बुद्धिजीवियों का कोना

‘भारत की पहचान तिरंगा’: नटखट किंतु सहृदय बालमन का काव्यमय जीवंत दस्तावेज

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि कवि मधुकर ने संग्रह के अपने सभी 36 बाल गीतों के साथ पूरा न्याय किया है। बच्चे इन्हें खेलते-कूदते हुए आसानी से गा सकते हैं और भारी-भरकम उपदेशों की घुट्टी पिए बगैर ही काम की बातें खेल-खेल में बड़ी आसानी से सीख भी लेते हैं।

लघुकथाएं…जो सीधे दिल में उतरती हैं

इन्हें पढ़ने के बाद ऐसा प्रतीत होता है मानो लेखकों ने बहुत नजदीक से इनकी समस्याओं को देखा हो। आजकल के इस दौर में भला इन पर कौन लिखना चाहता है? मैं इस लघुकथा संग्रह के सभी लेखकों को साधुवाद देता हूं, जिनकी लघुकथाएं सीधे दिल में उतरती हैं और एक चुभन छोड़ देती हैं।
spot_imgspot_img

पाठकों को भा रही उपन्यास राजधर्म की कहानी, वरिष्ठ पत्रकार संतोष त्रिपाठी ‘प्रखर’ की लेखनी का धमाल

नोएडा में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार संतोष त्रिपाठी 'प्रखर' अपना पहला हिंदी उपन्यास 'राजधर्म...एक अनकही गाथा' लेकर आए हैं। हंस...

पुस्तक समीक्षा : बरेली की समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का सुरम्य गुलदस्ता है ‘ कलम बरेली की ‘

वरिष्ठ पत्रकार निर्भय सक्सेना द्वारा सम्पादित कृति ‘कलम बरेली की’ पढ़ने का सुअवसर मिला। यह कृति बरेली की समृद्ध,...

आजाद भारत की सबसे बड़ी त्रासदी

कोविड-19 महामारी आजाद भारत की सबसे बड़ी त्रासदी है जहां अभी तक लगभग ढाई लाख लोग इस महामारी से...

क्रूर कोरोना…क़ातिल कोरोना, समझना होगा स्वास्थ्य कर्मियों का भी दर्द

अस्पतालों में मौत ने तांडव मचा रखा है। क्रूर कोरोना विकराल लीला दिखा रहा है, अभी पता नही कितनों...

सारे मतभेद भुलाकर सरकार और विपक्ष को कोरोना से निपटना होगा

कोरोना की आंधी (पहली लहर) में मोदी सरकार द्वारा उठाए जोखिम भरे निर्णय से धन की हानि अधिक, जन...

सारी परीक्षा प्रणाली अंको की दीवानी

आज़ादी के इतने बरसो के बाद भी भारतीय पद्धती में सार्वजनिक शिक्षा की व्यवस्था का ना होना एक तरह...