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Chardham : 15 सितंबर से शुरू होगा चारधाम यात्रा का दूसरा चरण, 50 लाख के करीब पहुंचा श्रद्धालुओं का आंकड़ा

एफएनएन, देहरादून : Chardham उत्तराखंड की चारधाम यात्रा अब अपने दूसरे चरण की ओर बढ़ रही है। यात्रा का पहला चरण पूरा होने के साथ ही धामों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या करीब 50 लाख तक पहुंच गई है। मानसून के दौरान भी यात्रा का संचालन जारी रहा और अब 15 सितंबर से दूसरे चरण में यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। यात्रा के लगातार बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए इस बार भी चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। सरकार और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से दूसरे चरण के लिए व्यवस्थाओं को और बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है।

सुगम दर्शन पर रहेगा विशेष जोर

बीकेटीसी के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारु रखने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरे चरण में श्रद्धालुओं को कम से कम परेशानी हो और उन्हें आसानी से दर्शन मिल सकें, इसे प्राथमिकता दी जाएगी। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए बीकेटीसी ने वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री धामी ने स्वयं की थी। 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर उन्होंने आम श्रद्धालु की तरह दर्शन किए थे।

भीड़ प्रबंधन के लिए पूजा के समय में बदलाव

धामों में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सुबह और शाम होने वाली पूजा के समय को भी कम किया गया है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को समय पर दर्शन का अवसर उपलब्ध कराना और लंबी कतारों को नियंत्रित करना है बीकेटीसी का कहना है कि दूसरे चरण में भीड़ बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जाएगी।

धामों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा

बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के अलावा बीकेटीसी के अधीन कुल 45 मंदिर आते हैं। मंदिर समिति ने संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा और निगरानी मजबूत करने के लिए रोडमैप तैयार किया है। सुरक्षा व्यवस्था में एआई आधारित आधुनिक तकनीक को शामिल करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके साथ ही यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।

तीर्थपुरोहितों के लिए बनाया गया कल्याण कोष

तीर्थपुरोहितों और हकहकूकधारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पहली बार कल्याण कोष बनाया गया है। इस कोष के माध्यम से आपात स्थिति में तीर्थपुरोहितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा मंदिर समिति के कर्मचारियों के लिए भी अलग कल्याण कोष बनाने पर विचार किया जा रहा है। बीकेटीसी का कहना है कि यात्रा व्यवस्था के साथ-साथ इससे जुड़े लोगों के हितों और सुविधाओं पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है।

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