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पीएम दौरे पर हरीश रावत का निशाना: अहम परियोजनाओं की अनदेखी और ट्रैफिक चुनौतियों पर उठाए सवाल

एफएनएन, देहरादून : देहरादून में हाल ही में प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat ने तीखी लेकिन संतुलित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami दोनों के भाषण ध्यान से सुने, लेकिन उन्हें इस बात का अफसोस रहा कि कुछ अहम क्षेत्रीय मांगों का जिक्र नहीं किया गया।

अधूरी रह गईं अहम सड़क परियोजनाओं की मांग

हरीश रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari की मौजूदगी के बावजूद आदि कैलाश–बागेश्वर–कोसी–रामनगर–दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे और कंडी मार्ग जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं का मुद्दा नहीं उठाया गया। उन्होंने सुझाव दिया कि कंडी मार्ग पर एलिवेटेड रोड बनाई जा सकती है, जिससे विकास और पर्यावरण दोनों का संतुलन बना रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में देहरादून–हरिद्वार मार्ग पर कुछ स्थानों पर एलिवेटेड संरचनाएं बनाई गई थीं, उसी तर्ज पर नए प्रोजेक्ट विकसित किए जा सकते हैं।

एक्सप्रेस हाईवे : वरदान भी, चुनौती भी

देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेस हाईवे को लेकर रावत ने मिश्रित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे एक ओर राज्य के लिए बड़ी सौगात बताया, तो दूसरी ओर संभावित ट्रैफिक और शहरी दबाव जैसी समस्याओं की आशंका भी जताई। उनका कहना है कि आने वाले समय में शहर के भीतर बढ़ते जाम और bottlenecks का समाधान भी सरकार को प्राथमिकता से करना होगा।

प्रधानमंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया

हरीश रावत ने प्रधानमंत्री के भाषण के एक पहलू की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि इस बार प्रधानमंत्री ने विपक्ष की आलोचना करने के बजाय सहयोग और सामूहिकता की बात की, जो सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आमतौर पर भाजपा नेता विपक्ष पर तीखे हमले करते हैं, ऐसे में यह बदलाव स्वागत योग्य है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री जैसे पद से विपक्ष के खिलाफ कठोर शब्द सुनना अच्छा नहीं लगता, क्योंकि यह पद पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता है।

केंद्रीय नेताओं पर भी टिप्पणी

रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और रक्षा मंत्री Rajnath Singh के दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वे राज्य को कोई बड़ी सौगात नहीं दे पाए, लेकिन राजनीतिक आलोचना जरूर की।

परिसीमन और महिला आरक्षण पर राय

उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पूरा देश और विपक्ष एकजुट है। वहीं परिसीमन (delimitation) को लेकर उन्होंने सावधानी बरतने की सलाह दी। उनका कहना है कि छोटे राज्यों और दक्षिण भारत के राज्यों की आवाज कमजोर न हो, इसके लिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

राज्य की राजनीति पर संकेत

हरीश रावत ने यह भी संकेत दिया कि उत्तराखंड भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान का असर भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही शहरी ट्रैफिक और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकालेगी।

निष्कर्ष

पूर्व मुख्यमंत्री Harish Rawat का यह बयान एक ओर जहां सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ सकारात्मक पहलुओं की सराहना भी करता है। उनका जोर इस बात पर रहा कि विकास योजनाएं केवल घोषणा तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जाए।

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