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आर्यन को जेल में डालने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकते हैं शाहरुख खान, एनसीबी के खिलाफ लीगल एक्शन लेने की तैयारी

एफएनएन, दिल्ली : बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से आर्यन खान की जमानत को लेकर विस्तृत आदेश जारी होने के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या अब शाहरुख खान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के खिलाफ कोई सख्त कदम उठा सकते हैं? दरअसल, आर्यन खान के बेल ऑर्डर में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि ऐसा कोई भी सकारात्मक साक्ष्य रिकॉर्ड में नहीं है जो अदालत को इस बात पर राजी कर सके कि समान मंशा वाले सभी आरोपी गैरकानूनी कृत्य करने के लिए राजी हो गए। कोर्ट के बेल ऑर्डर के बाद एसआरके फैंस इस मामले में अब शाहरुख खान की चुप्पी टुटने का इंतजार कर रहे हैं। शाहरुख खान अभी तक इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, किंग खान की लीगल टीम ने अब सुपरस्टार को एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े, जो क्रूज-ड्रग केस की जांच नेतृत्व कर रहे थे, और उनके बेटे आर्यन खान पर झूठा आरोप लगाने वाले अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की सलाह दी है। इस मामले में आर्यन खान लगभग तीन सप्ताह तक जेल में बंद रहे और बाद में जमानत पर रिहा हुए।

रिपोर्ट के मुताबिक एसआरके के एक करीबी ने कथित तौर पर एक इंटरटेनमेंट पोर्टल को बताया है ‘शाहरुख खान को आर्यन खान को जेल में डालने वालों के खिलाफ जवाबी कानूनी कार्रवाई की सलाह दी जा रही है। इस मामले में कुछ अप्रत्याशित घटनाक्रम होने की संभावना है।’

  • आर्यन के पास नहीं मिला कोई आपत्तिजनक पदार्थ

बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में 20 नवंबर को आर्यन खान से संबंधित बेल ऑर्डर जारी किया। जिसमें कोर्ट ने कहा कि आर्यन खान के पास से कोई भी आपत्तिजनक पदार्थ नहीं मिला है और इस तथ्य पर कोई विवाद भी नहीं है। मर्चेंट और धमेचा के पास से अवैध मादक पदार्थ पाया गया, जिसकी मात्रा बेहद कम थी। इस मामले में आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन को एनसीबी ने 3 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था।

  • क्या कहा है कोर्ट ने अपने आदेश में?

कोर्ट में आदेश में कहा है ‘अदालत को ऐसे मामलों में पहले यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि क्या इस बात के पर्याप्त सुबूत हैं कि वह प्रथम दृष्टया यह तय कर सके कि आवेदकों (आर्यन खान, मर्चेंट और धमेचा) ने साजिश रची और यह कि अभियोजन एनडीपीएस अधिनियम की धारा 29 के प्रावधान लगाने में सही है।’ अदालत ने यह भी कहा कि जांच अधिकारियों की ओर से दर्ज किए गए कथित इकबालिया बयान वैध नहीं हैं और इसलिए, एनसीबी को उन पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

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