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राष्ट्रपति शासन समाप्त: NDA विधायक दल के नेता खेमचंद सिंह का सरकार बनाने का दावा

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एफएनएन, नई दिल्ली : मणिपुर में नई सरकार गठन से पहले बुधवार को राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया. मणिपुर में एनडीए विधायक दल के नेता वाई खेमचंद सिंह बुधवार को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. मणिपुर में 13 फरवरी, 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू था. 60 सदस्यों वाली विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, लेकिन राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद यह निलंबित कर दी गई थी.

राष्ट्रपति की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया, “संविधान के अनुच्छेद 356 के उपखंड (2) द्वारा दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, मैं, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, मणिपुर राज्य के संबंध में 13 फरवरी, 2025 को उक्त अनुच्छेद के तहत मेरे द्वारा जारी की गई उद्घोषणा को चार फरवरी, 2026 से रद्द करती हूं.”

इससे पहले एनडीए विधायक दल के नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार को मणिपुर में सरकार बनाने का दावा किया. मणिपुर भाजपा के अध्यक्ष ए शारदा देवी ने बताया कि खेमचंद सिंह के नेतृत्व में NDA नेताओं ने इंफाल में लोक भवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया. कुकी-जो बहुल जिलों चुराचांदपुर और फेरजावल के दो विधायक उन प्रतिनिधियों में शामिल थे जिन्होंने राज्यपाल भल्ला से मुलाकात की.

देवी ने पत्रकारों से कहा, “हम अपने नए विधायक दल के नेता और भाजपा पर्यवेक्षक तरुण चुग की मौजूदगी में राज्यपाल से मिले. NDA ने राज्य में लोकप्रिय सरकार बनाने का दावा किया.”

मंगलवार को, दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में मणिपुर के पार्टी विधायकों की बैठक में खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया था. भाजपा महासचिव तरुण चुग ने खेमचंद सिंह को बधाई दी और उनके सफल और प्रभावी कार्यकाल की कामना की. चुग ने एक्स पोस्ट में कहा, “खेमचंद सिंह को मणिपुर में भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने पर बहुत-बहुत बधाई. मैं उनके सफल और प्रभावी कार्यकाल के लिए दिल से शुभकामनाएं देता हूं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन और दूर की सोचने वाली लीडरशिप में, आपका बहुत अनुभव, प्रतिबद्धता और मजबूत नेतृत्व पार्टी को और मजबूत करेगी और मणिपुर के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने में मदद करेगी.”

मणिपुर में 13 फरवरी, 2025 से राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था. कुकी और मैतेई जातीय समूहों के बीच तनाव और हिंसा के बाद एन बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.

60 सदस्यों वाली विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है. राज्य में अभी भाजपा के 37 विधायक हैं. भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में 32 सीटें जीती थीं. बाद में जनता दल (यूनाइटेड) के पांच विधायक भी दलबदल कर भाजपा में शामिल हो गए थे.

इसके अलावा, एनपीपी के 6 विधायक, एनपीएफ के पांच, कांग्रेस के पांच, कुकी पीपुल्स अलायंस के दो, जेडीयू का एक और तीन निर्दलीय विधायक शामिल हैं. मौजूदा विधायक के निधन के कारण एक सीट खाली है.

दिसंबर 2025 में गृह मंत्रालय ने मणिपुर में जातीय हिंसा की जांच कर रहे जांच आयोग को एक और विस्तार दिया, और उसे अपनी रिपोर्ट 20 मई, 2026 से पहले जमा करने का निर्देश दिया. आयोग को 3 मई, 2023 को मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा की जांच करने, इसके कारणों का पता लगाने और अधिकारियों की प्रतिक्रिया की जांच करने का काम सौंपा गया है.

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