Sunday, February 22, 2026
03
20x12krishanhospitalrudrapur
IMG-20260201-WA0004
previous arrow
next arrow
Shadow
Homeराज्यउत्तर प्रदेशसाहित्यकार डॉ. महेश 'मधुकर' को 'शब्दांगन' का 'पांचाल साहित्य शिरोमणि सम्मान'

साहित्यकार डॉ. महेश ‘मधुकर’ को ‘शब्दांगन’ का ‘पांचाल साहित्य शिरोमणि सम्मान’

होली के उपलक्ष्य में काव्य गोष्ठी में कवियों ने रंगारंग गीतों और ग़ज़लों से खूब बांधा समां

फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो,बरेली। साहित्यिक संस्था ‘शब्दांगन’ के तत्वावधान में कूंचा डालचंद्र, बिहारीुपर के श्रीराम मंदिर सभागार में होली के उपलक्ष्य में सरस काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। साथ ही प्रसिद्ध साहित्यकार डाॅ महेश ‘मधुकर’ को उनकी विशिष्ट साहित्यिक उपलब्धियों के लिए “पांचाल साहित्य शिरोमणि सम्मान ” से सम्मानित भी किया गया।

‘शब्दांगन’ के अध्यक्ष डॉ. सुरेश रस्तोगी, महामंत्री इंद्रदेव त्रिवेदी, उपाध्यक्ष डॉ. अवनीश यादव और रामकुमार ‘अफरोज’ ने साहित्यकार डाॅ. महेश मधुकर को उत्तरीय, पगड़ी, मोती की माला और ‘शब्दांगन’ संस्था का मेडल पहनाकर तथा ‘पांचाल साहित्य शिरोमणि सम्मान’ अभिनन्दन पत्र भेंटकर सम्मानित किया।

अपने सम्मान पर साहित्यकार डाॅ. महेश मधुकर ने ‘शब्दांगन’ संस्था का आभार व्यक्त किया और कई श्रेष्ठ रचनाएं सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। साथ ही भविष्य में संदेशप्रद काव्य ग्रंथ लिखते रहने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर उपस्थित रचनाकारों ने अपनी रंगारंग रचनाओं से काव्य प्रेमियों को खूब आनंदित किया। कार्यक्रम का प्रारंभ कवि मनोज दीक्षित टिंकू की वाणी वंदना से हुआ। अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कवि हिमांशु श्रोत्रिय निष्पक्ष ने समां बांधा-
होली पर गंभीर न होंगे
मुस्कानों में पीर न होंगे।
रसवंती रसना कहती है,
शब्द सुमन शमशीर न होंगे।।
कवि रामप्रकाश सिंह ओज ने मंगलमयी होली की कामना यूं की –
घर-घर में रंगोली हो
कोयल जैसी बोली हो।
करता प्रभु से यही विनय
सबकी अच्छी होली हो।।
कवि कैलाश मिश्र ‘रसिक’ ने ब्रज की होली की अनुभूति कराते हुए कहा –
लाल भये होरी के रंग लाल
लाल पकरि लियो पी छू से
मिल दयो रंग गुलाल।।
कवि उमेश अद्भुत ने होली पर मन के मैल मिटाने की कामना ऐसे की-
अद्भुत होली में हो जाये
भस्म दिलों के मैल।
रंग प्रेम का आज विश्व में
चहुं दिशि जाये फैल।।
हास्य कवि मनोज टिंकू ने हास्य की अनेक कविताओं से खूब समां बांधा –
जिस दिल में साली नहीं
होली का क्या काम।
कैसे उसको चैन हो,
कैसे हो आराम।।
कवि डाॅ. अवनीश यादव का ये दोहा खूब सराहा गया-
के सच महुआ मंजरी, रासरंग रसधार।
फागुन लेकर आ गया, सारे सब सिंगार।
संचालन कर रहे महामंत्री इंद्रदेव त्रिवेदी की होली की ये ग़ज़ल खूब पसंद की गई-
होली पर कुछ बवाल मत करना।
टेढ़े मेढ़े सवाल मत करना।।
साली आ जाए शांत ही रहना,
वीरता का कमाल मत करना।।
जूता आ जाए झुक जरा जाना,
उसके सम्मुख कपाल मत करना।।
होली पर खुद हलाल हो जाना,
औरों को तुम हलाल मत करना।।
नवगीतकार रमेश गौतम के दोहे बहुत सार्थक रहे-
रंगी देह को देखकर, ऐसा हुआ लगाव।
धूल धूसरित हो गये, सन्यासी सब भाव।
परदेशी की राह में, तन-मन हुआ उदास।
मेघदूत लिखने लगा, मौसम कालीदास।।
अन्य रचनाकारों में डॉ महेश मधुकर, उपमेंद्र सक्सेना, रामकुमार अफरोज, विशाल शर्मा, राजकुमार अग्रवाल, जितेंद्र कुमार मिश्रा, संतोष कपूर, डॉ सुरेश रस्तोगी, संजीव अवस्थी, रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’, बिंदु सक्सेना, नरेंद्र पाल सिंह, कन्हैया मिश्र ने होली के गीतों का आनंद दिलाया।
कार्यक्रम का सरस संचालन महामंत्री इंद्रदेव त्रिवेदी ने किया। सभी का आभार अध्यक्ष डॉ सुरेश रस्तोगी ने व्यक्त किया।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments