एफएनएन, हरिद्वार : Haridwar उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। हाल ही में उन्होंने हरिद्वार के साथ अपने राजनीतिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए वहां से प्रतिनिधित्व करने की इच्छा सार्वजनिक की थी।
वहीं, अपने तत्कालीन ओएसडी और वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना से जुड़े मामले को लेकर रावत ने कहा कि उन पर अनावश्यक रूप से आरोप लगाए जा रहे हैं और वह इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे। जीना से जुड़े परिसर में ईडी ने 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत सितंबर में तलाशी ली थी।
उत्तराखंड के लिए अलग मॉडल की बात
अपने राजनीतिक सफर को लेकर हरीश रावत ने कहा कि वह अब भी पार्टी और उत्तराखंड के लिए एक सिपाही की तरह काम करना चाहते हैं। उनका कहना है कि जिस सोच और समझ के साथ उत्तराखंड का निर्माण होना चाहिए था, वह पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया।
रावत ने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने राज्य के लिए अलग दिशा और विकास की लीक बनाने की कोशिश की थी, लेकिन राष्ट्रपति शासन लगने के बाद कई योजनाएं और कार्यक्रम प्रभावित हुए। उनके अनुसार, कई योजनाएं आगे बढ़ीं, जबकि कुछ योजनाएं अधूरी रह गईं।
जीना मामले पर खुलकर बोले रावत
चंदन सिंह जीना से जुड़े घटनाक्रम पर रावत ने कहा कि राज्य में कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठा रही है और इसी बीच उनके तत्कालीन ओएसडी से जुड़े मामले को उनके साथ जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जीना को अपने कानूनी मामले की प्रक्रिया से गुजरना होगा, लेकिन इसमें उन्हें जोड़ने की जरूरत नहीं है।
ईडी ने सितंबर में जीना समेत कई ठिकानों पर तलाशी ली थी। एजेंसी के अनुसार, कार्रवाई 2016 की UKSSSC ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई थी।
कांग्रेस छोड़ने के सवाल पर दिया जवाब
कांग्रेस छोड़ने की संभावनाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर रावत ने कहा कि वह कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार को नहीं छोड़ सकते। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक जीवन कांग्रेस के साथ जुड़ा रहा है और वह पार्टी के झंडे के साथ ही अपनी राजनीतिक यात्रा जारी रखना चाहते हैं।
उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह लंबे समय से राजनीतिक चुनौतियों का सामना करते आए हैं और आगे भी उनका मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।
‘मेरे साथ मेरा विवेक और ईमान है’
यह पूछे जाने पर कि क्या मौजूदा विवाद में वह खुद को अकेला महसूस करते हैं, रावत ने कहा कि उनके साथ उनका विवेक, ईमान और उत्तराखंड के लोग हैं।
उन्होंने अपने स्वास्थ्य का भी जिक्र करते हुए कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें अधिक सीढ़ियां चढ़ने से बचने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद वह सक्रिय हैं। रावत ने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उनके ऊपर लगाए जा रहे आरोपों से वह खुद को मुक्त कर सकें।
42 हजार से ज्यादा नियुक्तियों का किया जिक्र
रावत ने अपने कार्यकाल में हुई भर्तियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनके कार्यकाल में 42 हजार से ज्यादा लोगों को नियुक्तियां दी गईं। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए अधीनस्थ सेवा चयन आयोग बनाया गया और भर्ती बोर्ड गठित किए गए।
उनका कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह के राजनीतिक हस्तक्षेप से बचने के निर्देश दिए गए थे। रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते थे कि नौकरियों के मामले में उत्तराखंड की छवि पर कोई कलंक लगे।
रावत से जुड़े हालिया घटनाक्रम में वह 2016 की भर्ती परीक्षा से संबंधित पूछताछ के लिए ईडी के सामने भी पेश हो चुके हैं। ईडी ने उनसे पुराने आयकर रिटर्न और परिवार की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मांगे थे।







