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मसूरी का दुख : प्रसिद्ध ट्रैवल राइटर ह्यूग गैंट्जर नहीं रहे, खोया वैश्विक चेहरा

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एफएनएन, मसूरी: दिग्गज अंग्रेजी ट्रैवल राइटर और पद्मश्री से सम्मानित ह्यूग गैंट्जर का निधन हो गया है. उनके निधन से मसूरी में शोक की लहर दौड़ गई है. उन्होंने 94 वर्ष की आयु में किंक्रेग लाइब्रेरी रोड स्थित अपने निवास ओक ब्रुक में अंतिम सांस ली. उनके जाने से न केवल मसूरी, बल्कि देश-विदेश का साहित्य और ट्रैवल जर्नलिज्म जगत एक ऐसे व्यक्तित्व से वंचित हो गया है, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई.

बता दें कि नेवी में कमांडर के रूप में सेवाएं देने वाले ह्यूग गैंट्जर ने सेवानिवृत्ति के बाद मसूरी को अपना स्थायी घर बनाया. यहीं से उन्होंने अपनी धर्मपत्नी कोलीन गैंट्जर के साथ मिलकर ट्रैवल राइटिंग को नया आयाम दिया. यह जोड़ी बीते पांच दशकों तक भारत के अनछुए पर्यटन स्थलों, विरासत और संस्कृति को दुनिया के सामने लाने में जुटी रही.

30 से ज्यादा पुस्तकें, 52 डॉक्यूमेंट्री और हजारों लेखों की विरासत: ह्यूग और कोलीन गैंट्जर के योगदान का अंदाजा उनकी 30 से ज्यादा पुस्तकों, हजारों लेखों और दूरदर्शन पर प्रसारित 52 डॉक्यूमेंट्री से लगाया जा सकता है. उनकी रचनाओं ने भारत को केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि अनुभव के रूप में पेश किया. इसी योगदान के लिए इस जोड़ी को गणतंत्र दिवस पर ट्रैवल जर्नलिज्म के क्षेत्र में साल 2025 में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया गया था.

मसूरी को ‘घर’ कहने वाले लेखक: प्रसिद्ध लेखक, साहित्यकार और इतिहासकार गणेश शैली ने ह्यूग गैंट्जर को याद करते हुए कहा कि वे मसूरी को अपना ‘घर’ कहते थे. शहर की हर छोटी-बड़ी गतिविधियों पर उनकी नजर रहती थी. गैंट्जर परिवार सामाजिक और साहित्यिक गतिविधियों का सक्रिय केंद्र रहा. उनके जाने से मसूरी सचमुच गरीब हो गई है.

पर्यावरण संरक्षण में निभाई ऐतिहासिक भूमिका: ह्यूग गैंट्जर को केवल लेखक के रूप में ही नहीं, बल्कि मसूरी के संरक्षक के रूप में भी याद किया जाएगा. जब मसूरी में चूना खनन और अनियंत्रित निर्माण से पहाड़ों का अस्तित्व खतरे में था, तब उन्होंने आवाज उठाई.

उनके प्रयासों के चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मसूरी में खनन पर रोक लगाई. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित मॉनिटरिंग कमेटी के सदस्य के रूप में उन्होंने मसूरी को पर्यावरणीय विनाश से बचाने में अहम भूमिका निभाई.

व्यक्तित्व जो रिश्तों में बसता था: स्थानीय लोगों की मानें तो ह्यूग गैंट्जर केवल एक लेखक ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य जैसे थे. दिवाली और क्रिसमस पर उपहार भेजना उनकी परंपरा थी. मिठाइयों से उनका विशेष लगाव था और लोगों की खुशियों-दुखों में उनकी दिलचस्पी उन्हें खास बनाती थी.

साल 2024 में हो चुका था पत्नी का निधन: ह्यूग गैंट्जर की पत्नी कोलीन गैंट्जर का निधन 6 नवंबर 2024 को हुआ था. अब यह ऐतिहासिक जोड़ी हमेशा के लिए स्मृतियों में सिमट गई है. उनका अंतिम संस्कार बुधवार सुबह कैमल्स बैक कब्रिस्तान स्थित पारिवारिक प्लॉट में किया जाएगा.

उनके निधन पर सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, साहित्यकारों और नागरिकों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है. उनका कहना है कि मसूरी ने आज केवल एक लेखक नहीं, बल्कि अपनी आत्मा का एक हिस्सा खो दिया.

बता दें कि ह्यूग गैंट्जर का जन्म 9 जनवरी 1931 को पटना में हुआ था. उन्होंने मसूरी के हैम्पटन कोर्ट स्कूल और सेंट जॉर्ज कॉलेज से पढ़ाई की. फिर सेंट जोसेफ स्कूल नैनीताल से आगे की पढ़ाई की. साथ ही सेंट जेवियर्स महाविद्यालय कलकत्ता और बंबई (मुंबई) के केसी विधि महाविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी की.

उनकी पत्नी कोलीन गुजरात के गोधरा की रहने वाली थीं. दोनों की मुलाकात मुंबई में हुई और उन्होंने साल 1960 में शादी कर ली. उन्होंने भारतीय नौसेना में भी अपनी सेवाएं दी. भारतीय नौसेना से रिटायर होने के बाद मसूरी आ गए और वहीं पर बस गए. जहां वे मसूरी के वैश्विक ब्रांड एंबेसडर बन गए. उनके पिता जेएफ गैंट्जर ब्रिटिश काल यानी 1941-43 तक मसूरी नगर पालिका के प्रशासक एवं चैयरमैन रहे.

लेखक बनने का सफर: एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि ‘मैंने बहुत यात्रा की थी और लिखना चाहता था. दूसरी ओर कोलीन को लिखना पसंद नहीं था, लेकिन वो यात्रा करना चाहती थीं.’ उन्होंने आगे कहा था कि ‘दोनों के बीच एक समझौता हुआ. मैंने फिर से यात्रा शुरू कर दी, कोलीन लिखने के लिए राजी हो गईं और इस तरह हम यात्रा लेखक बन गए.’

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