एफएनएन , ऋषिकेश : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को अब वाहन पार्क करने के लिए शुल्क देना होगा। एम्स प्रशासन ने पार्किंग व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ठेकेदार नियुक्त कर दिया है। निर्धारित दरों के अनुसार, दोपहिया वाहन खड़ा करने पर 20 रुपये और चारपहिया वाहन के लिए 40 रुपये पार्किंग शुल्क देना होगा।
इस फैसले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। खासकर अस्पताल में उपचार कराने आने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
दोपहिया के 20 और चारपहिया के 40 रुपये देने होंगे
एम्स ऋषिकेश प्रशासन ने अस्पताल परिसर में पार्किंग व्यवस्था के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके बाद वाहनों की पार्किंग के लिए शुल्क वसूले जाने की व्यवस्था लागू की जा रही है।
एम्स के जनसंपर्क अधिकारी श्रीलॉय मोहंती ने बताया कि अस्पताल आने वाले लोगों को पार्किंग शुल्क देना होगा। इसके लिए प्रशासन की ओर से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। निर्धारित दरों के मुताबिक, दोपहिया वाहनों के लिए 20 रुपये और चारपहिया वाहनों के लिए 40 रुपये शुल्क लिया जाएगा।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि निर्धारित शुल्क कितनी अवधि की पार्किंग के लिए लागू होगा।
मरीजों और तीमारदारों पर बढ़ सकता है आर्थिक बोझ
एम्स ऋषिकेश में उत्तराखंड के अलावा आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। कई मरीजों को चिकित्सक से परामर्श लेने, जांच कराने और रिपोर्ट दिखाने के लिए अस्पताल में लंबे समय तक रुकना पड़ता है। दूरदराज के इलाकों से आने वाले मरीजों के साथ उनके परिजन भी होते हैं।
ऐसे में पार्किंग शुल्क की नई व्यवस्था से मरीजों और उनके तीमारदारों का खर्च बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पहले से ही दवाइयों, जांच और आने-जाने पर खर्च कर रहे परिवारों के लिए यह अतिरिक्त भुगतान परेशानी का कारण बन सकता है।
स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में उपचार के लिए आने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राहत देने के लिए कोई विशेष व्यवस्था की जा सकती है या नहीं।
सरकारी अस्पताल में पार्किंग शुल्क को लेकर बहस
एम्स ऋषिकेश को उत्तराखंड सहित आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए एक प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान माना जाता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी बेहतर इलाज की उम्मीद में यहां पहुंचते हैं।
ऐसे में पार्किंग शुल्क लागू होने से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और मरीजों के कुल खर्च को लेकर बहस शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
व्यापार मंडल ने जताई नाराजगी, फैसले पर पुनर्विचार की मांग
एम्स में पार्किंग शुल्क वसूले जाने के फैसले पर ऋषिकेश व्यापार मंडल ने भी नाराजगी जताई है। व्यापार मंडल की ओर से इस व्यवस्था पर आपत्ति दर्ज कराते हुए मरीजों और उनके तीमारदारों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
इस फैसले के बाद पार्किंग शुल्क की व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और जनहित को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक उपाय तलाशने की मांग उठ रही है।
एम्स प्रशासन ने की शुल्क की पुष्टि
एम्स ऋषिकेश के जनसंपर्क अधिकारी श्रीलॉय मोहंती ने स्पष्ट किया कि अस्पताल आने वाले लोगों को पार्किंग शुल्क देना होगा। उन्होंने बताया कि पार्किंग व्यवस्था के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और दोपहिया वाहनों के लिए 20 रुपये तथा चारपहिया वाहनों के लिए 40 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
फिलहाल, इस व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा जारी है। अब देखना होगा कि मरीजों और तीमारदारों को राहत देने के लिए एम्स प्रशासन कोई विशेष व्यवस्था करता है या नहीं।








