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लालू यादव को फिर जेल की आशंका? 78 की उम्र में सजा पर बना सस्पेंस

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एफएनएन, पटना: दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में लालू समेत दूसरे आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिये हैं. कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव समेत 40 से अधिक आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं. अब 29 जनवरी को सजा के बिंदु पर फैसला सुनाया जाएगा.

78 साल की उम्र में जेल? : अब लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं. ऐसे में अब परिवार फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है. अगर वहां भी आरोप सिद्ध होते हैं तो 78 साल के राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी.

पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता की राय : लालू यादव पर आरोप तय होने के बाद उन्हें कितनी सजा हो सकती है, इस सवाल पर पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार बताते हैं कि दिल्ली कोर्ट में कॉग्नियंस (संज्ञान लेने की प्रक्रिया) लिया गया था और आज आरोप तय हुआ है. इसमें प्रेमा फेसाई (प्रथम दृष्ट्या पर्याप्त सबूत) उनके खिलाफ स्टैबलिश हुआ होगा या प्रेमा फेसाई कहीं न कहीं से दिखता होगा कि कोर्ट इसपर ट्रायल चला सकती है.

“जब कोर्ट ने संज्ञान लिया था, तो क्लियर रहा होगा कि इस केस में कुछ न कुछ मटेरियल है. सीबीआई की चार्जशीट में मटेरियल था. ऐसे में आज चार्ज फ्रेम किया गया है. चार्ज फ्रेम में पूछा जाता है कि उनपर (आरोपी) जो चार्ज हैं, जो कॉग्नियंस का मेटेरियल है, इसे आप स्वीकार करते हैं या नहीं. 41 आरोपियों से पूछना मेनडेटरी है कि आप अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार करते हैं या नहीं. इन लोगों ने अस्वीकार किया होगा. ऐसी स्थिति में कोर्ट चार्ज फ्रेम करती है.”- अरविंद कुमार, पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता

लालू परिवार को कितनी सजा हो सकती है?: चार्ज फ्रेम के बाद ट्रायल चलता है. कोर्ट में इन सभी को ट्रायल फेस करना पड़ेगा. ट्रायल में अगर चार्जशीट स्टैबलिश हो जाती है तो सजा होगी. जो सेक्शन लगाए गए हैं, संभवत: 467, 468 और 420 भी होगा, इसमें 4 साल से लेकर लगभग 10 साल तक की सजा है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

सजा के बाद सदस्यता समाप्त: अरविंद कुमार ने कहा कि राबड़ी देवी एमएलसी हैं, मीसा भारती सांसद हैं और तेजस्वी यादव एमएलए हैं, सजा होने पर इन सभी की सदस्यता बरकार नहीं रह सकती है. इस्तीफा नहीं भी देंगे तो सदस्यता समाप्त हो जाएगी. लेकिन अभी चार्ज फ्रेम किया गया है, सजा का ऐलान नहीं हुआ है. चार्ज फ्रेम होना ही बड़ी बात है. अब नैतिकता नहीं रह गई है. प्रतिनिधियों को मिसाल पेश करने की जरूरत है कि अगर कोर्ट हमारे खिलाफ संज्ञान लेती है तो हम उस पद पर नहीं रहेंगे.

“किसी पद पर रहते ट्रायल चलता है तो उसे प्रभावित किया जा सकता है या सबूतों को प्रभावित किया जा सकता है. इसलिए जेल में रखा जाता है. लालू यादव को बेल भी मिला है तो टर्म और कंडीशन पर मिला है. नियमत: जब तक ट्रायल पूरा नहीं हो जाता है और कोर्ट का निर्णय नहीं आ जाता है, सदस्यता बरकरार रहेगी. लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद सजायफ्ता होने पर सदस्यता चली जाएगी.”-अरविंद कुमार, पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता

ऊपरी अदालत का दरवाजा है खुला: उन्होंने बताया कि कोर्ट से सजा होने के बाद भी लालू और उनका परिवार हाईकोर्ट में अपील कर सकता है. हाईकोर्ट में अपील की सुनवाई की जाएगी. उसमें आप अपील करते हैं कि निचली अदालत ने मेरी इन चीजों को नहीं सुना है तो हाईकोर्ट सुन सकता है. लेकिन एक बहुत महत्वपूर्ण बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अगर किसी को निचली अदालत में सजा हुई है और उसने हाईकोर्ट में अपील की है तो जबतक हाईकोर्ट से दोषमुक्त नहीं हो जाता है, चुनाव नहीं लड़ सकता है.

10 साल तक की सजा: बता दें कि प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के सेक्शन 8,9,11,12 और 13 लगे हैं. इन सभी में 7 साल तक की सजा का प्रावधान है. वहीं धारा 467, 468 और 471 लगा है. ऐसे में अधिकतम सजा 10 साल तक की हो सकती है, अगर सारी सजाएं एक साथ चलती हैं. लेकिन सजा अगर एक के बाद एक शुरू करने का कोई निर्देश अदालत देती है तो इसमें ये सजा और बढ़ भी सकती है.

आरोप तय करने का मतलब क्या होता है?: कानून की जुबान में इसका मतलब है कि किसी क्रिमिनल केस या भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस या उचित जांच एजेंसी ने अपनी जांच पूरी कर ली है और उसने रिपोर्ट कोर्ट को सुपुर्द कर दी है. इसे आम भाषा में चार्जशीट फाइल करना भी कहते हैं. इसके आगे फ्रेमिंग ऑफ चार्ज की कड़ी होती है.

इस दौरान रिपोर्ट को जज देखते हैं, अपने विवेक से समझते हैं और उस पर फैसला करते हैं. इस दौरान जज आरोपी को कोर्ट में पेश होने का आदेश जारी करते हैं. अदालत आरोपी को कहती है कि आपके खिलाफ ये-ये आरोप हैं, क्या आप कबूल करते हैं? अगर आरोपी इसे कबूल कर लेते हैं तो कोर्ट का काम सिर्फ आरोपी को सजा देने का रह जाता है.

आरोपी अगर आरोप स्वीकार करने से इनकार कर दे? : कोर्ट जब आरोप तय करती है तो आरोपी को पूरा मौका दिया जाता है. अगर वह आरोप कबूल करने से इनकार कर देता है तो इसका मतबल है कि ट्रायल फेस करना चाहता है.इसका अर्थ है कि आरोपी कार्यवाही का सामना और अपना पक्ष रखना चाहता है. इसमें मुख्य रूप से चार स्टेज होते हैं. इसके बाद गवाही की प्रक्रिया होती है. सबसे पहले अभियोजन पक्ष की गवाही, उसके बाद डिफेंस पक्ष की गवाही और फिर बहस पर फैसला होता है.

लालू परिवार समेत 41 पर आरोप तय: लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव,तेज प्रताप यादव, मीसा भारती समेत 41 लोगों पर आरोप तय हो चुका है और अब ट्रायल चलेगा. दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में सबूत पेश किए गए, जिसके बाद सही पाए जाने पर लालू परिवार समेत 41 पर आरोप तय किए गए हैं. इसके साथ ही 52 लोगों को बरी किया गया है. अब लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ सकती है. बता दें कि यह मामला सीबीआई की तरफ से दर्ज किया गया था.

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