डैम टूटे, नहरें सूखीं, कैसे बुझे 50 हजार बीघा जमीन की प्यास?

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  • 24 साल से कानों में रुई ठूंसे बैठे हैं जिम्मेदार साहब बहादुर, धरना-प्रदर्शन भी रहे बेअसर, बहुत बेबस है अन्नदाता किसान

गणेश पथिक, मीरगंज (बरेली) : तथाकथित जनकल्याणकारी सरकार बहादुरों, माननीय जनप्रतिनिधियों और रसूखदार हाकिमों की संवेदनशीलता की निष्ठुर सच्चाई बयान कर रहा है 20 साल से टूटा पड़ा ढकिया डाम। दो दशक से पानी की एक बूँद भी न आने से डाम से जुड़ी दोनों नहरें सूखी पड़ी हैं। मीरगंज, शेरगढ़ विकास क्षेत्रों के 50 से ज्यादा गांवों की 50 हजार से भी ज्यादा कृषि भूमि जिम्मेदारों की आपराधिक कारिस्तानियों की वजह से असिंचित हैं और इलाके का अन्नदाता माननीयों के झूठे चुनावी दावों-वायदों में फंसकर भगवान भरोसे रहकर भीषण गरीबी का अभिशाप झेलने को विवश है। बर्तानिया हुकूमत में क्षेत्रीय किसानों की सुविधा के लिए वास्ते वर्ष 1909 में शीशगढ़ में खमरिया और मीरगंज में ढकिया गांवों के पास कुल्ली-बैगुल नदियों की संयुक्त धारा पर दो कच्चे बांध बनवाये गये थे। 1975 की विनाशकारी बाढ़ ने खमरिया के पक्के बांध को ढहा दिया था। तब से हर साल वहां कच्चा बांध बना लिया जाता था। खमरिया बांध का पानी ढकिया में बने लोहे के मजबूत फाटकों वाले पक्के डाम से होकर मीरगंज और शेरगढ़ विकास क्षेत्रों के 50 से भी ज्यादा गांवों से निकली दो नहरों के जरिए 50 हजार बीघा कृषि भूमि की सिंचाई करता था। कनकपुरी गांव के बुजुर्ग समाजसेवी वेदप्रकाश कश्यप और ढकिया ठाकुरान के किसान कृष्णपाल सिंह बताते हैं कि 1996 तक कच्चे खमरिया डाम के पानी से पड़ोसी रामपुर जिले और शीशगढ़ से शेरगढ़, मीरगंज तक के कई दर्जन गांवों की हजारों बीघा फसलें बारहों महीने लहलहाती रहती थीं। यही नहीं, डाम से आया साफ पानी ग्रामीणों की प्यास भी बुझाता था। वर्ष 2000 की बाढ़ में ढकिया डाम के लोहे के फाटक टूट गये थे। नहर विभाग द्वारा मरम्मत नहीं कराए जाने से चोर-स्मैकिये लोहा काटकर ले गये। कई बार यह मुद्दा अखबारों की सुर्खियों में भी रहा लेकिन जिम्मेदार कानों में रुई ही ठूंसे रहे। आलम यह है कि ढकिया डाम से निकलने वाली दोनों नहरें पिछले दो दशक से झाड़-झंकाड़ से पटी होने से बरसात में भी सूखी ही रहती हैं। नहर विभाग के अफसर कभी-कभार दोनों नहरों में जेसीबी चलवाकर सफाई करवाते हैं लेकिन सिर्फ सरकारी बजट का तिया-पांचा करने की खातिर। हालत यह है कि ढकिया डाम से सहोड़ा, वसई, गनेशपुर, अक्सौरा, खिदाईपुर, परतापुर, मकड़ी खोय, जुन्हाई तक की 20 किमी लंबी पहली नहर और ढकिया डाम से वसई, औरंगाबाद, धनेली, बकैनिया वीरपुर, ठिरिया कल्याणपुर, मंडवा वंशीपुर तक की 20 किमी ल॔बी दूसरी सूखी पड़ी नहर भी किसानों के लिए बेमतलब ही होकर रह गई है।

परवान नहीं चढ़े नेताओं के दावे-वायदे

पूर्व विधायक सुल्तान बेग ने खमरिया, ढकिया डाम पक्के बनवाने का मुद्दा विधानसभा में भी उठाया था। मौजूदा विधायक डा. डीसी वर्मा भी इस अधूरे प्रोजेक्ट को जल्द अमलीजामा पहनाने के दावे-वायदे अक्सर करते रहे हैं लेकिन फिलहाल किसानों की आस अधूरी ही है।

पूर्व विधायक बरार ने भी दिखाया था दमखम

खमरिया बांध पक्का करवाने को लेकर अक्सर धरना-प्रदर्शन करते रहे पूर्व विधायक-किसान नेता जयदीप सिंह बरार ने वर्ष 2016 में जन सहयोग से महीने भर तक सामूहिक श्रमदान कराकर खमरिया डाम पर कच्चा बांध बनवाया भी था। साल भर तक बांध के पानी से दर्जनों गांवों के किसानों को फायदा भी मिला था। हालांकि अगले ही साल बाढ़ में कच्चा बांध फिर से बह गया। खमरिया, ढकिया बांधों को पक्का करवाने की मांग को लेकर अक्सर इलाके के किसान धरना-प्रदर्शन भी करते रहे हैं लेकिन साहब बहादुर की निठल्लई के चलते योगी सरकार में भी अन्नदाता की उम्मीदें दम ही तोड़ती दिख रही हैं।

प्रोजेक्ट मंजूर, जल्द बनेगा खमरिया पर पक्का बांध

 

खमरिया घाट पर पक्का बांध बनवाने का महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट शासन से मंजूर हो चुका है। मैने विधानसभा में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। बहेड़ी विधायक छत्रपाल सिंह ने भी तगड़ी पैरवी की थी। साथ ही केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ से मिलकर दो-टूक बात की थी। कोरोना संकट के चलते धनावंटन में कुछ विलम्ब जरूर हुआ है लेकिन अब बहुत जल्द बजट अवमुक्त होते ही निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। क्षतिग्रस्त ढकिया डाम को भी दुरुस्त कराया जाएगा।
डा. डीसी वर्मा, भाजपा विधायक, मीरगंज

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