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परिजनों का टूट रहा सब्र, NTPC को उम्मीद- सुरंग के भीतर जिंदा होंगे लोग

एफएनएन, देहरादून : जलस्तर बढ़ने के बाद गुरुवार को राहत और बचाव के काम अस्थायी तौर पर रोका गया था। सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने का हरसंभव प्रयास हो रहा है। बाहर उनके परिजनों का सब्र टूट रहा हैं तो वहीं NTPC को उम्मीद है कि सुरंग के अंदर मजदूर जिंदा होंगे। जलस्तर बढ़ने के बाद गुरुवार को राहत और बचाव के काम अस्थायी तौर पर रोका गया था। सुरंग में फंसे मजदूरों को निकालने का हरसंभव प्रयास हो रहा है। बाहर उनके परिजनों का सब्र टूट रहा हैं तो वहीं NTPC को उम्मीद है कि सुरंग के अंदर मजदूर जिंदा होंगे।गुरुवार को राहत के काम में लगे कर्मियों और मशीनों को सुरंग से वापस बुलाया गया था। नदी में पानी का बहाव बढ़ने से सुरंग में भी पानी आने लगा था। हालांकि, करीब आधे घंटे बाद ऑपरेशन को सीमित टीमों के साथ फिर से शुरू किया गया। जलस्तर बढ़ने की वजह से सुरंग के पास करीब एक किलोमीटर का क्षेत्र भी खाली कराया गया। इसकी वजह से मौके पर अफरातफरी का माहौल रहा।

मजदूरों को 3 दिन की ट्रेनिंग के बाद अंदर भेजा जाता है’
हालात का जायजा लेने के लिए एयरफोर्स की टीम ने आपदाग्रस्त ग्लेशियर और 10 गांव का दौरा किया। उधर, एनटीपीसी के इंजीनियर ने बयान जारी करते हुए कहा, ‘टनल में जो श्रमिक काम कर रहे थे, वे फिलहाल सुरक्षित हैं। उन्हें तीन दिनों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। उसके बाद ही उन्हें अंदर भेजा जाता है। सभी उपकरण परीक्षण और प्रमाणित होने के बाद ही उन्हें दिए जाते हैं।’

मरने वालों की संख्या हुई 36, 2 जिंदा मिले
इंजीनियर ने बताया, ‘ऐसे में जो चालक दल वहां काम कर रहा था, वह पूरी तरह से सक्षम हैं।’ इस बीच, चमोली जिले में गुरुवार को दो और शव मिलने से आपदा में मरने वालों की संख्या 36 हो गई। वहीं 2 लोग जिंदा बचाए गए हैं। 169 अन्य लोग अभी भी लापता हैं।

सुरंग के मोड़ में फंसे हैं मजदूर!
बताया जा रहा है कि तीन किलोमीटर लंबी सुरंग के अंदर 180 मीटर पर एक मोड़ है। इसी मोड़ पर लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। लापता हुए अपनों की तलाश में तपोवन औैर रैणी पहुंचे लोगों के सब्र का बांध टूट रहा है।

रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं सारी उम्मीदें
परियोजना की सुरंग से करीब 500 मीटर दूर बैठे लोग रेस्क्यू टीमों को उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं। इस बीच, हेलिकॉप्टर से लगातार नीती घाटी के गांवों में राहत सामग्री बांटी जा रही है।

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