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टिकट की टिकटिक, मौका न मिला तो कांग्रेस के पाले में जा सकते हैं कई भाजपाई चेहरे

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  • निकाय चुनाव में बिखराव रोकना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

कंचन वर्मा, रुद्रपुर : अभी तक भाजपा में आस्था और विश्वास के साथ ही मोदी और धामी का गुणगान करने वाले कई भाजपाई निकाय चुनाव में कांग्रेस के पाले में जा सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि दावेदारों की बड़ी संख्या है। हर किसी को संतुष्ट करना भी मुश्किल है, ऐसे में भाजपा में बड़ा बिखराव देखने को मिल सकता है। मौके की तलाश में बैठे कई कट्टर भाजपाई कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं।

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नगर निकाय चुनाव को लेकर भाजपा हो या कांग्रेस, हर नेता ख्वाइश पाले बैठा है। बस देरी है आरक्षण की स्थिति साफ होने की। भाजपा को ही ले लें तो सामान्य सीट पर भारत भूषण चुघ, सुशील गाबा, अनिल चौहान, उत्तम दत्ता, तरुण दत्ता विकास शर्मा प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। वहीं कांग्रेस से सीपी शर्मा, मीना शर्मा, मोहन खेड़ा तैयारी कर रहे हैं। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और उनके अनुज संजय भी टिकट के लिए कांग्रेस में घुसने की फिराक में हैं।
वहीं ओबीसी सीट पर मानस जयसवाल, राम प्रकाश गुप्ता, नत्थू लाल गुप्ता, उपेंद्र चौधरी और योगेश वर्मा दंभ भर रहे हैं। हालांकि ओबीसी पर कांग्रेस में अभी कोई प्रमुख नाम सामने नहीं आया है। सिर्फ खेड़ा परिवार से ही महिला की दावेदारी है।

सबसे असमंजस एससी सीट को लेकर है। अगर यह सीट एससी महिला या पुरुष हुई तो यहां पर टकराव तय हैं। दो बार (महिला व पुरुष) यह सीट एससी के खाते में जा चुकी है। सीट एससी महिला होने पर पूर्व मेयर सोनी कोली और निवर्तमान मेयर रामपाल सिंह की पत्नी के बीच लड़ाई देखी जाएगी। सोनी कोली के लिए उनके पति सुरेश कोली और रामपाल सिंह अपनी पत्नी की दावेदारी को लेकर आमने-सामने होंगे। सुरेश कोली से निकटता और रामपाल सिंह से विधायक शिव अरोरा का टकराव भी सार्वजनिक है, ऐसे में उंगली कहीं से भी उठे, विधायक पर उठना स्वाभाविक है।

रामपाल सिंह के पास चुनाव लड़ने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है, एलआईसी की नौकरी छोड़कर ही वह राजनीति में कूदे हैं। वहीं सुरेश कोली भी अपने या पत्नी के टिकट के लिए लंबे समय से विधायक से निकटता बनाए हैं, सोनी कोली पूर्व में मेयर रही हैं, ऐसे में उनका दावा भी मजबूत है। अब मौका तो किसी एक को ही मिलना है, ऐसे में पाला बदल या बिखराव की स्थिति तो देखने को मिलेगी। कांग्रेस ऐसी स्थिति में फायदा उठा सकती है। यानी सुरेश या रामपाल में किसी एक का मन बदल सकता है।

जो भी हो पर इस निकाय चुनाव में भाजपा के सामने बिखराव रोकना बड़ी चुनौती होगी। वहीं वो चेहरे भी सामने आ जाएंगे जो भाजपा को अपनी मां और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तारीफों के पूल बांधते देखे जा सकते हैं और उनमें आस्था जताते हैं।

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