एफएनएन , जेरूसलम : फ्लाईदुबई की एक उड़ान में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब को-पायलट ने कथित तौर पर कैप्टन पर हमला कर दिया। इस दौरान विमान को गंभीर खतरे से बाहर निकालने में दो ऐसे पायलटों ने अहम भूमिका निभाई, जो यात्री के तौर पर विमान में सवार थे। हालांकि, अभी तक इन दोनों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
फ्लाईदुबई ने इन दोनों को सिर्फ ऑन-ड्यूटी क्रू मेंबर बताया है। एयरलाइन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उनकी पहचान और भूमिका के बारे में अधिक जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
कैसे कॉकपिट तक पहुंचे दोनों पायलट?
विमान में सवार यात्री डेनियल श्लिचर ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विमान में यात्रा कर रहे दोनों पायलट असल में डेडहेडिंग क्रू थे। यानी वे विमान में यात्री के तौर पर सफर कर रहे थे, ताकि बाद में इसी विमान को तेल अवीव से दुबई वापस ले जा सकें।
श्लिचर के मुताबिक, जब यात्रियों को कॉकपिट में चल रही घटना के बारे में पता चला तो स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। बताया गया कि को-पायलट ने कैप्टन पर बार-बार हमला किया था और कॉकपिट के अंदर खून भी फैल गया था।
कैप्टन ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद एक यात्री ने को-पायलट को पकड़कर बाहर खींच लिया, जबकि कुछ अन्य यात्रियों ने उसे काबू में करने की कोशिश की।
यात्रियों के बीच से निकलकर पायलट ने संभाला कंट्रोल
श्लिचर के अनुसार, इसी दौरान विमान में मौजूद एक अतिरिक्त पायलट भीड़ के बीच से निकलकर कॉकपिट तक पहुंचा और विमान का नियंत्रण संभाल लिया। उन्होंने बताया कि वह व्यक्ति बेहद तेजी से कॉकपिट में पहुंचा और हालात को समझते हुए तुरंत कंट्रोल अपने हाथ में लेने लगा।
कुछ देर बाद दूसरा पायलट भी कॉकपिट में पहुंच गया। दोनों ने कॉकपिट का दरवाजा बंद कर लिया, ताकि वहां किसी और की मौजूदगी न रहे और वे विमान को स्थिर करने पर ध्यान दे सकें।
श्लिचर ने इन दोनों पायलटों की तारीफ करते हुए उन्हें घटना के गुमनाम नायकों में शामिल बताया। उनके मुताबिक, पहले पायलट ने बेहद तेजी से प्रतिक्रिया दी और ऐसा लगा कि उसे पूरी स्थिति की अच्छी समझ थी।
विमान को स्थिर करने में लगे कई मिनट
हमले के दौरान विमान तेजी से नीचे की ओर गया और उसके रडर का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की बात भी सामने आई। विमान को दोबारा नियंत्रित और स्थिर करने में कई मिनट लगे। यात्री के मुताबिक, इसमें करीब 10 मिनट या उससे अधिक समय लग सकता था।
स्थिति संभालने के बाद विमान की ओर से मेडे कॉल किया गया और सुरक्षित लैंडिंग के लिए जगह तलाश की जाने लगी। इस दौरान कुछ यात्रियों के मन में यह आशंका भी थी कि कॉकपिट संभालने वाले दोनों लोग कौन हैं और क्या उन पर भरोसा किया जा सकता है।
तबुक में हुई विमान की सुरक्षित लैंडिंग
डेनियल श्लिचर ने बताया कि उन्हें कुछ समय के लिए यह डर भी लगा कि कहीं विमान को ईरान या किसी अन्य जगह हाईजैक तो नहीं किया जा रहा। हालांकि, करीब 45 मिनट बाद कॉकपिट से यात्रियों को बताया गया कि विमान सऊदी अरब के तबुक में उतरेगा और स्थिति नियंत्रण में है।
इसके बाद यात्रियों ने पायलटों पर भरोसा किया और आखिरकार विमान सुरक्षित रूप से तबुक में उतर गया। इस पूरी घटना में कैप्टन, यात्रियों और विमान में मौजूद दोनों गुमनाम पायलटों की भूमिका अहम बताई जा रही है। फिलहाल उन दोनों पायलटों की पहचान आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है।








