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55 किसानों की जमीनों पर फर्जी सिकमीनामा से 21 करोड़ का घोटाला

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एफएनएन, जबलपुर: मध्य प्रदेश में किसानों को राहत पहुंचाने के नाम पर चल रही मूंग खरीदी योजना घोटाले की भेंट चढ़ती नजर आ रही है. जबलपुर में 55 किसानों की जमीनों पर फर्जी सिकमीनामा तैयार करके उनके नाम पर मूंग खरीदी का पंजीयन करा लिया गया और करोड़ों रुपए हड़प लिए गए. मामला तब सामने आया जब किसान खाद और यूरिया लेने पहुंचे और कर्मचारियों ने बताया कि उनके नाम पर खाद पहले ही किसी और ने ले ली है. किसानों ने जनसुनवाई में ज्ञापन सौंपकर तहसीलदार, एसडीएम, पटवारी सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर आरोप लगाया है.

फर्जी सिकमीनामा के आधार पर घोटाले का आरोप

दरअसल, एमएलटी वेयरहाउस को मूंग और उड़द खरीदी का केंद्र बनाया गया था. जहां खरीदी के लिए सेवा सहकारी समिति, बसेड़ी को कार्य आवंटित किए गए थे. पीड़ित किसानों का आरोप है कि इस खरीदी केंद्र में वेयरहाउस मालिक, शासकीय अधिकारियों, सर्वेयर, ऑपरेटर, एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी सभी की मिलीभगत से किसानों की जमीन के फर्जी सिकमीनामा तैयार किया गया, जिसके आधार पर फर्जी पंजीयन कर करोड़ों रुपए की राशि की मूंग खरीदी कर घोटाले को अंजाम दिया गया. किसान नेताओं ने इसके जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है.

वेयरहाउस नहीं पहुंची मूंग, खाते में रकम ट्रांसफर

दरअसल, पथरिया गांव के जिन 55 किसानों के नाम पर पंजीयन किया गया था उन किसानों को इस फर्जी सिकमीनामे की कोई जानकारी नहीं थी. जबकि पंजीयन में खुद किसानों द्वारा पंजीयन कराना दिखाया गया था, लेकिन भुगतान प्राप्त करने में बैंक खाते की जानकारी किसी अन्य नाम से अंकित की गई थी. इसके अलावा मोबाइल नंबर, समग्र आईडी, किसान कोड में भी फर्जीवाड़ा करने वाले 13 लोगों के नाम अंकित हैं.

किसानों को फर्जीवाड़े की कैसी लगी जानकारी

इस बात की जानकारी किसानों को तब लगी जब वो यूरिया और डीएपी खरीदने के लिये शहपुरा ब्लाक गए. वहां कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि आपको मिलने वाली समस्त खाद को जमीन का सिकमीनामा करने वाले ले गये हैं. इस जानकारी के बाद किसानों के पैरों तले जमीन खिसक गई. क्योंकि किसानों ने जमीन सिकमी में दी ही नहीं थी. इसके अलावा किसानों की मूंग की खरीदी भी एमएसपी पर नहीं हो पाई. उन्हें खाद भी नहीं मिली.

‘बड़े अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका’

गांव केकिसान महेन्द्र अवस्थी ने बताया कि “55 किसानों की करीब 500 एकड़ जमीन के फर्जी सिकमीनामे बनाकर मूंग पंजीकृत कर ली गई थी. इसके चलते किसानों की मूंग की खरीदी भी नहीं की गई, जिससे उन्हें बाजार में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ी.” उन्होंने आरोप लगाया कि “पंजीयन और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी की होती है. मामले में अधिकारियों की संलिप्तता गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करती है.”

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