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मच्छर ही मिटा देंगे ‘आतंकी’ मच्छरों की नस्ल

एफएनएन, नई दिल्ली : मच्छर दुनिया का सबसे खतरनाक जीव है। ये ऐसी बीमारियां फैलाता है जिसकी वजह से दुनिया भर में हर वर्ष करीब दस लाख लोग मर जाते हैं। लेकिन, अब विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है, कि बीमारी फैलाने वाले मच्छरों का पूरी तरह से खात्मा करके इस चुनौती से निजात पाई जा सकती है। मच्छर ही इंसानों में डेंगू और जीका वायरस जैसी बीमारियां फैलाते हैं। इसके लिए अमेरिका में नया प्रयोग होने जा रहा है। अमेरिका के फ्लोरिडा में अगले दो वर्षों में 75 करोड़ जेनेटिकली मॉडिफाइड मच्छर छोड़े जाएंगे। ये मच्छर सामान्य मच्छरों के बीच जाकर उनकी पीढ़ी को नष्ट कर देंगे। या फिर इनकी वजह से ऐसी नस्लें आएंगी जिनके काटने से इंसान किसी बीमारी का शिकार नहीं होगा।

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अमेरिका का ये है प्लान

अमेरिका फ्लोरिडा में अगले दो सालों में चरणबद्ध तरीके से 75 करोड़ जेनेटिकली मॉडिफाइड मच्छर छोड़ने की तैयारी कर चुका है। जेनेटिकली मॉडिफाइड मच्छरों को छोड़ने के इस प्रोजेक्ट को अमेरिकी सरकार से अनुमति मिल चुकी है। जेनेटिकली मॉडिफाइड मच्छर ऐसे हैं कि इनके ऊपर किसी भी बीमारी का बैक्टीरिया, वायरस या पैथोजेन असर नहीं करता। इसलिए जब ये सामान्य मच्छरों के साथ संबंध बनाएंगे तो आने वाली मच्छरों की नस्लें भी इनके जीन लेकर पैदा होंगी। बस वो भी बीमारियां फैलाने में नाकाम हो जाएंगे, क्योंकि उनके शरीर में वो जींस होंगे जो बैक्टीरिया, वायरस को दूर रखेंगे।

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खत्म हो जाएंगी डेंगू जैसी कई बीमारियां

  • जेनेटिकली मॉडिफाइड मच्छरों को छोड़ने से भविष्य में कीटनाशकों का खर्च बचेगा। ये मच्छर खासतौर से एडीस एजिप्टी मच्छरों की नस्ल को खत्म करेंगे। एडीस एजिप्टी मच्छरों की वजह से ही इंसानों में डेंगू, जीका वायरस और यलो फीवर फैलता है। फिलहाल ये पायलट प्रोजेक्ट फ्लोरिडा कीज में शुरू किया जाएगा। इस काम के लिए अमेरिकी सरकार ने ब्रिटेन में स्थित अमेरिकी कंपनी से समझौता किया है।
  • इस कंपनी का नाम है ऑक्सीटेक। इस काम के लिए अमेरिकी पर्यावरण एजेंसी से भी हरी झंडी मिल चुकी है। ऑक्सीटेक जेनेटिकली मॉडिफाइड मच्छरों को पैदा करती है। यह ऐसे नर एडीस एजिप्टी मच्छर पैदा करेगी जो किसी तरह की बीमारी फैला नहीं पाएंगे।
  • जेनेटिकली मॉडिफाइड नर एडीस एजिप्टी मच्छर जब छोड़े जाएंगे तो ये मादा एडीस मच्छरों से संबंध बनाएंगे। ऐसे में इनके शरीर से एक खास तरह का प्रोटीन मादा एडीस मच्छरों में जाएगा। जिससे आगे पैदा होने वाली मच्छरों की नस्लें बीमारी पैदा नहीं कर पाएंगी।
  • इससे पहले बेहद छोटे पैमाने पर ऐसा प्रयोग ब्राजील में 2016 में किया गया था, उसके नतीजे बेहद सकारात्मक आए थे। ब्राजील में मच्छरों को छोड़े जाने के बाद मच्छर जनित बीमारियों में भारी कमी दर्ज की गई थी।

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