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बमबारी में 2 जुड़वा मासूमों की मौत, मां ने बच्चों को खुद दफनाया

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एफएनएन, नेशनल डेस्क: पूरा देश जब ऑपरेशन सिंदूर की सफलता की चर्चा कर रहा था, तब जम्मू-कश्मीर के पुंछ में एक परिवार के लिए वह दिन किसी आम सुबह जैसा था। देश की सुरक्षा से बेखबर, 12 वर्षीय जुड़वा बच्चे जोया और अयान रोज की तरह स्कूल गए, मां उरूसा ने उनके पसंदीदा खाने से दिन को खास बनाया। लेकिन शाम होते-होते उस परिवार की दुनिया हमेशा के लिए बदल गई।

पति को अस्पताल पहुंचाया फिर बच्चों को खुद दफनाया
रात के वक्त अचानक तेज धमाकों ने पूरे इलाके को दहला दिया। धमाकों की आवाज से रमीज खान, उनकी पत्नी और दोनों बच्चे सहम गए। पूरी रात डर और अनिश्चितता में काटने के बाद सुबह होते ही उन्होंने सुरक्षित स्थान पर जाने का फैसला किया। लेकिन घर से बाहर निकलने के कुछ ही क्षण बाद हुए धमाके ने सबकुछ तबाह कर दिया। धमाके में दोनों मासूम, जोया और अयान की मौके पर ही मौत हो गई। पिता रमीज खान गंभीर रूप से घायल हो गए। मां उरूसा भी घायल थीं, लेकिन बच्चों को खोने के गम ने शारीरिक दर्द को पीछे छोड़ दिया। होश में आते ही उन्होंने अपने पति को अस्पताल पहुंचाया और फिर अपने बच्चों को खुद दफनाया।

“एक पल में उजड़ गई ज़िंदगी”
परिवार के करीबी बताते हैं कि रमीज खान, जो पेशे से शिक्षक हैं, अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए ही दो महीने पहले पुंछ में स्कूल के पास किराए पर घर लेकर शिफ्ट हुए थे। यह कदम उनके लिए काल बन गया। बच्चों की मौसी ने मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि, “काश दोनों में से एक बच्चा बच गया होता, तो शायद जीने का कोई सहारा रह जाता।” उनका कहना था कि सीजफायर चाहे लागू हो गया हो, लेकिन जो जख्म उन्हें मिले हैं, वो ताउम्र नहीं भर सकेंगे।

भारत-पाक तनाव के बीच मासूमों की बलि
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की हत्या के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह किया। जवाब में पाकिस्तान ने भारतीय सीमावर्ती गांवों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस हमले में पुंछ के जुड़वा मासूमों समेत 20 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई। पाकिस्तान की ओर से की गई बमबारी में एक दो साल की बच्ची आइशा नूर भी मारी गई। आम लोग, जो न तो युद्ध का हिस्सा थे और न ही किसी हिंसा में शामिल, उन्हें भी इस संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।

जश्न के बीच उठते सवाल
जहां भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर लागू हुआ, वहीं पाकिस्तान में जीत के जश्न और रैलियों की तस्वीरें सामने आईं। पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी जैसे लोग मंच से भारत के खिलाफ जहर उगलते नजर आए। सवाल यह है कि यह जश्न किस बात का है? मासूमों की मौत पर?

नफरत की लड़ाई में इंसानियत की हार
यह सिर्फ पुंछ के अयान और जोया की कहानी नहीं है। यह उस हर परिवार की कहानी है जो इस संघर्ष का शिकार बना है। सीमा पर थमी गोलियों की आवाज़ें शायद एक दिन शांति लेकर आएंगी, लेकिन जिन घरों ने अपने बच्चों को खो दिया, उनके लिए यह जंग कभी खत्म नहीं होगी।

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