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शुमायला की मां माहिरा ने भी फर्जी दस्तावेजों से हथियाई थी बेसिक टीचर की नौकरी, बाद में बर्खास्त भी हुई थी

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एफएनएन ब्यूरो, बरेली/रामपुर। नकली स्थायी निवास और अन्य फर्जी दस्तावेजों से बेसिक शिक्षा विभाग नें सहायक अध्यापिका की नौकरी हथियाने और अधिकारियों की आंखों में पिछले नौ साल से धूल झोॆकते हुए मोटी तनख्वाह उठाने वाली शुमायला खान इतना बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाली अपने परिवार ती अकेली पाकिस्तानी महिला नहीं है। वर्षों पहले शुमायला की पाकिस्तानी मूल की मां माहिरा खान को भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अधंयापिका की नौकरी हासिल करने पर पकड़ा गया था और बर्खास्त भी कर दिया गया था।

माहिरा खान ने 22 जनवरी 1992 को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर  बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका के रूप में नौकरी हासिल की थी। लेकिन उसकी काली सच्चाई जल्द ही सबके सामने आ गई थी कि उसने गलत दस्तावेजों के जरिए सहायक अध्यापिका पद पर पोस्टिंग पाई थी। बाद में उसे भी बर्खास्त कर दिया गया था।

शुमायला खान, पाकिस्तानी महिला, जो नौ साल से थी बेसिक टीचर

रामपुर सदर तहसील प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक जानकारी ते अनुसार, माहिरा खान का जन्म पाकिस्तान में हुआ था। उनका विवाह 17 जून 1979 को पाकिस्तान के लाहौर में रहने वाले सिबगत अली से हुआ था। शादी के तीन साल बाद, किसी विवाद के कारण माहिरा ने अपने पति को छोड़ दिया और अपने दोनों बच्चों शुमायला और आलिमा के साथ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के रामपुर शहर में आ गईं। उस समय उसके पास उसका और दोनों बेटियों शुमायला और आलिमा के पाकिस्तान के नागरिकता प्रमाणपत्र थे, लेकिन भारत में आने के बाद भी उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं हुई।

माहिरा ने भारत में बनवाए थे फर्जी दस्तावेज

माहिरा खान ने भारत में आकर अपने और अपनी बेटियों के लिए कई दस्तावेज बनवाए। शुमायला ने भारतीय दस्तावेज प्राप्त करने के लिए अपने जन्म प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया, जिसे उसकी मां ने बनवाया था। इसी दौरान शुमायला ने अपना फर्जी भारतीय पैन कार्ड भी बनवा लिया जिसमें उसकी जन्मतिथि 5 अगस्त 1981 दर्ज थी। इस तरह से उसने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेहद संगीन आपराधिक कृत्य को अंजाम देते हुए बेसिक शिक्षा विभाग में लायक अध्यापिका की सरकारी नौकरी हासिल करने के मक़सद से अपनी पहचान को भारतीय नागरिक के रूप में पेश किया।

रामपुर में हुई शुमायला की प्रारंभिक शिक्षा, बीटीसी की और बन गई टीचर

शुमायला खान की शिक्षा पूरी तरह से भारत में हुई थी। उसने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रामपुर में ही प्राप्त की। बाद में उसने मेरिट के आधार पर बीटीसी (बेसिक ट्रेनिंग कौंसिल) में दाखिला लिया और प्रशिक्षण प्राप्त किया। बीटीसी पूरा करने के बाद, 2015 में उसे सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्ति मिली। उसका पहला कार्यस्थल फतेहगंज के माधोपुर में स्थित प्राथमिक स्कूल था।

जांच में खुलासे पर मई 2022 में ही हो गई थी सस्पेड

माहिरा खान और शुमायला के संदिग्ध दस्तावेजों की जांच शुरू हुई, जब यह मामला शिक्षा विभाग के संज्ञान में आया। मई 2022 में जांच के आधार पर शुमायला को निलंबित भी कर दिया गया। रामपुर के एसडीएम ने भी अपनी रिपोर्ट में शुमायला के पाकिस्तानी नागरिक होने की पुष्टि की।

पहले निलंबित, फिर बहाल और बाद में बर्खास्त हुई थी मां माहिरा

शुमायला की मां, माहिरा खान, के खिलाफ भी एक लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। उन्होंने पाकिस्तान से भारत आने के बाद अपनी पहचान को छुपाया और बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी पाने के लिए गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इस मामले में एलआईयू ने 1983 में रिपोर्ट दर्ज की थी। हालांकि, तब माहिरा को कोई गंभीर सजा नहीं मिली थी। लेकिन 1992 में जब सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया, तो उन्हें शिक्षक पद से निलंबित कर दिया गया। बाद में, उन्हें फिर से बहाल किया गया, लेकिन एक बार फिर, फर्जी दस्तावेजों के मामले में बर्खास्त कर दिया गया।

यह रही सस्पेंस और थ्रिल से भरपूर शुमायला की पूरी स्टोरी

बीटीसी डिग्री और कूटरचित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शुमायला खान की नियुक्ति 7 अप्रैल 2015 को बरेली जिले में फतेहगंज पश्चिमी विकास क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय माधोपुर में सहायक टीचर के रूप में हुई थी। शुमायला ने नियुक्ति के दौरान एसडीएम सदर, रामपुर के कार्यालय से जारी निवास प्रमाण पत्र लगाया था। जांच के बाद पाया गया कि प्रमाण पत्र गलत है। शुमायला वास्तव में पाकिस्तानी नागरिक है। बाद में LIU से जिला प्रशासन को गोपनीय रिपोर्ट मिली थी कि शुमायला पाकिस्तानी नागरिक है।  उसने तथ्यों को छिपाते हुए कूटरचित निवास प्रमाणपत्र, पैन कार्ड आदि के जरिए बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल की थी।

शुमायला खान, पाकिस्तानी महिला, जो नौ साल से थी बेसिक टीचर

शुमायला का जन्म पाकिस्तान में, पढ़ाई और नौकरी भारत में

पाकिस्तान में जन्मी शुमायला फिलहाल रामपुर जिले में रहती है। जन्म के बाद मां के साथ ही वह भारत आ गई थी, लेकिन यहां उसे नागरिकता नहीं मिली, लेकिन उसकी मां ने बेटी का यहीं पर जन्म-प्रमाणपत्र बनवाया। महिला टीचर ने धीरे-धीरे देश में सभी डॉक्यूमेंट बनवा लिए। उसके पास से मिले पैनकार्ड में जन्मतिथि 5 अगस्त, 1981 दर्ज है। उसके पिता का नाम सितावत अली खान लिखा है। उसकी पढ़ाई रामपुर में हुई। इसके बाद मेरिट के आधार पर उनका बीटीसी में चयन हुआ। बीटीसी करने के बाद सहायक टीचर के पद पर 2015 में नियुक्ति मिल गई।

मई 2022 में ही हो चुकी है निलंबित, अब बर्खास्त, रिकवरी भी होगी

पाकिस्तानी महिला शुमायला खान ने कूटरचित दस्तावेजों से नौ साल पहले बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका की नौकरी हथिया ली थी।प्रथम दृष्ट्या मामला संज्ञान में आने पर मई 2022 में ही शमायला को निलंबित कर जनक जागीर प्राथमिक विद्यालय से संबद्ध कर दिया था और विभागीय जांच भी बैठा दी गई थी। अब प्रशासनिक और विभागीय जांच में भी गंभीर आरोपों की पुष्टि होने के बाद शमायला खान की सहायक अध्यापिका पद से सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। साथ ही उसके विरुद्ध फतेहगंज पश्चिमी थाने में संगीन धाराओं में एफआईआर भी दर्ज करवा दी गई है। पिछले लगभग नौ साल में गलत ढंग से नौकरी हासिल कर  वसूले गए वेतन-भत्तों की ब्याज सहित बर्खास्त सहायक अध्यापिका शमायला की चल-अचल संपत्ति से वसूली कराने की प्रक्रिया भी विभाग द्वारा शुरू करवा दी गई है।-भानुशंकर गंगवार, खंड शिक्षा अधिकारी, विकास क्षेत्र-फतेहगंज पश्चिमी।

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