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‘जलपुरुष’ बरार की अगुआई में 11वीं साल भी कारसेवा कर किसानों ने खमरिया घाट पर बनाया कच्चा बांध

उप्र सरकार जल्द शुरू करवा सकती है खमरिया घाट पर पक्के बांध का निर्माण कार्य

तगड़ी पैरवी में लगे हैं बरेली सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार और मीरगंज विधायक डॉ. डीसी वर्मा

गणेश ‘पथिक’
चीफ रिपोर्टर
फ्रंट न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, बरेली। शीशगढ़ के पास स्थित मीरगंज तहसील के ग्राम खमरिया में पश्चिम बहगुल नदी पर लगातार 11वें साल भी सैकड़ों किसानों ने सामूहिक श्रमदान से कच्चा बांध बनाकर एक बार फिर निस्वार्थ समाजसेवा की अनोखी बानगी पेश की है। कच्चे बांध निर्माण का यह बड़ा कार्य 85 वर्षीय जुझारू किसान नेता-पूर्व विधायक जयदीप सिंह बरार की प्रेरणा से उन्हीं के मार्गदर्शन में तकरीबन दो माह की कड़ी मेहनत से संभव हो पाया है। उधर, सांसद-विधायक भी इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को धरती पर उतारने की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

इलाके के कई दर्जन किसान-मजदूर अपना काम-धंधा छोड़कर श्री बरार के नेतृत्व में कच्चा बांध बनाने के लिए पिछले दो माह से सामूहिक श्रमदान (कारसेवा) में जुटे थे।

बांध बनने के बाद एक बार फिर पड़ोसी रामपुर जनपद की विलासपुर तहसील के 15 गांवों और मीरगंज, बहेड़ी तहसीलों के क्रमश: 90, 60 गांवों की तकरीबन 15 हजार हैक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए अगले पांच-छह माह तक पश्चिम बहगुल नदी का साफ पानी भरपूर तादाद में मिलता रहेगा।

बताते चलें कि श्री बरार युवावस्था से ही किसानों के जायज हकूक दिलवाने और उनकी बुनियादी समस्याओं को हल करवाने के लिए महीनों तक किसानों संग धरना-प्रदर्शन कर सरकार-प्रशासन और शुगर मिल प्रबंधन से मुचैटा लेते रहे हैं।

जल संचय और जल संरक्षण के मामले में तो श्री बरार मिशन मोड में अभियान चलाते ही रहे हैं। इसीलिए क्षेत्रीय किसान उन्हें निर्विवाद रूप से ‘रूहेलखंड क्षेत्र का जलपुरुष’ भी कहने लगे हैं।

कच्चे बांध निर्माण के लिए कार सेवा में किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष बरार साहब के नेतृत्व में क्षेत्र के सैकडों किसान सम्मिलित रहे।

इनमें समिति) के प्रबंधक वेद प्रकाश कश्यप, ठाकुर सोमपाल सिंह ढकिया ठाकुरान, चौधरी रघुवीर सिंह कनकटी और ओमपाल सिंह, सरदार जैल सिंह, शार्दूल सिंह, देवेंद्र सिंह (वसेंगा) विनय सिंह (मनकरा) अंगनलाल मौर्य (मोहम्मदपुर) हेमराज मौर्य, रामपाल (पिपरा) आदि प्रमुख हैं।

शासन-प्रशासन भी दिख रहा गंभीर
यहां यह भी बताते चलें कि बरार साहब के जल संचय और जल संरक्षण के जरिए पर्यावरण को बचाने की बरार साहब की वर्षों की कोशिशों को अब शासन-प्रशासन भी गंभीरता से लेने लगा है।

खमरिया बांध को ईको टूरिज्म स्पॉट बनाने की भी तैयारी

पिछले साल तत्कालीन मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल भी खमरिया बांध पर प्राकृतिक झीलनुमा सुंदर-विशाल जलाशय और वहां प्रवास कर रहे लुप्तप्राय प्रजातियों के देसी-विदेशी अनगिनत खूबसूरत परिंदों को देखकर अचम्भित रह गई थीं और श्री बरार के वर्षों के प्रयासों के बाद अस्तित्व में आए बरेली मंडल के अति रमणीय और नयनाभिराम इस स्थल को ईको टूरिज्म स्पॉट के तौर पर विकसित कराने की सभी जरूरी औपचारिकताएं तय समयसीमा में पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश सिंचाई विभाग शारदा खंड के मुख्य अभियंता और अन्य अधीनस्थ अधिकारियों को दिए थे।

तत्कालीन कमिश्नर श्रीमती अग्रवाल, डीएम रविंद्र कुमार और चीफ इंजीनियर (शारदा खंड) की सकारात्मक रिपोर्टों और प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश शासन ने भी खमरिया बांध पर पक्का बांध बनवाने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

मीरगंज विधायक डॉ. डीसी वर्मा, बरेली सांसद छत्रपाल सिंह भी तीन तहसीलों के 165 गांवों की 15 हजार हैक्टेयर से भी ज्यादा कृषि भूमि को सिंचित और हरी-भरी बनाने वाले इस महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के वास्ते वांछित बजट मंजूर और अवमुक्त करवाने के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर तगड़ी पैरवी में जुटे हुए हैं।

सब कुछ ठीकठाक रहा तो निकट भविष्य में पश्चिम बहगुल नदी के खमरिया घाट पर उप्र सरकार बजट अवमुक्त कर पक्के बांध का निर्माण शुरू करवा सकती है।

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