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आखिरी चरण में पहुंचा रेस्क्यू ऑपरेशन, श्रमिकों का इंतजार, अस्पताल है तैयार, स्टैंड बाई पर है ऋषिकेश एम्स

एफएनएन, उत्तरकाशी : चारधाम ऑलवेदर परियोजना की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों की जिंदगी बचाने के लिए बचाव अभियान चल रहा है। इन श्रमिकों को सुरंग के अंदर फंसे हुए 300 घंटे से अधिक का समय हो गया। आज उम्मीद बनी है कि सुरंग में फंसे श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाला जाएगा। इसके लिए सभी तरह की तैयारियां की गई है। वहीं अस्पताल और डॉक्टर्स भी अलर्ट पर हैं।

सिलक्यारा की सुरंग में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, स्वास्थ्य विभाग भी अपनी तैयारियों में जुटा है। सुरंग के बाहर स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक और अधिकारी सभी बचाव उपकरणों के साथ तैयार हैं।

सिलक्यारा के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में आठ बेड आपातकालीन चिकित्सा के लिए तैयार रखे गए हैं, जबकि चिन्यालीसौड में 41 बेड का अस्पताल तैयार है। आवश्यकता पड़ने पर श्रमिकों को एयरलिफ्ट कर एम्स, ऋषिकेश भी लाया जा सकता है। इसके लिए भी सभी तैयारियां पूरी की गई हैं।

प्रभावित हो सकती है मनोदशा

सिलक्यारा सुरंग में श्रमिकों को फंसे 12 दिन हो चुके हैं। इन श्रमिकों का स्वास्थ्य अभी ठीक है, यद्यपि कुछ को पेचिश की शिकायत है। उन्हें निरंतर दवा दी जा रही है। इतने दिनों से फंसे रहने के बाद श्रमिकों की मनोदशा प्रभावित हो सकती है।

इसके दृष्टिगत मनोचिकित्सक लगातार उन्हें प्रेरित करने के साथ ही उनके उत्साह को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। उनकी निरंतर काउंसलिंग की जा रही है। इतने दिनों तक सुरंग में बंद रहने के बाद बाहर निकलने पर उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। इसका एक कारण सुरंग के भीतर और बाहर के तापमान में काफी अंतर होना है।

स्वास्थ्य हो सकता है प्रभावित, एंबुलेंस तैनात

सुरंग से निकालते समय भी उनका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इसे देखते हुए चिकित्सा विभाग ने पूरी तैयारियां की हुई हैं। इसके लिए सुरंग के बाहर निदेशक और उप निदेशक स्तर के अधिकारियों के साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों को तैनात किया गया है। इन श्रमिकों को चिन्यालीसौड़ स्थित अस्पताल तक ले जाने के लिए 40 से अधिक एंबुलेंस तैनात की गई हैं। यहां 41 बेड इन श्रमिकों के लिए तैयार रखे गए हैं।

जरूरत पड़ी तो किया जाएगा एयरलिफ्ट

साथ ही, सभी आवश्यक जीवन रक्षक उपकरण व दवाएं भी रखी गई हैं। इन श्रमिकों को अस्पताल ले जाते समय सिलक्यारा से चिन्यालीसौड़ तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा, ताकि इन्हें जल्द से जल्द पहुंचाया जा सके। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें एयरलिफ्ट कर एम्स ले जाया जाएगा।

एम्स में है पूरी व्यवस्था

महानिदेशक स्वास्थ्य डा. विनीता शाह ने बताया कि श्रमिकों को एयरलिफ्ट करने के लिए प्रशासन से हेलीकॉप्टर देने का अनुरोध किया गया था, जो स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया है। एम्स में भी श्रमिकों के इलाज की पूरी व्यवस्था की गई है।

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