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सपना होगा साकार, खमरिया पर ₹99.76 करोड़ से बनेगा पक्का रेगुलेटर

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‘जलपुरुष’ बरार के वर्षों चले संघर्ष के बाद आखिरकार बजट मंजूर, डीपीआर स्वीकृति की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में, जल्द होंगे टेंडर

मीरगंज समेत तीन तहसीलों के 165 गांवों की 15 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा भरपूर पानी, भूजल स्तर भी होगा उन्नत

गणेश पथिक
चीफ रिपोर्टर
फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। खुली आंखों से देखे गए सपने जब सच होते हैं तो उस सुख-आनंद का शब्दों में बखान करना आसान नहीं होता है। 84 साल के ‘चिर युवा’ रुहेलखंड के ‘जलपुरुष’ किसान नेता-पूर्व विधायक जयदीप सिंह बरार भी इन दिनों कुछ ऐसे ही अद्भुत सुख-आनंद की अनुभूति से गुजर रहे हैं। उनकी पहल पर मीरगंज तहसील में शीशगढ़ के पास पश्चिम बहगुल नदी के खमरिया घाट पर 11वीं बार सामूहिक श्रमदान से कच्चा बांध तो बन ही चुका है, उप्र शासन द्वारा यहां पक्के बांध निर्माण के सिंचाई विभाग के ₹99.76 करोड़ के अनुमानित व्यय के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी जा चुकी है। विभाग गहन सर्वे कराने के बाद डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) भी बनाकर भिजवा चुका है। डीपीआर को शासन की मंजूरी मिलते ही अगले कुछ दिनों में खमरिया में पक्के रेगुलेटर बांध निर्माण की टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

किसानों के हितों के लिए हुक्मरान और पूंजीपतियों से हमेशा ही मुचैटा लेते रहे पूर्व विधायक, किसान नेता और वरिष्ठ सामाजिक नेतृत्वकर्ता 84 वर्षीय जयदीप सिंह बरार बताते हैं-“वैसे तो विधायक रहते हुए और बाद में भी किसान-मजदूरों, खासकर गन्ना काश्तकारों के हकूक की लड़ाई हमेशा ही लड़ते और जीतते भी रहे हैं लेकिन पश्चिम बहगुल नदी के खमरिया घाट पर किसानों के सामूहिक सहयोग से वर्ष 2016 से हर बार कच्चा बांध बनवाकर विलासपुर (रामपुर) तहसील के 15 और मीरगंज, बहेड़ी तहसीलों के 60-60 गांवों की 15 हजार हैक्टेयर से भी ज्यादा कृषि भूमि को हर साल सिंचित, हरी-भरी बनते तथा भूजल स्तर ऊपर उठते देखना वाकई अत्यधिक सुखद-आनंददायक अनुभव है‌।”

श्री बरार बताते हैं कि कल 21 जनवरी बुधवार को क्षेत्रीय किसानों के श्रमदान और जेसीबी से मिट्टी पटान कर लगातार ग्यारहवें साल खमरिया में पश्चिम बहगुल नदी की धार रोक दी गई है। जल्द ही बांध के जलाशय का पानी नहरों, रजवहों से होकर इन तीनों तहसीलों के 165 से भी ज्यादा गांवों में पहुंचकर खेतों को हरी-भरी फसलों से भर देगा। बुधवार को ही सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता (एसडीओ) बहेड़ी मजहर हुसैन, अभियंता प्रांजल राठौर और अपनी टीम के साथ खमरिया पहुंचे और कच्चे बांध निर्माण का निरीक्षण कर संतोष जताया। किसानों को जरूरी टेक्निकल टिप्स भी दिए।

रुहेलखंड के निर्विवाद ‘जलपुरुष’ जयदीप सिंह बरार

श्री बरार कहते हैं कि खमरिया पर ब्रिटिश हुकूमत में बने और बाद में भयंकर बाढ़ में ध्वस्त हुए पक्के बांध को अपने जीवनकाल में ही एक बार फिर बनते देखना वाकई उनका सबसे बड़ा सपना रहा है। उनकी लगातार कोशिशों के चलते मुख्य अभियंता (शारदा नहर खंड) हृदय नारायण सिंह, अधीक्षण अभियंता (सिंचाई-पंचम वृत्त) त्र्यंबक त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता (रुहेलखंड नहर खंड, बरेली) सर्वेश कुमार सिन्हा जैसे अधिकारी खमरिया पर पक्का बांध बनवाने की महत्ता दर्शाती कई सर्वे रिपोर्टें लगातार विभागीय उच्चाधिकारियों और प्रदेश शासन को लगातार भेजते रहे।

इसके साथ ही प्रदेश के प्रमुख सचिव (सिंचाई), सिंचाई मंत्री-आंवला विधायक धर्मपाल सिंह, एमएलसी कुंवर महाराज सिंह और पूर्व विधायक-पूर्व महापौर स्वर्गीय कुंवर सुभाष पटेल भी व्यापक किसान हित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी इस महत्वाकांक्षी परियोजना में व्यक्तिगत रूप से दिलचस्पी लेते रहे। एमएलसी कुंवर महाराज सिंह के साथ श्री बरार लखनऊ जाकर सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह और प्रमुख सचिव (सिंचाई) से भी मिले और दोनों को इस प्रोजेक्ट की किसान हित में जरूरत को विस्तार से, बिंदुवार समझाया। इन्हीं सब कोशिशों का मिला-जुला नतीजा है कि खमरिया घाट पर पक्के रेगुलेटर बांध का निकट भविष्य में निर्माण शुरू हो सकता है।

खमरिया घाट पर खड़ंजा भी एमएलसी महाराज सिंह, कुंवर सुभाष पटेल की देन

श्री बरार ने बताया कि खमरिया घाट पर खड़ंजा भी वरिष्ठ भाजपा नेता, एमएलसी स्वर्गीय कुंवर सुभाष पटेल और एमएलसी कुंवर महाराज सिंह की ही देन है। श्री बरार के अनुरोध पर इन्हीं दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी विधायक निधि से खमरिया घाट पर खडंजा निर्माण की मंजूरी दिलाई थी। 400 मीटर खड़ंजा बन भी चुका है।

लेकिन शंखा के रुकुमपुर रेगुलेटर पर रेलवे ने लगाया अड़ंगा, किसान मायूस

लेकिन माधौपुर-रुकुमपुर गांवों के पास शंखा नदी पर प्रस्तावित पक्के रेगुलेटर के निर्माण पर रेलवे विभाग ने अड़ंगा डाल दिया है। रेलवे ने सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता (रुहेलखंड नहर खंड) को नोटिस भेजा है। इसमें प्रस्तावित रेगुलेटर से भारी मात्रा में पानी भंडारण से वर्षा में बाढ़ आने पर शंखा नदी के रेलवे पुल के ढहने का खतरा जताते हुए विभागीय अनापत्ति देने में असमर्थता व्यक्त की है। हालांकि अधिशासी अभियंता रुहेलखंड नहर खंड श्री सिन्हा ने नोटिस का जवाब भेजकर रेलवे अधिकारियों की आशंकाओं को निराधार साबित करने की कोशिश की है। श्री बरार और कई दीगर बुजुर्ग क्षेत्रीय किसानों के हवाले से एक्सईएन ने कहा है कि शंखा नदी पर कई दशक पहले हर साल कच्चा बांध बनता रहा है।

अधिकारियों ने शंखा नदी पर रुकुमपुर पक्का रेगुलेटर बनने पर रेलवे पुल को कोई खतरा नहीं होने और माधौपुर, रसूला चौधरी, परसाखेड़ा समेत कई दर्जन गांवों की हजारों हैक्टेयर भूमि सिंचित होने से खेती-किसानी को नवजीवन मिलने की उम्मीद जताई है। रुकुमपुर रेगुलेटर पर रेलवे द्वारा अड़ंगा लगाए जाने से जलपुरुष श्री बरार काफी मायूस हैं। उनका कहना है कि उनकी पहल पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों की रजामंदी के बाद कई गांवों के किसानों ने रुकुमपुर गांव के पास शंखा नदी की जलधार रोकने का काम महीनों तक चले सामूहिक श्रमदान से काफी हद तक पूरा कर लिया था। अब ये सब काश्तकार भी काफी निराश हैं।

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