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नानक नाम जहाज है, 19 KM केवल हाथों के सहारे हेमकुंड साहिब पहुंचे दोनों पैर से दिव्यांग सरदार बहरभवान

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एफएनएन, चमोली: कुछ ठान लो तो मंजिलें भी आसान हो जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है पंजाब के लुधियाना से आये सरदार बहरभवान सिंह ने जिन्होंने दोनों पैर न होने के बावजूद भी 15225 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब गुरद्वारे में पहुंच कर गुरु का आशीर्वाद लिया।

उत्तराखंड में हिमालय की पर्वत मालाओं में 15225 फीट की ऊंचाई पर स्थित सिखों के प्रसिद्ध धाम श्री हेमकुंट साहिब की लगभग 19 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई को दृढ़ इच्छाशक्ति के चलते पार कर श्री हेमकुंड साहिब दरबार मे पहुंचे पंजाब के लुधियाना से आये सरदार हरभवान सिंह ने 19 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई को बौना साबित कर दिया।

  • 19 किलोमीटर हाथों के सहारे चले

गोविंदघाट से श्री हेमकुंड साहिब पहुंचने के लिए सिख श्रद्धालुओं को 19 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई को पार करना पड़ता है। वहीं इस चढ़ाई में सबसे विकट समस्या तब होती हैं जब सिख श्रद्धालु घांघरिया से श्री हेमकुंट साहिब की ओर रुख करते हैं। ऐसे में सरदार हरभवान सिंह ने हिम्मत नहीं हारी और तीन दिनों में 19 किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा महज हाथों के सहारे पूरी कर डाली। और श्री हेमकुंड सरोवर में स्नान कर अपनी थकान मिटा कर दरबार साहिब में मत्था टेका।

  • घर वालों ने रोका

सरदार हरभवान सिंह ने बताया कि बीते दस वर्ष पूर्व एक दुर्घटना के कारण रेलवे ट्रैक पर दोनों पैर कट गए थे। तब से वह दोनों हाथों के सहारे चलते हैं। उन्होंने बताया कि उनके मन मे श्री हेमकुंट साहिब के दर्शन का विचार आया और वह घर से निकल पड़े। उनकी पत्नी व दो बच्चों ने उन्हें दुर्गम यात्रा पर न जाने की सलाह दी। लेकिन उनके प्रण के सामने कोई नहीं टिक पाया और वह श्री हेमकुंट साहिब के दर्शन के लिए पहुंच गए।

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