी लाल, वेदप्रकाश, महेश सक्सेना, अनोखेलाल, अमित माली और अन्य अनेक महिला-पुरुष श्रद्धालु सम्मिलित हुए।

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