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आर्थिक तंगी में दम तोड़ रहे विस्थापित रबड़ फैक्ट्री श्रमिक, अंतरिम राहत नहीं मिली तो बड़ा आंदोलन

फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। एस एंड सी कर्मचारी यूनियन की कार्यकारिणी सदस्यों की एक बैठक शैलेन्द्र चौबे की...

अब मंडलायुक्त से मिले रबड़ फैक्ट्री के विस्थापित श्रमिक, जल्द भुगतान पर जोर

एस एंड सी कर्मचारी यूनियन का प्रतिनिधिमंडल श्रमिक नेता अशोक कुमार मिश्रा के नेतृत्व मे मंडलायुक्त कार्यालय में मंडलायुक्त श्रीमती सौम्या अग्रवाल से मिला और ज्ञापन देकर 25 साल पहले अघोषित रूप से बंद की गई रबड़ फैक्ट्री के जबरन अनिश्चितकालीन सवैतनिक अवकाश पर भेजे गए 1432 कर्मचारियों की दयनीय आर्थिक स्थिति को देखते हुए उनके वर्षों से लंबित वैधानिक देयों का गम्भीरतापूर्वक कार्रवाई कर प्राथमिकता से जल्द से जल्द भुगतान करवाने का आग्रह किया।

हाईवे के लिए अधिग्रहीत रबड़ फैक्ट्री भूमि की जमा राशि से कराया जाए विस्थापित श्रमिकों का अंतरिम भुगतान

एस एंड सी कर्मचारी यूनियन के श्रमिक नेताओं ने रबड़ फैक्ट्री के विस्थापित श्रमिकों को तत्काल अंतरिम राहत देने के लिए हाईवे के लिए अधिग्रहीत की गई रबड़ फैक्ट्री की भूमि की राजकीय कोषागार में जमा राशि से बकाया देयों का भुगतान कराने का आग्रह किया है।

रबड़ फैक्ट्री के 330 विस्थापित कर्मियों ने ‘ओएल’ को अभी तक नहीं भिजवाए हैं जरूरी साक्ष्य/दस्तावेज

एस & सी कर्मचारी यूनियन के महामंत्री/श्रमिक नेता अशोक कुमार मिश्रा ने बैठक में  भयंकर आर्थिक तंगी से जूझ रहे सभी विस्थापित रबड़ फैक्ट्री कर्मियों को बताया कि उच्च न्यायालय मुम्बई के ऑफिशियल लिकयूडेटर (ओएल) द्वारा 330 ऐसे रबड़ फैक्ट्री श्रमिकों की लिस्ट भेजी है जिन्होंने बार-बार मांगने पर भी अभी तक अपने आधार कार्ड, जन्म तिथि, ग्रेड के सबूत और भर्ती होने तथा संभावित रिटायरमेन्ट की तिथि के अभिलेख/साक्ष्य जमा नहीं कराए हैं।

रबड़ फैक्ट्री की भूमि वापसी को सरकार की मुम्बई हाईकोर्ट और डीआरटी में केस दर्ज कराने की तैयारियां तेज, वकीलों को भेजी रिपोर्ट

क्षेत्रीय प्रबंधक यूपीसीडा द्वारा भी बगैर देरी किए यह अति महत्वपूर्ण रिपोर्ट सभी जरूरी दस्तावेजों और सुबूतों के साथ मुम्बई के संबंधित अधिवक्ताओं को भेज भी दी गई है।

रबड़ फैक्ट्री भू स्वामित्व प्रकरण: मुंबई  हाईकोर्ट और डीआरटी में नए केस दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू

यह भी बताना जरूरी है कि पिछले 25 वर्षों से अघोषित तौर पर बंद पड़ी सिंथेटिक एंड केमिकल्स लिमिटेड (रबड़ फैक्ट्री) की स्थापना के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1960 में मुंबई के सेठ किलाचंद को 1382.23 एकड़ भूमि लीज पर दी थी। लीज डीड में शर्त शामिल की गई थी कि फैक्ट्री बंद होने पर सरकार जमीन वापस ले लेगी लेकिन 15 जुलाई 1999 को फैक्ट्री बंद हुई तो राज्य सरकार उस पर कब्जा नहीं ले सकी।

वन मंत्री से फिर मिले रबड़ फैक्ट्री श्रमिक नेता, हाईवे में ली गई भूमि के मुआवजे से अंतरिम राहत दिलाने पर जोर

एफएनएन ब्यूरो, बरेली। 25 साल से बंद पड़ी रबड़ फैक्ट्री के विस्थापित श्रमिकों का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को फिर वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरूण कुमार सक्सेना से बरेली में उनके कैंप कार्यालय में मिला और हाईवे में अधिग्रहीत भूमि के मुआवजे की रकम में से विस्थापित श्रमिकों को अंतरिम राहत राशि तत्काल दिलवाने का आग्रह किया।

रबड़ फैक्ट्री के विस्थापित कर्मियों ने मुख्य सचिव के समक्ष उठाया लंबित देनदारियों का मुद्दा

एफएनएन ब्यूरो, बरेली। प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के शनिवार को बरेली आगमन पर एस एंड सी...

हकीकत या फिर सिर्फ झुनझुना?

तत्कालीन सांसद संतोष गंगवार ने कहा कि रबड़ फैक्टरी की 1300 एकड़ जमीन पर कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू हो जाए तो जिले की सूरत बदल सकती है। फैक्टरी की जमीन पर औद्योगिक हब विकसित करने के लिए उन्होंने सरकार को पहले भी पत्र लिखे हैं। फिर से पत्र लिखेंगे। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस प्रस्ताव को वह आगे बढ़ाएंगे।

रबड़ फैक्ट्री की जमीन कब्जे में लेकर विस्थापित श्रमिकों का भुगतान जल्द कराए सरकार

मुंबई हाईकोर्ट 19 अक्टूबर 2020 को अलकेमिसट रीकंस्ट्रक्शन के पक्ष में दिये अपने आदेश को 20 दिसम्बर 2023 को निरस्त कर वापस भी ले चुका है। साथ ही फैसले में अलकेमिस्ट रीकंस्ट्रक्शन द्वारा साजिशन छुपाए गए तथ्यों को भी उजागर किया है।