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“आंख से आंसू को मोड़ा जा रहा है…!”

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सारस्वत समारोह में हुआ गणेश ‘पथिक’ संपादित साहित्यिक पत्रिका ‘ठहाका सत्य पथिक’ के प्रवेशांक का लोकार्पण

समाजसेवी अनिल कुमार सक्सेना एवं साहित्यकार कवि ‘अकिंचन’ का सारस्वत अभिनन्दन भी किया गया

*फ्रंट न्यूज नेटवर्क, बरेली।* महानगर की अति प्रतिष्ठित एवं प्राचीनतम साहित्यिक संस्था 'कवि गोष्ठी आयोजन समिति' के तत्वावधान में स्टेडियम रोड, बरेली स्थित लोक खुशहाली सभागार में माह के द्वितीय रविवार को वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार गणेश 'पथिक' के संयोजन में अत्यधिक सरस-सफल एवं यादगार नियमित मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। साथ ही 'पथिक' जी द्वारा संपादित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका 'ठहाका सत्य पथिक' के प्रवेशांक का विमोचन एवं लोकार्पण भी किया गया।

इस सारस्वत समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण कुमार के प्रतिनिधि समाजसेवी अनिल कुमार सक्सेना एडवोकेट रहे तो वहीं विशिष्ट अतिथिगण नवगीतकार रमेश गौतम, डॉ महेश ‘मधुकर’, उस्ताद शायर एवं साहित्यकार विनय साग़र जायसवाल, डॉ. शिवशंकर यजुर्वेदी, कैलाश चंद्र मिश्र ‘रसिक’, डॉ. (श्रीमती) मिथिलेश राकेश ‘मिथिला’ एवं सहकार भारती के जिला अध्यक्ष चौधरी छत्रपाल सिंह मंचासीन थे।

अतिथियों द्वारा माँ शारदे के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। माँ शारदे की सरस वंदना वरिष्ठ कवि एवं समाजसेवी इंद्रदेव त्रिवेदी ने प्रस्तुत की। उन्होंने संयोजक गणेश ‘पथिक’ को मोतियों की माला पहनाकर और सम्मान में सुंदर छंद सुनाकर उनका अभिनंदन भी किया।

इस अवसर पर साहित्यिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान के लिए समाजसेवी अनिल कुमार सक्सेना एडवोकेट एवं साहित्यकार बृजेंद्र तिवारी ‘अकिंचन’ को सम्मानित किया गया।

दोनों को सम्मान स्वरूप शॉल, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह कार्यक्रम संयोजक गणेश ‘पथिक’,’ संस्थाध्यक्ष रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ एवं सचिव उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट द्वारा प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार गणेश ‘पथिक’ द्वारा संपादित त्रैमासिक पत्रिका ‘ठहाका सत्य पथिक’ के प्रवेशांक होली- नवरात्रि विशेषांक का लोकार्पण उपस्थित अतिथियों के कर-कमलों से हुआ।

अंतिम सत्र में कवि सम्मेलन में नगर एवं बाहर से पधारे कवियों ने अपने सरस काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया।

वरिष्ठ कवि-ग़ज़लगो विनय साग़र जायसवाल ने अपनी इस खूबसूरत ग़ज़ल से काव्य गोष्ठी को ऊंचाइयों पर पहुंचाया-
तयशुदा काग़जों पर बयानी हुई, हम गरीबों की क्या जिंदगानी हुई।
एक बादल ने खोले थे जिनके वरक,
सारी दुनिया मगर पानी-पानी हुई।

समारोह के संयोजक साहित्यकार-पत्रकार गणेश ‘पथिक’ ने सवालों-संघर्षों और समाधानों पर केंद्रित अपनी इस सदाबहार ग़ज़ल से तालियां बटोरीं-गुस्ताख आंधियों के रुख मोड़ने का हुनर रखते हैं। दीए हैं, बारिशों में भी जलने का हुनर रखते हैं।
पहाड़ों के सख्त सीने से बहा दें अमन की गंगा, भगीरथ हैं हम उग्र तपस्याओं का असर रखते हैं।

समारोह में सम्मानित हुए कवि बृजेंद्र तिवारी ‘अकिंचन’ ने अपना यह गीत सस्वर गाया और खूब वाहवाही भी बटोरी-
आँख से आँसू को मोड़ा जा रहा है। दर्द को ऐसे निचोड़ा जा रहा है।।

शिक्षाविद्-साहित्यकार डॉ. (श्रीमती) मिथिलेश राकेश ‘मिथिला’ की यह ग़ज़ल भी खूब पसंद की गई और प्रशंसित हुई-
कांटे नहीं भुलाना चाहत गुलाब की गर, इक जाविया न रखना ग़म कम हुजूर होगा। उन्होंने सद्य: प्रकाशित अपना दोहा संग्रह “घायल हैं सम्बंध” भी वितरित किया।

अभिषेक अग्निहोत्री ने छोटी बहर की इस ग़ज़ल को गाकर खूब तालियां बटोरीं-मैंने यह पहचाना सच। है बेकार छिपाना सच। सच की होगी जीत सदा, यह है सोलह आना सच।

शब्दांगन संस्था के महासचिव, समाजसेवी कवि इंद्रदेव तिवारी ने इस गीत से सबको गुदगुदाया-अगर आप यूं मुस्कुराते रहेंगे, तो सच मानिए हम गाते रहेंगे।
डॉ. मुकेश मीत ने जब इस गीत की लयबद्ध तान छेड़ी तो पूरा सदन रस-आनंद से झूमने लगा-हम तो अब तक मूढ़ रहे हैं, खुद को खुद में ढूंढ रहे हैं।
कभी नाम को, कभी काम को, फिरते मारे-मारे।
हम तो हैं बन्जारे भइया, हम तो हैं बन्जारे।

कवि अमित मनोज ने यह सस्वर ग़ज़ल सुनाकर खूब तालियां और वाहवाही बटोरी-
कभी जिसने फकीरों का बड़प्पन ही नहीं देखा,
निखर आवारगी को ही तरक्की मान बैठे हैं।
यहां बस्ती के सारे लोग जाने किस नशे में हैं-
कहीं कटरीना बैठी है, कहीं सलमान बैठे हैं।

सुकवि मिलन कुमार ‘मिलन’ ने बेटियों पर सशक्त गीत पेश किया और खूब सराहना पाई
इस अवसर पर संस्था- सचिव उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट, दीपक मुखर्जी ‘दीप’, उप्र जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, श्रीमती वंदना पथिक, धनंजय पथिक, किरन प्रजापति ‘दिलवारी’, डॉ. राम शंकर शर्मा ‘प्रेमी’, पुष्पा गंगवार ‘पूनम’, समृद्धि गंगवार, ‘साहित्य सुरभि’ संस्था के अध्यक्ष रामकुमार कोली, बिंदु इशिका सिंघानिया, अमित मनोज, डॉ. मुकेश मीत, एस.के.कपूर, लक्ष्वेश्वर राजू , सुरेंद्र बीनू सिन्हा, राम प्रकाश सिंह ‘ओज’, रोहित ‘राकेश’, रामकुमार भारद्वाज ‘अफरोज’, राजकुमार अग्रवाल ‘राज’, आर.सी.पांडेय, मनोज दीक्षित टिंकू,मुकेश कुमार सक्सेना, प्रवीण शर्मा, अभिषेक अग्निहोत्री,मनोज सक्सेना ‘मनोज’, नरेंद्र पाल सिंह, मिलन कुमार ‘मिलन’, अनुज चौहान, किशन बेधड़क, उमेश अद्भुत, सरल कुमार सक्सेना, विवेक विद्रोही, रमेश रंजन एवं रीतेश साहनी आदि ने भी अपनी उत्कष्ट साहित्यिक रचनाओं से गोष्ठी को फलीभूत बनाने में सराहनीय योगदान दिया। कार्यक्रम का सफल-सरस काव्यमय संचालन आशु कवि एवं चर्चित साहित्यकार राज शुक्ल ‘गज़लराज’ ने किया।

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