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दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण, उत्तराखंड को मिली विकास की ऐतिहासिक सौगात

एफएनएन, देहरादून : लंबे इंतजार के बाद आज उत्तराखंड के विकास इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का विधिवत लोकार्पण कर इसे जनता को समर्पित किया। इस परियोजना के शुरू होने के साथ ही अब दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय काफी कम होकर लगभग ढाई से तीन घंटे रह गया है। वर्षों से जिस परियोजना का इंतजार किया जा रहा था, वह अब पूरी तरह से जनता के लिए खोल दी गई है।

कार्यक्रम की शुरुआत एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण के साथ हुई, जब प्रधानमंत्री मोदी ने भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें ब्रह्मकमल का स्मृति चिन्ह भेंट किया, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और हिमालयी परंपरा का प्रतीक माना जाता है। वहीं मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने प्रधानमंत्री को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और नंदा देवी राजजात यात्रा से जुड़ा स्मृति चिन्ह भेंट किया, जो राज्य की आस्था और संस्कृति को दर्शाता है।

करीब 11,963 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह 213 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे आधुनिक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर होते हुए उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के आशारोड़ी तक पहुंचता है। यह पूरी तरह से एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे है, जिसमें वाहनों की आवाजाही को तेज, सुरक्षित और निर्बाध बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

इस परियोजना के शुरू होने से न केवल यात्रा समय में भारी कमी आएगी, बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच आर्थिक, सामाजिक और व्यापारिक संबंध भी और मजबूत होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कॉरिडोर से क्षेत्रीय व्यापार को गति मिलेगी, पर्यटन में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्याधुनिक डिजाइन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति इसकी संवेदनशीलता है। मोहंड क्षेत्र में बनाया गया 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे एशिया के सबसे लंबे वन्यजीव कॉरिडोरों में से एक माना जा रहा है। यह कॉरिडोर इस तरह तैयार किया गया है कि वाहन तेज गति से बिना रुकावट चल सकें और दूसरी ओर जंगलों में रहने वाले हाथी, हिरण और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही भी बिना किसी बाधा के जारी रहे।

वन्यजीव संरक्षण के लिए इस कॉरिडोर में विशेष साउंड बैरियर लगाए गए हैं, जिससे वाहनों के शोर का प्रभाव जंगल के अंदर तक न पहुंचे। इसके अलावा कई स्थानों पर अंडरपास बनाए गए हैं, जिनका उपयोग जानवर सुरक्षित रूप से सड़क पार करने के लिए कर सकते हैं। यह परियोजना भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यावरण संतुलन के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण बनकर सामने आई है।

एक्सप्रेसवे में 100 से अधिक अंडरपास, कई फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज और आधुनिक टनल शामिल हैं, जो इसे तकनीकी रूप से बेहद उन्नत बनाते हैं। इस मार्ग को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन बिना किसी बाधा के लगातार गति बनाए रख सकें। इससे ईंधन की बचत के साथ-साथ प्रदूषण में भी कमी आने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह परियोजना न केवल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन और धार्मिक स्थलों को भी नई पहचान देगी। उन्होंने कहा कि केदारनाथ, बदरीनाथ, हरिद्वार और अन्य धार्मिक स्थलों तक पहुंचना अब और आसान होगा, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने कहा कि आने वाले समय में उत्तराखंड में सड़क और रोपवे नेटवर्क को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हरिद्वार और देहरादून बाइपास परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इसके अलावा टनकपुर–पिथौरागढ़ मार्ग, केदारनाथ और यमुनोत्री रोपवे जैसी कई बड़ी परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं।

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने इस अवसर को राज्य के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के आर्थिक विकास की रीढ़ साबित होगा। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तराखंड लगातार विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

प्रधानमंत्री के इस दौरे को लेकर पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस, प्रशासन और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहीं। कार्यक्रम स्थल से लेकर पूरे रूट तक भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण और सफल तरीके से संपन्न हो सके।

इस तरह दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण केवल एक सड़क परियोजना का उद्घाटन नहीं, बल्कि उत्तर भारत के विकास, कनेक्टिविटी और आर्थिक प्रगति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह परियोजना आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है और इसे आधुनिक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

क्यों खास है एक्सप्रेस-वे

  • शामिल राज्य – दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड
  • कुल लंबाई – 213 किलोमीटर
  • लागत – 11,963 करोड़
  • 12 किलोमीटर लंबा एशिया का सबसे लंबा वाइल्ड लाफ कॉरिडोर
  • 200 मीटर लंबे 2 एलिफिटेंट अंडरपास, 6 एनिमल पास
  • 370 मीटर लंबी सुरंग डाटकाली के पास
  • 6 लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर
  • 2 आरओबी, 10 पुल, 7 इंटरचार्ज
  • 2.5 घंटे में होगा दिल्ली का सफर
  • 20 किलोमीटर वन क्षेत्र शामिल है एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट में
  • 19 प्रतिशत ईंधन की बचत होने का अनुमान
  • 1.95 लाख पेड़ लगाए गए हैं प्रतिपूरक वृक्षारोपण कार्य के लिए
  • 33,840 पेड़ों का कटान बचा आधुनिक तकनीकी के प्रयोग से

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