एफएनएन, नई दिल्ली : PM Modi ने शुक्रवार देर रात जारी एक वीडियो संदेश में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान उनके साथ-साथ उनकी दिवंगत मां के लिए भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है, लेकिन इसके बावजूद वे इन युवाओं को माफ करना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज में मौजूद नाराजगी और आक्रोश को वह पूरी तरह समझते हैं, लेकिन इसका समाधान गालियां या नफरत नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि कई युवा भावनाओं में बहकर गलत रास्ता चुन लेते हैं और ऐसे “गुमराह बच्चों” को दंडित करने के बजाय उन्हें सही दिशा दिखाना समाज की जिम्मेदारी है।
मोदी ने कहा कि उन्हें सबसे अधिक दुख इस बात का है कि कुछ छात्राओं ने भी बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने इसे “कल्चर शॉक” बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में इस तरह की अभद्रता चिंता का विषय है। हालांकि उन्होंने दोहराया कि गलती करने वालों को सुधारने का मौका मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि गलती से दांत जीभ को काट ले, तो कोई दांत नहीं तोड़ता क्योंकि दोनों हमारे अपने हैं। उसी तरह देश के युवा भी अपने ही बच्चे हैं और उन्हें सही राह दिखाना हमारा कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अदालतों और सजा के डर में धकेलने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। जरूरत इस बात की है कि उन्हें समझाया जाए, उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दी जाए और उन्हें देश निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जाए।
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने युवाओं से देश के विकास में भागीदार बनने की अपील करते हुए कहा कि गलतियों से सीखकर आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता है। उन्होंने कहा कि उनका सपना देश के हर युवा का उज्ज्वल भविष्य है और वे उसी दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर यह छात्र आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में 20 जून से शुरू हुआ था। करीब 36 दिनों तक चले इस प्रदर्शन का समापन 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा कई प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद हुआ। इस आंदोलन को देशभर के हजारों छात्रों के साथ-साथ कई विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला।







