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‘आर्थिक संकट’ में भी कोरोना ने बनाया देशवासियों को ‘आत्मनिर्भर’

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  • पत्रकार की कलम ✍️  से 

चीन से फैले ‘कोरोना वायरस’ कोविड 19 के संक्रमण ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में लेकर जिस प्रकार मौत का तांडव व हाहाकार मचाया और सभी देशों को घुटनों के बल ला दिया, जिसके बाद भले ही आज सभी देश चीन के कृत्य की निंदा कर प्रतिबंध लगाने को मजबूर भी हुए। आज हालात यह है कि चीन अब अकेला पड़कर अपने ही बनाए डैम को बचाने को अपनी ही बाढ़ के चक्रव्यूह में फंस गया है। कोविड 19 के बाद अब सभी को यह सोचने को बाध्य किया कि अब दुनिया में दिखावा की परंपरा और अधिक नहीं चलने वाली है। भारतवासियों ने भी पूरे संसार को यह संदेश दे दिया कि आर्थिक तंगी के दौर में भी हम संयम बरत कर ‘कोविड 19 के वायरस’ से अपनी और परिवार की रक्षा कर सकते हैं, साथ ही आर्थिक तंगी में भी, ‘आत्मनिर्भर’ बनकर संकट काल मे भी जीवन बचा सकते है। 21 मार्च 2020 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गंभीर संकट को पूर्व में भाप कर जब भारत मे ‘लॉकडाउन’ लगाने की घोषणा की, उस समय कुछ दलों एवं एक वर्ग ने काफी टीका टिप्पणी भी की। परन्तु देशवासियों ने इस संकट की घड़ी में सरकार का साथ देकर और कोविड नियम का सख्ती से पालन कर एक ओर स्वयं व अपने परिवार की जीवन रक्षा की और विश्व को दिखा दिया कि भारतवासी एकजुट होकर संकट को टाल भी सकते है। यही कारण रहा कि देश मे ‘अनलॉक-2’ जाते जाते विश्व की तुलना में मौत का आंकड़ा भारत मे काफी कम रहा। आज हालात यह है कि जब तक कोरोना ‘वैक्सीन’ बाजार में नही आती हम सबको कोविड नियम का सख्ती से पालन कर दो गज की दूरी एवं मास्क के साथ ही संयम बरतने को मजबूर ही रहना होगा। अनावश्यक भीड़ से बचना होगा। सभी को यह याद रखना होगा कि जब पीपीई किट पहनने के बाबजूद डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ भी नहीं बच पाया। अमिताभ बच्चन जैसे ‘आइकन’ भी वायरस से पीड़ित होकर मुश्किल से बड़े अस्पताल में क्वारंटीन रहकर जीवन बचा सके, तो हम जैसे आम नागरिक को 20 या 30 रुपये का मास्क पहनने के बाद अगर वायरस ने चपेट में ले लिया तो क्या हश्र होगा। अतः सख्ती से अब आने वाले अनलॉक-3 में भी कोविड नियम का तब तक तो पालन करना ही होगा, जब तक इस वायरस की वैक्सीन बाजार में नहीं आती। भारत सहित कई देशों में आजकल वैक्सीन के मानव पर परीक्षण चल भी रहे है, जिनके अगले कुछ माह में सफलता के परिणाम भी आ सकते हैं। इस कोरोना काल में भारतवासियों ने विश्व को संयमित जीवन जीकर यह भी दिखा दिया कि हम लोग आर्थिक संकट में भी नौकरी, काम धंधों पर संकट होने के बाद भी आत्मनिर्भर बनकर कोविड नियम का पालन कर अपनी एवं परिवार की रक्षा भी कर सकते हैं। कम खर्च में भी परिवार को चला सकते हैं। जबकि सरकार भी राशनकार्ड वालांे को अनाज भी कई माह से सुलभ करा रही है। इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि कोरोना काल में काफी लोगाें ने अपनी नौकरी भी गंवाई, पर अनलॉक-2 में भी जान बचाने में अब तक तो अधिकांश देशवासी सफल रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश ‘जान है तो जहान है’ पर लोगो ने मास्क पहन कर और दो गज की दूरी रखकर नियम को ही अब अपना धर्म मान लिया। शादी, पार्टी, क्लब के समारोह, जन सभाएं, पार्टी मीटिंग, त्योहार, सावन, कावड़ यात्रा, ईद, जयंती समारोह की भव्यता बीते दिनों की याद बन गए। ईश्वर में भी आस्था बढ़ी। रोज होने वाली मीटिंग की जगह वेविनार, वर्चुअल मीटिंग ने ले ली। आनाप-शनाप दिखावे को होने बाले खर्चो पर भी अंकुश लगा। पेट्रोल एवं खानपान पार्टी के जंगफूड जैसे अनावश्यक खर्चे पर भी अंकुश लगा। घर में काम वाली बाई के नहीं आने पर घरेलू काम स्वम कर हम सभी लोग आत्मनिर्भर बने और समाज के लोगाें को उसकी इमेज डाल कर गर्व से बताया कि वर्तन भी साफ किए, घर का पौष्टिक भोजन कर शरीर की इम्युनिटी पॉवर भी बढ़ाई। किचन में नए सस्ते पकवान भी बनाए। देसी पेय, नीबू पानी, काढ़ा पीने को आदत में शामिल किया। परिवारों में आपसी संवाद भी बढ़ा। लोगों से हाल चाल जाना। खाली समय मे पौधे भी रोप कर पर्यावरण की रक्षा की। यह बात सही है कि भारत मे जाड़ा, गर्मी, बरसात का मौसम झेलने की आदत ने हमारी शरीर की इम्युनिटी पॉवर को बढाया और अन्य देशाें की तुलना में कोरोना वायरस के हमले से भी काफी हद तक हमें बचाया। डॉक्टर या अस्पताल में अनावश्यक होने बाली पैथोलॉजी जांच, प्रसव से होने वाले ऑपरेशन की संख्या में भी निरंतर गिरावट आई। लोगों का दवा का खर्च भी जेनरिक दवा ने कम किया। चीन का सामान बहिष्कार कर देशवासी विदेशी मुद्रा बचाने में भी सहभागी बने। कोरोना काल में देश मे पीपीई किट, वेंटिलेटर से लेकर मास्क तक बनने शुरू हुए। रोजगार का नया मार्ग खुला, जिनका निर्यात भी किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने नोएडा, मुंबई और कोलकाता में प्रतिदिन 10 हजार जांच करने वाली तीन टेस्टिंग लैब शुरू कर दीं। यह हर्ष की बात है कि देश मे अब तक नौ लाख से अधिक कोरोना रोगी सही भी हुए। अन्य देशों को भारत ने हाइड्रोक्लोरोक्वीन दवा भी निर्यात की। ऑफिस में वर्क टू होम कल्चर अपनाया गया। कुल मिलाकर कहे कि इस कोरोना काल के अनलॉक 2 में अब भी हमने सभी कोरोना नियम पालन कर सावधानी रखी। अब अनलॉक 3 त्योहारी सीजन वाला होगा। जिसमें जागरूकता रखकर हम सतर्क देशवासी बनें। वैक्सीन अगले कुछ महीनों में आ भी गई तो भी आम जनता तक पहंुचने में काफी समय लगेगा। स्मरण रहे पोलियो का टीका आने के बाद कई साल में उस पर अंकुश लगा। यही बात कोरोना वैक्सीन पर भी लागू होगी। अतः हमें इस बीमारी के साथ जूझकर सतर्क रहना होगा। हम सभी लोग अनावश्यक बाजार की भीड़ बनने से भी बचें।

nirbhay saxena 

निर्भय सक्सेना, बरिष्ठ पत्रकार
113 बजरिया पूरन मल, पटवा गली कॉर्नर, बरेली – 243003
मोबाइल 9411005249 7060205249

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