गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड 'धीर' ने की। मुख्य अतिथि गजेन्द्र सिंह और विशिष्ट अतिथि-राम कुमार भारद्वाज अफ़रोज़' रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवि-पत्रकार गणेश 'पथिक' एवं वरिष्ठ साहित्यकार रजत कुमार भी मंचासीन रहे। गोष्ठी का काव्यमय सफल संचालन संस्थाध्यक्ष राम कुमार कोली ने किया।
बेहद ही खूबसूरत और सटीक काव्यमय संचालन कर रहे चर्चित ग़ज़लकार और कवि राज मिश्र 'ग़ज़लराज' की यह सम-सामयिक ग़ज़ल भी खूब सराही गई-
ज़िन्दगी में सिर्फ झंझावात हैं कुछ कीजिए,
हादसा दर हादसा हालात हैं कुछ कीजिए।
सत्यता पर छा रहीं फिर साजिशों की आंधियां,
ग़ुम रहे पीकर के विष सुकरात हैं कुछ कीजिए।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठतम कवि-साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ 'धीर' की इस ग़ज़ल के हर शेअर पर काव्य रसिक देर तक वाहवाह करते और तालियां बजाते रहे-
तुम क्या गए चमन के नज़ारे चले गए।
महफिल से उठके दर्द के मारे चले गए।
पानी के साथ बहके किनारे चले गए।
जैसे भी गुजरी उम्र गुजारे चले गए।