Friday, March 27, 2026
03
20x12krishanhospitalrudrapur
previous arrow
next arrow
Shadow
HomeMpडॉक्टर की सूझबूझ से बड़ा हादसा टला, 27 बच्चों की बचाई गई...

डॉक्टर की सूझबूझ से बड़ा हादसा टला, 27 बच्चों की बचाई गई जान

एफएनएन, जबलपुर: नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शिशु रोग विभाग में डॉक्टर ने ही फायर एक्सटिंग्विशर उठाकर शॉर्ट सर्किट लगी आग को काबू में पा लिया. जिस समय एनआईसीयू में आग लगी थी उस दौरान वार्ड में 27 नवजात भर्ती थे. हालांकि इस घटना के तुरंत पहले एक बच्चे की मौत हो गई थी. उनके परिजनो ने अस्पताल में भारी हंगामा भी मचाया था. आगजनी की घटना गुरुवार देर रात की है.

एनआईसीयू वार्ड से निकलने लगा धुआं
जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल में शिशु रोग विभाग में उसे समय अफरा तफरी फैल गई. जब एक पंख से धुआं निकलने लगा और देखते ही देखते आज बढ़ने लगी. यह पंखा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के NICU वार्ड के बाहर वेटिंग एरिया में लगा हुआ था. देखते ही देखते वेटिंग एरिया के साथ ही NICU के भीतर भी धुआ पहुंच गया.

वार्ड में भर्ती थे 27 बच्चे
जिस समय मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बच्चा वार्ड में आग फैली उस समय वार्ड में 27 बच्चे भर्ती थे, इसलिए परिजन भी घबरा गए और लोगों ने बार्ड के भीतर जाना शुरू कर दिया. समस्या को देखते हुए तुरंत बच्चा वार्ड की बिजली को बंद कर दिया गया ताकि आज आगे न फैल सके. हालांकि मौके पर पहुंचे सिक्योरिटी और अग्निशमन दल ने तुरंत ही आग पर काबू पा लिया.

इस बीच में तुरंत बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया. हालांकि स्थिति सामान्य होने के बाद दोबारा उन्हें एनआईसीयू में भर्ती कर दिया गया. लेकिन शिफ्टिंग की वजह से नवजात बच्चों की माताएं परेशान नजर आए और अफरा तफरी में वह अपने बच्चों को ढूंढती हुई देखी गई. लेकिन इसी दौरान अस्पताल में इलाज करवा रहे एक बच्चे की मौत हो गई. पीड़ित परिजन ने अस्पताल में जमकर हंगामा मचाया. मौके पर पहुंची पुलिस ने परिवार को लोगों को समझाया दी.

ड्यूटी डॉक्टर ने वक्त रहते बुझाई आग
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर अरविंद शर्मा ने बताया कि, ”जैसे ही पंखे से धुआं निकला मौके पर मौजूद ड्यूटी डॉक्टर ने ही फायर एक्सटिंग्विशर उठाकर आग बुझा दी.” मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बिल्डिंग 70 साल पुरानी है कुछ दिनों पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने करोड़ों रुपया खर्च करके फायर सेफ्टी के समान लिए थे लेकिन अस्पताल की बिजली की वायरिंग अभी भी पुरानी है और उसमें ऐसी घटनाएं होने की संभावना बनी रहती है.

काफी पुरानी हो चुकी है अस्पताल की बिल्डिंग
जबलपुर का मेडिकल कॉलेज अस्पताल महाकौशल की सबसे बड़ी स्वास्थ्य इकाई है, इसमें केवल जबलपुर ही नहीं महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के लोग इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं. इसलिए इस इमारत में हमेशा हजारों लोग मौजूद रहते हैं. लेकिन इमारत अब इतनी पुरानी हो गई है कि मरीज के बढ़ते दबाव को यहां महसूस किया जा सकता है. मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में पहले भी आग की घटनाएं हुई हैं, जहां बच्चों की जलने से मौत हो गई. हालांकि जबलपुर के ड्यूटी डॉक्टर्स की सूझबूझ की वजह से जबलपुर का हादसा टल गया. आग की स्थिति में यदि तुरंत काबू पा लिया जाए तो आग को फैलने से रोका जा सकता है.

 

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments