Tuesday, April 14, 2026
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Homeराज्यउत्तराखंडदेहरादून एयरपोर्ट पर विमानों की लैंडिंग में घना कोहरा बना रहा चुनौतीपूर्ण

देहरादून एयरपोर्ट पर विमानों की लैंडिंग में घना कोहरा बना रहा चुनौतीपूर्ण

एफएनएन, देहरादून : देहरादून एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं और उपकरणों से लैस है। जिसके रनवे की लंबाई 2140 मीटर है। एयरपोर्ट पर सभी तरह के विमानों की लैंडिंग के लिए अत्याधुनिक उपकरण लगे हैं। लेकिन मौसम अधिक खराब होने पर उपकरणों और विभागों के प्रयासों के बावजूद कई बार विमान लैंड नहीं कर पाते हैं। जिससे उड़ान रद्द या देरी से लैंड हो पाती हैं। आजकल कोहरे के चलते बाहर से आने वाली अधिकतर उड़ानें देरी से पहुंच रही हैं। एयरपोर्ट और आसपास घना कोहरा होने पर उड़ानों को लैंड कराना भी चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

बरसात और सर्दियों के मौसम में कोहरे के कारण सभी तरह के विमानों को विजुअलिटी की समस्या से जूझना पड़ता है। इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) एक अत्याधुनिक लैंडिंग सिस्टम होता है, जो सभी विमानों को एयरपोर्ट की सटीक जानकारी भेजकर लैंडिंग को आसान बनाता है। डॉप्लर वेरी हाई फ्रीक्वेंसी ओमनी रेंज (डीवीओआर) एक नेविगेशन सिस्टम की तरह कार्य कर एयरपोर्ट पर लैंडिंग में मदद करता है। अत्याधुनिक एटीसी टावर, मौसम विभाग और कई दूसरे विभाग साथ में कार्य करते हुए विमानों की लैंडिंग को आसान बनाते हैं।

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पॉथ इंडिकेटर और दूसरी लाइटें व आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम भी एयरपोर्ट पर लैंडिंग में पायलट को सटीक सूचनाएं देते हैं। लेकिन जब एयरपोर्ट के आसमान में कोहरे, धुंध या तेज बारिश के कारण विजुअलिटी कम हो जाती है तो यह सब उपकरण और सिस्टम विमानों की लैंडिंग नहीं करा पाते हैं। जिस कारण फ्लाइटों को कुछ मिनटों तक आसमान में होल्ड पर रखा जाता है। कई बार विमान को दूसरे नजदीकी एयरपोर्ट के लिए डायवर्ट कर दिया जाता है। कम्युनिकेशन सिस्टम की ओर से विमानन कंपनी या एयरपोर्ट को पहले ही मौसम की सही जानकारी दी जाती है। जिससे दूसरे शहरों से आने वाली उड़ानें मौसम ठीक होने का इंतजार करती हैं और विजुअलिटी ठीक होने पर ही उड़ान भरती हैं।

देहरादून एयरपोर्ट अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है। एयरपोर्ट के सभी उपकरण और कर्मचारी मिलकर विमानों की लैंडिंग को आसान बनाते हैं। लेकिन बहुत अधिक मौसम खराब होने पर उपकरणों से भी कई बार लैंडिंग में मदद नही मिल पाती है। इसलिए विमानों को कई बार विजुअलिटी की समस्या से जूझना पड़ता है।

 

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