मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने किया काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन, बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे

एफएनएन, वाराणसी: मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने शुक्रवार को काशी विश्वनाथ मंदिर का दर्शन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उपस्थित रहीं और उन्होंने भी दर्शन पूजन किया। प्रधानमंत्री रामगुलाम के साथ आए प्रतिनिधि मंडल ने काशी विश्वनाथ धाम में पूजा अर्चना की।

प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने विश्वास व्यक्त किया कि बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे। इस धार्मिक यात्रा के दौरान आचार्य टेक नारायण उपाध्याय, नीरज पांडेय और अंकित ने प्रधानमंत्री का पूजन कराया। पूजा का उद्देश्य दोनों देशों की सुख-समृद्धि की कामना करना था। बाहर न‍िकलने के बाद सभी डेलीगेशन काफी प्रसन्‍न नजर आए।

प्रधानमंत्री रामगुलाम को भेंट स्वरूप बाबा विश्वनाथ का प्रसाद, रुद्राक्ष की माला, भस्मी और बेलपत्र प्रदान किया गया। इस दौरान मंदिर की भव्यता को देखकर प्रधानमंत्री रामगुलाम भावविभोर हो गए। उन्होंने रुद्री पाठ के साथ पंचामृत बाबा को अर्पित किया।

स्वागत समारोह में सभी को अंगवस्त्रम और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। इस स्वागत में मंगल स्वस्ति वाचन 11 ब्राह्मणों द्वारा किया गया, जो इस अवसर को और भी विशेष बना गया।

काशी विश्वनाथ मंदिर, जो कि हिंदू धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, में दर्शन करने का यह अवसर मॉरीशस के प्रधानमंत्री के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इस यात्रा के माध्यम से न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट किया, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करने का प्रयास किया।

मॉरीशस और भारत के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं, जो समय के साथ और भी गहरे हुए हैं। प्रधानमंत्री रामगुलाम ने इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग और आपसी समझ को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों का दौरा न केवल आस्था को बढ़ाता है, बल्कि यह विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद को भी प्रोत्साहित करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगा।

काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री रामगुलाम का दर्शन एक महत्वपूर्ण घटना रही, जो न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण थी, बल्कि यह भारत और मॉरीशस के बीच संबंधों को और भी प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक कदम है। इस यात्रा ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक संबंधों का महत्व आज के वैश्विक परिदृश्य में और भी बढ़ गया है।

 

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