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ईडी ने कुर्क कीं प्रतिबंधित आतंकी संगठन पीएफआई की ₹ 35.43 करोड़ की 19 अचल संपत्तियां

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एफएनएन ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कई ट्रस्टों, कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर दर्ज 35.43 करोड़ रुपये की 19 अचल संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत कुर्क किया है।

इससे पहले, ईडी ने इसी साल 16 अप्रैल को भी पीएफआई की 21.13 करोड़ रुपये मूल्य की 16 अचल संपत्तियों को भी कुर्क किया था। इस तरह ईडी की तरफ से इस साल पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) 56.56 करोड़ रुपये की कुल 35 अचल संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं।

‘भारत में जिहाद के जरिए कट्टरपंथी आंदोलन खड़ा कर रहा था PFI’
प्रवर्तन निदेशालय के एक जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) भारत में एक जिहाद के जरिए इस्लामी कट्टरपंथी आंदोलन खड़ा करने के लिए काम कर रहा था, जिसमें अहिंसक हवाई हमले और गुरिल्ला थिएटर के अलावा क्रूरता और दमन के कई तरीके शामिल थे। संघीय एजेंसी ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने संगठन और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ चल रही जांच के तहत 35 करोड़ रुपये से अधिक की नई संपत्तियां कुर्क की हैं, जो कई ट्रस्टों, कंपनियों और व्यक्तियों के नाम पर पीएफआई के लाभकारी स्वामित्व और नियंत्रण में हैं।

ED और NIA ने देशभर में की थी छापेमारी
ईडी, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और कई राज्य पुलिस बलों की तरफ से पीएफआई के पदाधिकारियों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ देश भर में छापेमारी की थी। सितंबर 2022 में केंद्र ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगा दिया था।

PFI पर लगते रहे हैं गंभीर आरोप?

पीएफआई पर फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान हिंसा को भड़काने में सक्रिय रूप से शामिल होने का भी आरोप है। ईडी का कहना है कि पीएफआई ने भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को कमजोर करने और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के इरादे से महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों और व्यक्तियों पर हमले करने के लिए घातक हथियार और विस्फोटक उपकरण एकत्र करके आतंकवादी गिरोह बनाने की योजना बनाई थी। पीएफआई पर 12 जुलाई, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पटना रैली में अशांति पैदा करने के इरादे से प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने और देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने की क्षमता वाले अपराधी साहित्य को छापने का आरोप भी है।

पीएफआई के सिंगापुर और कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, यूएई आदि खाड़ी देशों में 13,000 से अधिक सक्रिय सदस्य बताए जाते हैं। ईडी ने कहा, पीएफआई ने खाड़ी में रहने वाले प्रवासी मुस्लिमों की जिला कार्यकारी समितियां (डीईसी) भी गठित कर उन्हें धन संग्रह का काम सौंपा था।

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