राज्यमंत्री दर्जे के उपाध्यक्ष का पहला दौरा फीका, मोर्चा न जुटा पाया भीड़ न निभा पाया प्रोटोकॉल
एफएनएन, रुद्रपुर : उत्तराखंड किसान आयोग के उपाध्यक्ष और राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त सुरेंद्र सिंह नामधारी के रुद्रपुर आगमन पर इस बार सवाल उनके ऊपर नहीं, बल्कि भाजपा किसान मोर्चा की कार्यशैली पर खड़े हो गए। यह उनका शपथ ग्रहण के बाद पहला दौरा था, जिसके लिए संगठनात्मक रूप से व्यापक तैयारी और मजबूत उपस्थिति की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आई।
खासतौर पर किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष राजेश बजाज की भूमिका चर्चा में है। जिस मोर्चे की जिम्मेदारी किसानों और संगठन को जोड़ने की होती है, वही अपने शीर्ष पदाधिकारी के स्वागत में भीड़ तक नहीं जुटा पाया। आरोप यह भी हैं कि मोर्चा अपने ही पदाधिकारियों को कार्यक्रम की सूचना देने में नाकाम रहा, जिसके चलते कार्यक्रम में गिनती के लोग ही नजर आए।
स्थिति यहां तक रही कि प्रोटोकॉल के तहत आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पर्याप्त लोगों की व्यवस्था नहीं हो सकी। न तो कार्यकर्ताओं की उपस्थिति दिखी और न ही संगठन की सक्रियता—जिससे कार्यक्रम पूरी तरह औपचारिकता बनकर रह गया।
राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जब राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त पदाधिकारी का पहला दौरा ही इस तरह बिना तैयारी के गुजर जाए, तो संगठन की जमीनी पकड़ पर सवाल उठना लाजिमी है। खासकर तब, जब यह जिम्मेदारी सीधे तौर पर किसान मोर्चा और उसके नेतृत्व पर आती हो।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि मुद्दा व्यक्ति नहीं, बल्कि संगठनात्मक समन्वय और तैयारी का है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में ऐसे मौके भी संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं।यह मामला किसी एक नेता की नहीं, बल्कि संगठन की कार्यशैली का आईना है—जहां पद बड़ा था, लेकिन तैयारी और प्रबंधन छोटे साबित हुए।
बॉक्स:
👉 पहला दौरा, लेकिन तैयारी नदारद
👉 किसान मोर्चा नहीं जुटा पाया भीड़
👉 पदाधिकारियों तक नहीं पहुंची सूचना
👉 प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी प्रोटोकॉल फेल





