अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठतम कवि-साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ 'धीर' की इस ग़ज़ल के हर शेअर पर काव्य रसिक देर तक वाहवाह करते और तालियां बजाते रहे-
तुम क्या गए चमन के नज़ारे चले गए।
महफिल से उठके दर्द के मारे चले गए।
पानी के साथ बहके किनारे चले गए।
जैसे भी गुजरी उम्र गुजारे चले गए।