03
Gemini_Generated_Image_yb399pyb399pyb39
previous arrow
next arrow
Shadow

BJP विधायक का विवादित बयान: दुर्गेश्वर लाल ने पूर्व MLA को मंत्री का ‘चपरासी’ कहा

Spread the love

एफएनएन, देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर भाजपा के भीतर का घमासान खुलकर सामने आ गया है. इस बार विवाद का केंद्र बने हैं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और पुरोला से भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल. मामला इतना गरमा गया कि विधायक ने दो बार के पूर्व विधायक मालचंद को मंत्री का चपरासी तक कह दिया. यह बयान न सिर्फ राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले टिकट की दावेदारी की खींचतान से जोड़कर भी देखा जा रहा है.

विधायक दुर्गेश्वर लाल ने जताया विरोध: दरअसल हाल ही में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने उत्तरकाशी जिले में दो बार के पूर्व विधायक मालचंद को अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने की बात कही थी. मंत्री का यह फैसला जैसे ही सार्वजनिक हुआ, वैसे ही भाजपा के मौजूदा विधायक दुर्गेश्वर लाल ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया. विरोध इतना तीखा था कि दुर्गेश्वर लाल ने सार्वजनिक तौर पर कह दिया कि एक पूर्व विधायक को इस तरह प्रतिनिधि बनाना, उसे मंत्री का चपरासी घोषित करने जैसा है.

विधायक या पूर्व विधायक स्तर के नेता का एक तय प्रोटोकॉल होता है. यदि पूर्व विधायक मालचंद को कोई जिम्मेदारी ही देनी थी तो उन्हें राज्य मंत्री जैसा दर्जा दिया जाना चाहिए था, न कि किसी कैबिनेट मंत्री का प्रतिनिधि बनाकर. उन्हें किसी पूर्व विधायक को जिम्मेदारी दिए जाने से आपत्ति नहीं है, लेकिन जिम्मेदारी का स्वरूप सम्मानजनक और प्रोटोकॉल के अनुरूप होना चाहिए.- दुर्गेश्वर लाल, भाजपा विधायक

अपनी ही सरकार पर साधा निशाना: दुर्गेश्वर लाल के इस बयान के बाद साफ हो गया कि उनका निशाना सीधे-सीधे अपनी ही सरकार के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी पर है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बयान सिर्फ प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पुरोला विधानसभा सीट की आगामी चुनावी गणित भी छिपी हुई है.

पुरोला सीट भाजपा के लिए हॉट सीट: पुरोला विधानसभा सीट को उत्तराखंड की चर्चित और अहम सीटों में गिना जाता है. फिलहाल इस सीट पर भाजपा के भीतर जबरदस्त खींचतान देखने को मिल रही है. एक तरफ मौजूदा विधायक दुर्गेश्वर लाल हैं, तो दूसरी तरफ दो बार के पूर्व विधायक मालचंद और एक अन्य नेता राजकुमार भी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. ऐसे में मंत्री द्वारा मालचंद को प्रतिनिधि बनाए जाने को दुर्गेश्वर लाल अपने राजनीतिक क्षेत्र में दखल के रूप में देख रहे हैं. पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि मंत्री का यह कदम मालचंद की राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने और उन्हें आगामी चुनाव के लिए मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है.

मंत्रियों से भिड़ने की पुरानी छवि: यह पहला मौका नहीं है जब दुर्गेश्वर लाल ने अपनी ही पार्टी के मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोला हो, इससे पहले भी वह कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के खिलाफ खुलकर विरोध जता चुके हैं. पिछली बार तो हालात ऐसे बने कि दुर्गेश्वर लाल, मंत्री सुबोध उनियाल के घर के बाहर धरने पर बैठ गए थे. उस वक्त भी पार्टी के भीतर काफी किरकिरी हुई थी. दुर्गेश्वर लाल खुद को बेबाक और कामकाजी विधायक के रूप में पेश करते रहे हैं. उनका दावा है कि उत्तराखंड में सबसे ज्यादा विकास कार्य उन्होंने अपनी विधानसभा में कराए हैं. यहां तक कि वह काम के मामले में खुद को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी आगे बताते हैं. हालांकि, वह यह भी कहते हैं कि उनके क्षेत्र में हुए सभी विकास कार्य मुख्यमंत्री के आशीर्वाद से ही संभव हो पाए हैं.

मालचंद का पलटवार, चौकीदार से चपरासी तक: इस पूरे विवाद में पूर्व विधायक मालचंद भी चुप नहीं रहे, उन्होंने दुर्गेश्वर लाल के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि जब देश का प्रधानमंत्री खुद को चौकीदार कहता है और प्रदेश का मुख्यमंत्री खुद को मुख्य सेवक मानता है, तो अगर वह चपरासी भी बनते हैं, तो उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है. मालचंद का यह बयान सीधे तौर पर दुर्गेश्वर लाल के आरोपों को हल्का करने और खुद को जनसेवक के रूप में पेश करने की कोशिश माना जा रहा है.

यह भाजपा की अंदरूनी कलह का नतीजा है. पुरोला विधानसभा सीट पर भाजपा नेताओं की आपसी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है. न तो पहले पूर्व विधायक मालचंद ने अपने कार्यकाल में कोई खास काम किया और न ही मौजूदा विधायक दुर्गेश्वर लाल कोई उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर पाए हैं. भाजपा के नेता जनता के मुद्दों पर काम करने के बजाय आपसी बयानबाजी और पद की लड़ाई में उलझे हुए हैं. प्रीतम सिंह, कांग्रेस विधायक

संगठन के लिए बढ़ी मुश्किलें: इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा संगठन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. एक तरफ पार्टी अनुशासन का सवाल है, तो दूसरी तरफ चुनाव से पहले भीतरघात की आशंका. सार्वजनिक मंच से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करना भाजपा के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है. पूर्व विधायक को मंत्री का प्रतिनिधि बनाए जाने का मामला अब सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं रह गया है. यह भाजपा के भीतर सत्ता, सम्मान और टिकट की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है. दुर्गेश्वर लाल का आक्रामक रुख, मालचंद का तंज और कांग्रेस का हमला तीनों मिलकर यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में उत्तरकाशी की राजनीति में ऐसे सियासी संग्राम और देखने को मिल सकते हैं.

Hot this week

Lalkuan : रेत से भरे डंपर में दबकर मजदूर की दर्दनाक मौत, जेसीबी चालक की लापरवाही बनी जानलेवा

एफएनएन, हल्द्वानी : Lalkuan उत्तराखंड के लालकुआं में एक दर्दनाक...

Kanwar Yatra : देहरादून में जाम रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस का बड़ा प्लान

एफएनएन, देहरादून : Kanwar Yatra के दौरान देहरादून शहर...

केद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज अपने पद से दिया इस्तीफा

एफएनएन, दिल्ली : केद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने...

Topics

केद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज अपने पद से दिया इस्तीफा

एफएनएन, दिल्ली : केद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img