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पौष पूर्णिमा-मकर संक्रांति के प्रथम मुख्य स्नान पर प्रयागराज महाकुंभ के सभी घाटों पर उमड़ाुं आस्था का भारी जनसैलाब

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फ्रंट न्यूज नेटवर्क राज्य ब्यूरो, प्रयागराज। प्रयागराज में 12 साल बाद भव्य महाकुंभ के पौष पूर्णिमा और मकर संक्रांति के प्रथम स्नान पर पवित्र संगम समेत अन्य सभी घाटों पर अटूट श्रद्धा, आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक एकता का भारी जनसैलाब सा उमड़ पड़ा। देश-विदेश और उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से आए कई करोड़ लोग प्रयागराज के विभिन्न घाटों पर सोमवार रात तीसरे पहर से ही स्नान, ध्यान, दान-पुण्य में जुट गए थे।

सोमवार 13 जनवरी को 144 वर्षों में पहली बार महाकुम्भ में इतनी आध्यात्मिक भव्यता-दिव्यता देखी गई। पूरे देश और दुनिया भर से आए भक्तों का बहुत बड़ा समूह जप-तप, ध्यान-साधना में लीन देखा गया। सबने महाकुंभ की बेजोड़ सांस्कृतिक विरासत को बहुत करीब से देखा और महसूस भी किया।‌

स्थायी और अस्थायी घाटों पर स्नानार्थियों की भारी भीड़
पवित्र नगरी प्रयागराज में संगम नोज समेत सभी स्थायी और अस्थायी घाटों पर सोमवार रात तीसरे पहर से दोपहर बाद तक श्रद्घालुओं का सैलाब सा उमड़ता रहा। महाकुंभ 2025 के 45 दिवसीय अनुष्ठान में श्रद्धालुओं की वास्तविक संख्या उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए अनुमान से भी कहीं ज्यादा हो सकती है।

लगते रहे हर-हर महादेव, जय श्री राम और जय बजरंग बली के जयकारे

संगम नोज समेत सभी प्रमुख घाटों पर डुबकिय़ों के बीच श्रद्धालु हर-हर महादेव, जय श्रीराम और जय बजरंग बली के जयकारे भी लगा रहे थे। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु लंबी और कठोर यात्रा करके महाकुंभ नें पहुंचे हैं।

महाकुंभ की भव्यता ने दुनिया भर से आए पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी मंत्रमुग्ध कर दिया। संगम घाट पर विदेशी तीर्थयात्रियों और साधकों का तांता लगा रहा।

दक्षिण कोरिया के कई यूट्यूबर महाकुंभ के दिव्य अनुभव को अपने कैमरों में कैद करते देखे गए, जबकि जापान के पर्यटकों ने स्थानीय गाइडों से महाकुंभ के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को समझने में जुटे रहे। रूस-अमेरिका समेत यूरोप के विभिन्न देशों से आए बहुत से श्रद्धालु भी आस्था और एकता के इस महापर्व के साक्षी बने और डुबकियां भी लगाईं।

अंतरराष्ट्रीय मेहमानों में स्पेन की क्रिस्टीना भी शामिल हैं, जो कल्पवास के लिए आई हैं।

महाकुंभ की जीवंत ऊर्जा संगम मेला और लेटे हनुमान मंदिर के पास के बाजार क्षेत्रों तक फैल गई। पूजा सामग्री के विक्रेता और तिलक कलाकार भक्तों की बढ़ती भीड़ को संभालने में व्यस्त देखे गए। प्रसाद, चुनरी और दीया सामग्री बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं की मानें तो इस महाकुंभ में तीर्थयात्रियों की आमद 2019 के कुंभ मेले से भी अधिक हो गई है।

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